देश के तमाम भागों में विकास के नाम पर बड़ी आसानी से पेड़ों की बलि दे दी जाती है। लेकिन क्या पेड़ को काटते समय हमें यह ध्यान रहता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में मंदिरों से पहले वन ही हमारे पवित्र स्थल रहे हैं? वास्तव में भारतीय धार्मिक कल्पना की सबसे प्राचीन दिव्य मौजूदगियों में […]
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: बालासाहेब ठाकरे के साथ जैक्सन ने खाई थी इडली
पिछले हफ्ते मैंने अपने इस कॉलम में आपको उस तिकड़ी (आन्द्रे टिमनिस, विराफ सरकारी और साबास जोसेफ) के बारे में बताया था, जिन्हें म्यूजिक इंडस्ट्री के सबसे बड़े लीजेंड्स में से एक माइकल जैक्सन के हिंदुस्तान में पहले कॉन्सर्ट को आयोजित करने का श्रेय जाता है। यह कॉन्सर्ट साल 1996 में हुआ था। आन्द्रे के […]
रसरंग में मायथोलॉजी: धर्म का प्रचार करना रहा है नागार्जुन की कथाओं का उद्देश्य
पिछले सप्ताह हमने जाना था कि जगन्नाथ पुरी के मंदिर में जगन्नाथ और बलभद्र द्वारा पहनी जाने वाली योद्धा पोशाक को ‘नागार्जुन’ कहा जाता है। इसके अलावा, हमने ओड़िया महाभारत में उल्लिखित अर्जुन और नाग कन्या के पुत्र नागार्जुन के बारे में भी जाना। आज की कड़ी में हम हिंदू आख्यानों में वर्णित नागार्जुन के […]
रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: तब आशा जी ने निभाया था डिनर का वादा
रूमी जाफरी6 घंटे पहले कॉपी लिंक पंचम दा के साथ आशा भोसले (फाइल फोटो)। पिछले रविवार यानी 12 अप्रैल को जब आशा भोसले जी के देहावसान की खबर आई तो दिल बैठ-सा गया। यकीन ही नहीं हुआ। एक दिन पहले ही तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था तो लगा था कि एक-दो दिन […]
रसरंग में मायथोलॉजी: शक्ति की उपासना: पाषाण युग से शास्त्रीय परंपरा तक
भारत में देवी पूजा की शुरुआत कब हुई, यह निर्धारित करना काफी कठिन है। संभव है कि इसकी शुरुआत पाषाण युग में हुई हो। यह वह समय था, जब मनुष्य धरती को देवी या किसी महिला के गर्भाशय से जोड़कर देखने लगा था। इसी दौर में पेड़ों और नदियों को भी देवी के रूप में […]
रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: अमरीश पुरी ने स्पिलबर्ग को कर दिया था मना
रूमी जाफरी1 घंटे पहले कॉपी लिंक स्पिलबर्ग की ‘इंडियाना जोन्स’ के एक दृश्य में अमरीश पुरी। मुझे कॉलम लिखते हुए इस साल जून में तीन साल पूरे हो जाएंगे। मैं हाल ही में उन लोगों के बारे में सोच रहा था, जिन पर मैंने अब तक कॉलम नहीं लिखा है। तभी मेरे एक दोस्त का […]
रसरंग में चिंतन: स्वतंत्रता के साथ लिए गए निर्णय भी हमारे होते हैं?
अस्तित्ववादी दार्शनिक ज्यां पॉल सार्त्र हमेशा चयन यानी चॉइस पर जोर देते थे। उनका सवाल था कि जीवन में असली महत्व किसका है – चयन का या चयनहीनता का? हालात के दलदल में फंसे मनुष्य के पास आखिर कौन सी वास्तविक पसंद बचती है? अक्सर मनुष्य परिस्थितियों के षड्यंत्र की कठपुतली बन जाता है। वह […]
रसरंग में मायथोलॉजी: हनुमान की तरह चीन में पूजे जाते हैं वानर राजा
जापान में एक ऐसी कहानी सुनाई जाती है जो समय की हमारी समझ को चुनौती देती है। कहते हैं कि एक बार एक मछुआरे के जाल में एक कछुआ फंस गया। जब उसने कछुए को मुक्त किया, तो कछुआ उसे समुद्र की गहराइयों में स्थित ड्रैगन राज्य ले गया। वहां उसकी भेंट एक अलौकिक राजकुमारी […]
रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जब अन्नू कपूर के नाटक ‘लैला मजनू’ के लिए जुट गए थे 2 हजार दर्शक
आने वाली 20 फरवरी को मुंबई में मेरे सबसे पुराने, सबसे करीबी और दोस्त से भी बढ़कर भाई समान अन्नू कपूर का जन्मदिन है। तो इस बार मेरे हिस्से के किस्से में आज बात अन्नू भाई की। साल 1986 में उनसे मेरी पहली मुलाकात हुई थी। मैं तब सिर्फ 20 साल का था। हमने मिलकर […]
दोनों परमाणु शक्तियों को शांति वार्ता शुरू करनी चाहिए: चैम्पियंस ट्रॉफी से पहले ‘कश्मीर कार्ड’ क्यों खेल रहे हैं शरीफ? – Uttar Pradesh News
पाकिस्तान में सियासी माहौल गरमा रहा है। चैम्पियंस ट्रॉफी के उद्घाटन से कुछ ही दिन पहले वकीलों ने 10 फरवरी से सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का एलान कर दिया है। वकील इस्लामाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विवादास्पद न्यायाधीशों की नियुक्तियों का वि . पत्रकार पहले से ही सोशल मीडिया नियमन संबंधी नए […]
रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: 1951 में आई फिल्म ‘मल्हार’ का ‘बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम’ था पहला सुपरहिट गाना
रूमी जाफरी3 घंटे पहले कॉपी लिंक गीतकारों की शृंखला में अगर मशहूर गीतकार इंदीवर जी के बारे में बात न की जाए तो ये कड़ी अधूरी ही रह जाएगी। इसलिए मेरे हिस्से के किस्से में आज बात करते हैं इंदीवर जी की। उनसे मेरे बहुत करीबी तालुक्कात थे। उनके साथ मैंने बहुत-सा वक्त गुजारा है। […]
रसरंग में मायथोलॉजी: दक्षिण का कुम्भ: हर 12 साल में कुम्भकोणम में होता है ‘महामहम’
देवदत्त पट्टनायक5 घंटे पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु के कुम्भकोणम में भी हर 12 साल में कुम्भ की तरह का एक आयोजन होता है, जिसे ‘महामहम’ कहते हैं। इसमें एक पवित्र तालाब महामहम में डुबकी लगाई जाती है। पिछली बार यह साल 2016 में हुआ था। अगली बार 2028 में आयोजित होगा। कुम्भ मेले का अमृत […]
यह सिंध सरकार की सफलता की कहानी है: जब हिंदू परिवार के घर को म्यूजियम में बदल दिया गया – Uttar Pradesh News
यह कहानी एक सिंधी हिंदू परिवार की है, जो अब पाकिस्तान में नहीं रहता है, लेकिन सिंध सरकार ने उनके घर को एक संग्रहालय में बदलकर उनकी पुरानी यादों को संजोया है। इस हिंदू परिवार के कुछ सदस्य 1947 में मुंबई चले गए थे और जो बच गए थे, वे स्थानीय सामंतों की . अगर […]
रसरंग में मायथोलॉजी: कुम्भ मेले: वेदों में नहीं, किंतु पुराणों और महाभारत में है उल्लेख
देवदत्त पट्टनायक5 घंटे पहले कॉपी लिंक 1954 के प्रयागराज कुम्भ (तब इलाहाबाद कुम्भ) की एक तस्वीर। फोटो साभार : जेम्स बुरके, स्रोत : लाइफ आर्काइव्स। लोग नदियों के संगम अर्थात प्रयाग पर हजारों वर्षों से एकत्रित होते आए हैं। उत्तराखंड में पांच ऐसे प्रयाग हैं जिनसे गंगा नदी उत्पन्न होती है। प्रयागराज को यह नाम […]


















