48 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

- क्रिकेटर केएल राहुल इन दिनों आईपीएल में अपने टॉप फॉर्म के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने बताई वो बातें जो आपको भी हिम्मत देंगी नए शुरुआत करते वक्त…
मुझे याद है कि मैं डेब्यू टेस्ट मैच की पांचों रातों में ठीक से सो नहीं पाया। इसकी वजह थी कि मैं बहुत नर्वस था और मैदान में उतरने को बेताब। अंदर इतनी सारी भावनाएं उमड़ रही थीं। यहां तक कि भीड़ ने भी कुछ आसान नहीं किया। यही तो खेल की खूबसूरती है, खासकर जब आप विदेश में… और वो भी ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच खेल रहे हों। वहां के दर्शक, जो खेल का हिस्सा भी नहीं होते, वे आपके लिए माहौल और मुश्किल बना देते हैं। अपने करियर की शुरुआत में ही दुनिया की सबसे मुश्किल जगह मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया में दो टेस्ट मैच खेलना और वहां शतक बनाना मेरे लिए बड़ी बात थी। मैंने वहां से यह सीख ली कि कैसे शांत रहना है, दबाव को संभालना है। करियर की शुरुआत में ही ऐसा करना मेरे लिए फायदेमंद रहा है। जितनी जल्दी आप जीवन में दबाव सहना सीख जाएंगे, उतनी आसान आगे की राह होगी। वन-डे डेब्यू से पहले मुझे चोटें लगी थीं और मैं टीम से अंदर-बाहर होता रहा था। चोट से ठीक होकर लौटने के बाद मुझे अपने मौके का इंतजार करना पड़ा क्योंकि टीम में जगह नहीं थी। यह बात मुझे हर वक्त तैयार रखती थी। मेरे अंदर वो आग थी कि जब मौका मिलेगा, मैं अच्छा करूंगा। चोट से लौटने के बाद आप चाहते हैं लगातार अच्छा प्रदर्शन करें। मुझे नहीं लगता वो घबराहट पूरी तरह से जाती है। चाहे कितने मैच खेल लें, जब आप देश का प्रतिनिधित्व करने मैदान पर उतरते हैं तो वह ऊर्जा, वो घबराहट हमेशा रहती है। जितना आप खेलते हैं, उतना ही खेल समझते हंै। मैदान में उतरकर खुद को समय देना भी जरूरी है। वही समय आपको अपने खेल पर नियंत्रण पाने का मौका देता है। मैं जब मैदान में जाता हूं, खुद से कहता हूं कि खेल को अपनी गति से खेलूं, विपक्षी टीम की गति से नहीं। इसलिए मैदान में उतरने के पहले 5 मिनट सिर्फ सोचने में लगाता हूं कि मुझे क्या करना है। थोड़ा समय लेकर खुद को मैच की स्थिति में ढालना जरूरी है, फिर धीरे-धीरे घबराहट कम होती है और आत्मविश्वास मिलता है कि आप टीम के लिए सही फैसला कर सकें। जीवन के हर इलाके में आत्मविश्वास पाने का यही तरीका है कि आप काम करते रहें। केवल सोचने से कुछ हासिल न होगा। हर खिलाड़ी की स्वाभाविक प्रगति होती है कि वह नंबर 3 या 4 से बढ़कर टीम का नंबर 1 बने। उस जिम्मेदारी को लेना और खिलाड़ियों का नेतृत्व करना ऐसा है जिसे लेकर मैं हमेशा उत्साहित रहा। चीजों को जितना सरल रखें, उतना अच्छा। आलोचनाओं से कभी प्रभावित नहीं होना चाहिए खिलाड़ी के रूप में हमने यह सीखा है कि आलोचनाएं तो ‘वाइट नॉइज’ होती हैं और हमें उनसे प्रभावित नहीं होना चाहिए। जो लोग आपकी आलोचना कर रहे हैं, वे आपके लिए कुछ नहीं कर रहे। मैं जानता हूं कि अंत में मुझे उसी का फल मिलेगा, जो मेहनत मैंने खेल में लगाई है। मैंने यह सीख लिया है कि इस शोर को कैसे बंद किया जाए, लेकिन कभी-कभी यह परिवार पर असर डालता है और वो फिर हम पर असर करता है।








