रूमी जाफरी6 घंटे पहले
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पंचम दा के साथ आशा भोसले (फाइल फोटो)।
पिछले रविवार यानी 12 अप्रैल को जब आशा भोसले जी के देहावसान की खबर आई तो दिल बैठ-सा गया। यकीन ही नहीं हुआ। एक दिन पहले ही तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था तो लगा था कि एक-दो दिन में ठीक होकर घर आ जाएंगी। मगर अफसोस कि अब वे कभी नहीं आएंगी। उनका शरीर चला गया तो क्या हुआ, उनकी आवाज तो दुनिया में हमेशा के लिए अमर है, हमेशा जिंदा रहेगी।
मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब मानता हूं कि मुझे उनसे मिलने का और उनके साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने मेरी कई फिल्मों में गाने गाए और ज्यादातर रिकॉर्डिंग में मैं मौजूद रहता था। उनसे मेरी मुलाकात कभी किसी रिकॉर्डिंग में तो कभी किसी समारोह में हुई, मगर ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई। उनके साथ वक्त गुजारने का अवसर भी नहीं मिल सका।
आज एक किस्सा मैं आपको बताता हूं। बात 1993 की है। रणधीर कपूर और आर. डी. बर्मन बहुत करीबी दोस्त थे। कुछ सालों से आर. डी. बर्मन के पास फिल्में कम थीं, जबकि नदीम-श्रवण और आनंद-मिलिंद को ज्यादा काम मिल रहा था। तब आर. डी. बर्मन, जिन्हें लोग प्यार से पंचम कहते थे, उन्होंने डब्बू जी यानी रणधीर कपूर से कहा, ‘मेरे पास बहुत कंपोजिशन हैं, बहुत गाने हैं। मैं ये गाने अपने साथ लेकर ऊपर नहीं जाना चाहता। मैं चाहता हूं कि ये फिल्मों में आएं। मुझे पैसों की जरूरत नहीं है, पैसा बहुत है मेरे पास, मुझे फिल्मों की जरूरत है। अभी मैं 1942: ए लव स्टोरी कर रहा हूं।’ डब्बू जी ने कहा, ‘बताओ, मैं क्या कर सकता हूं?’ उस समय ऋषि कपूर का बहुत शानदार दौर चल रहा था। वे रोमांटिक हीरो थे और उनका संगीत बहुत हिट होता था। पंचम दा ने कहा, ‘डब्बू, तुम चिंटू से कहो कि अपनी एक-दो फिल्में दिलवाएं।’
डब्बू जी ने कहा, ‘अरे, इसमें कहने की क्या बात है, ये तो सौ प्रतिशत हो जाएगा। तुम एक काम करो, अपने घर पर डिनर रखो और मुझे व चिंटू को खाने पर बुलाओ। हम आएंगे, दो-दो पैग लगाएंगे, गप्पें मारेंगे, तुम्हारे गाने सुनेंगे, सब काम हो जाएगा।’ इस पर पंचम दा ने कहा कि 31 तारीख के बाद। न्यू ईयर निकल जाए, उसके एक-दो दिन बाद हम डिनर पर मिलते हैं।’ खैर, तारीख तय हो गई। इसके बाद पंचम दा ने आशा जी से कहा कि उन्होंने ऋषि और रणधीर कपूर को डिनर पर बुलाया है। पूरी इंडस्ट्री को पता है कि आशा जी बहुत लाजवाब खाना बनाती हैं। आशा जी ने उनकी बात मान ली।
लेकिन इसी बीच पंचम दा का निधन हो गया। कुछ हफ्ते गुजरने के बाद डब्बू जी ने बताया कि आशा जी का फोन आया और उन्होंने कहा, ‘पंचम ने जो आखिरी चीज मुझसे मांगी थी, वह यही थी कि मैं ऋषि और रणधीर को अच्छे से खाना खिलाऊं। मैं उनकी यह आखिरी ख्वाहिश पूरी करना चाहती हूं और आप दोनों को घर पर डिनर पर इनवाइट करना चाहती हूं।’ हम दोनों ने हां कर दी। वह एक बेहद इमोशनल सीन था। हम उस घर में गए, जहां अब पंचम नहीं थे, लेकिन आशा जी ने हमारी और पंचम दा की सारी पसंदीदा चीजें बनाई थीं। सामने एक कुर्सी पर पंचम दा का फोटो रखा था, जैसे वे भी मौजूद हों और हमें देखकर खुश हो रहे हों। उन्होंने हमें ऐसा महसूस कराया कि पंचम दा हमारे साथ ही हैं। ये थी उनकी मोहब्बत। और उन्होंने पंचम दा से किया हुआ अपना वादा निभाया। पंचम दा और आशा ताई की इसी मोहब्बत पर अहमद फ़राज़ का यह शेर आता है:
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें, जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें।
मुझे उनसे जुड़ा एक और किस्सा याद आ रहा है। पद्मिनी कोल्हापुरे के पिताजी श्री पंढरीनाथ कोल्हापुरे के नाम पर जुहू में एक सड़क का नाम रखा गया। फुटपाथ पर बनी सीमेंट की छोटी-सी दीवार पर उनके नाम का एक संगमरमर का बोर्ड लगाया गया था, जिस पर पर्दा डाला गया था। उद्घाटन के समय उस पर्दे को हटाया जाना था।
एक तो मेन रोड, ऊपर से वहां फिल्मी लोग मौजूद थे। तो भीड़ जुटनी ही थी। काफी भीड़ हो गई, ट्रैफिक जाम लग गया। उसी फुटपाथ पर बोर्ड के पीछे एक दीवार थी, जिसमें और बोर्ड के बीच मुश्किल से तीन-चार फुट की जगह रही होगी। बड़ी मुश्किल से मैंने पीछे की सोसाइटी के चौकीदार से दो कुर्सियां लेकर वहां रखीं। एक पर आशा जी को बैठाया। मैं खुद भी उनके पास बैठ गया। चारों तरफ लोग मोबाइल से तस्वीरें ले रहे थे। दोपहर का वक्त था। तेज गर्मी थी। हवा भी बिल्कुल नहीं आ रही थी। गाड़ियों और हॉर्न की आवाजें भी इतनी आ रही थीं, लेकिन आशा जी के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी। वे लगातार मुस्कराती रहीं। तभी जैकी श्रॉफ आए। उन्होंने देखा कि आशा जी को गर्मी लग रही है। उन्होंने अपनी टोपी उतारकर उससे आशाजी के चेहरे के पास हवा करना शुरू कर दिया। आशा जी ने उन्हें रोका भी, मगर जैकी नहीं माने। जब तक उद्घाटन के लिए आशा जी उठीं नहीं, तब तक वे टोपी से उन्हें हवा करते रहे।
इंसान चला जाता है, बस किस्से ही रह जाते हैं। इसी बात पर आज आशा जी को याद करते हुए उनके हजारों सुपरहिट गीतों में से अपनी पसंद का कोई गीत सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए।









