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- Amit Shah To Roll Out National Cooperative Policy 2025 With 20 year Vision
नई दिल्ली2 दिन पहले
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गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पॉलिसी भारत की जरूरतों और विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
नई दिल्ली के अटल अक्षय ऊर्जा भवन में गृहमंत्री अमित शाह ने नई सहकारिता नीति पेश की। उन्होंने कहा कि इससे विकसित भारत की अवधारणा मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी भारत की जरूरतों और विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सहकारिता यानी मिलकर काम करने की सोच को वही सरकार सही मायने में समझ सकती है जो देश की जमीन से जुड़ी हो।
शाह ने आगे कहा, ‘अगर गांव, किसान और आम लोग खुशहाल, रोजगार से जुड़े और संतुष्ट होंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था कभी कमजोर नहीं होगी।’
उन्होंने बताया कि इस नई नीति का मकसद है। सहकारी संस्थाओं को मजबूत करना, गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और लोगों को नए रोजगार देना।
साथ ही उन्होंने सभी राज्यों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी-अपनी राज्य सहकारिता नीति तैयार करने का निर्देश दिया।
यह नीति अगले 20 साल यानी 2045 तक के लिए बनाई गई है। इसके तहत हर पंचायत में समितियां खुलेंगी। पॉलिसी का मकसद है कि गांव-गांव में बनी सहकारी समितियों को और मजबूत किया जाए, जिससे लोग खुद जुड़कर रोजगार पा सकें और देश की तरक्की में हिस्सा ले सकें।
देश के हर गांव में सहकारी संस्थाएं स्थापित की जाएंगी। फरवरी 2026 तक 2 लाख प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटीज (PACS) स्थापित किए जाएंगे।

शाह के भाषण की 2 अहम बातें…
1. नीति का लक्ष्य है 2047 तक विकसित भारत शाह ने कहा कि इस नीति को बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि इसका केंद्रबिंदु लोग, गांव, कृषि, गांव की महिलाएं, दलित और आदिवासी हों।
उन्होंने आगे कहा, ‘अगर इसे एक वाक्य में कहा जाए तो इसका विजन है- सहयोग की समृद्धि के जरिए 2047 तक विकसित भारत बनाना। इसका मिशन है- पेशेवर, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम, जिम्मेदार, आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सफल छोटी सहकारी संस्थाएं खड़ी करना।’
शाह ने आगे कहा;-
सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव में कम से कम एक सहकारी संस्था हो, ताकि गांवों की तरक्की के साथ देश भी आगे बढ़े।

2. सबका साथ, सबका विकास ही सच्चा मॉडल शाह ने कहा, ‘PM मोदी ने दूरदृष्टि से सहकारिता मंत्रालय बनाया ताकि समाज के हर वर्ग को साथ जोड़ा जा सके। जब तक हर नागरिक विकास में भागीदार नहीं होगा, कोई मॉडल सफल नहीं होगा। यह नीति अगले 25 सालों में हर क्षेत्र को सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाएगी।’
सहकारिता नीति के लिए 48 सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में एक 48 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी, जिसमें देशभर की सहकारी संस्थाओं, केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी और जानकार लोग शामिल थे।
कमेटी ने अहमदाबाद, बेंगलुरु, गुरुग्राम और पटना जैसे शहरों में 17 बैठकें और 4 वर्कशॉप कीं। इसमें देशभर से आए 648 सुझावों को ध्यान से समझकर इस नीति में शामिल किया गया।
दरअसल, सरकार चाहती है कि गांव, किसान और छोटे व्यापारी आपस में मिलकर आगे बढ़ें। इसी के लिए यह नीति बनाई गई है, जो अगले 20 सालों तक सहकारिता के जरिए लोगों को आत्मनिर्भर और देश को विकसित बनाने में मदद करेगी।

किसानों की स्थिति में 5 बड़े बदलाव होंगे
- आर्थिक आजादी: अब किसान मंडी और बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेंगे, सहकारी समितियां सीधे उपज खरीदेंगी।
- स्थानीय व्यवस्थाएं: गांवों में डेयरी कलेक्शन, खाद-बीज वितरण और अनाज भंडारण की जिम्मेदारी सहकारी समितियों की होगी।
- महिला-युवा भागीदारी: समितियों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे सामाजिक और आर्थिक मजबूती मिलेगी।
- डिजिटल सहकारिता: सभी समितियां डिजिटल होंगी, जिससे कामकाज पारदर्शी और तेज होगा।
- प्रशिक्षण और शिक्षा: गांव के युवाओं को सहकारी प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे समितियों को बेहतर ढंग से चला सकें।
क्यों जरूरी है नई नीति? सहकारिता नीति आखिरी बार साल 2002 में बनाई गई थी, लेकिन तब से अब तक दुनिया, तकनीक और देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ चुका है। आज का दौर डिजिटल हो गया है, किसान नई-नई चुनौतियों से जूझ रहे हैं और गांवों में रोजगार की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।
कई जगहों पर सहकारी संस्थाएं अपनी भूमिका निभाने में पीछे रह गईं, इसलिए अब एक ऐसी मॉर्डन और प्रोफेशनल नीति की जरूरत थी, जो उन्हें गांवों की आर्थिक रीढ़ बना सके।
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