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घर या ऑफिस में इधर-उधर बिखरे या अव्यविस्थत पड़े सामान सिर्फ जगह नहीं घेरते। यह हमारी मानसिक ऊर्जा पर लगातार बोझ जैसा है। हालिया शोध बताते हैं कि बिखराव यानी अव्यवस्था दिमाग को इस हद तक उलझा देता है कि साधारण काम भी भारी लगने लगते हैं। फोकस टूटता है, तनाव बढ़ता है और काम टालने की आदत गहरी होती जाती है। न्यूरोसाइंटिस्ट सबीन कास्टनर के मुताबिक, अव्यवस्थित माहौल दिमाग की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बाधित करता है। आंखों के सामने मौजूद हर वस्तु दिमाग के लिए एक ‘सिग्नल’ बन जाती है, जिसे वह अनदेखा नहीं कर पाता। यही वजह है कि बिना कुछ किए भी थकान महसूस होती है, क्योंकि दिमाग लगातार काम कर रहा होता है। हालांकि असली समस्या बिखराव नहीं, उससे निपटने का तरीका है। दिमाग बड़े काम को खतरे की तरह देखता है- ‘पूरा कमरा साफ करना है।’ और यहीं से टालमटोल शुरू होती है। व्यवहार विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मानसिक जाल को तोड़ने के लिए काम को इतना छोटा करना जरूरी है कि दिमाग उसे आसानी से स्वीकार कर ले। छोटे कदमों की रणनीति असर दिखाती है। जब लक्ष्य सीमित होता है, तो दिमाग पर दबाव नहीं बनता और शुरुआत आसान हो जाती है। यही शुरुआती एक्शन आगे की गति तय करता है। छोटी सफलता तुरंत संतुष्टि देती है और दिमाग को यह भरोसा मिलता है कि काम उतना कठिन नहीं था, जितना वह मान रहा था। इसी से जुड़ा एक तरीका ‘फीलिंग चेक’ भी है। काम शुरू करने से पहले खुद से पूछना- यह कितना मुश्किल लगेगा? और खत्म करने के बाद फिर वही सवाल दोहराना। अक्सर जवाब बदल जाता है। यह अंतर दिमाग को उसकी अपनी गलत धारणा का अहसास कराता है। सिर्फ शुरुआत का तरीका बदलें, नतीजे अपने आप बदलेंगे हैबिट रिसर्चर बीजे फॉग के अनुसार, ‘5 चीजों का नियम’ टालमटोल तोड़ने का आसान तरीका है। पूरे कमरे की सफाई के बजाय सिर्फ पांच चीजें उठाकर सही जगह पर रखें। जैसे ही आप 5 चीजें हटाते हैं, दिमाग को ‘सेफ्टी सिग्नल’ मिलता है कि काम मुमकिन है। अक्सर देखा गया है कि 5 चीजें उठाने के बाद इंसान का ‘मोमेंटम’ बन जाता है और वह रुकने के बजाय बाकी सफाई भी कर डालता है। छोटा लक्ष्य होने से दिमाग इसे टाल नहीं पाता और काम शुरू हो जाता है। यही छोटी शुरुआत धीरे-धीरे आदत में बदलती है। असल में सफाई सिर्फ चीजों को व्यवस्थित करना नहीं, बल्कि दिमाग को फालतू संकेतों से मुक्त करना है।
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