कोपेनहेगन से लेकर लिस्बन तक डेस्टिनेशन गेटकीपिंग का ट्रेंड:  भीड़ से परेशान स्थानीय लोग खास स्पॉट छिपा रहे; संस्कृति साझा करने से भी परहेज
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कोपेनहेगन से लेकर लिस्बन तक डेस्टिनेशन गेटकीपिंग का ट्रेंड: भीड़ से परेशान स्थानीय लोग खास स्पॉट छिपा रहे; संस्कृति साझा करने से भी परहेज

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कुछ साल पहले मैक्सिको सिटी में बसने पर मॉडल लूज सेलाया को यह शहर जन्नत से कम नहीं लगा। वे हर हफ्ते दोस्तों के साथ डिश व जूस का आनंद लेने के बाद अपने पसंदीदा पुराने और सस्ते कपड़ों के बाजार (पाका) में जाती थीं। लूज कहती हैं,‘वहां कपड़ों के ढेर, दुकानदारों की आवाजें और बाजार की जीवंत ऊर्जा इसे खास बनाती थीं। बाहर से आने वालों को भी वे बाजार जरूर ले जाती थीं। पर बढ़ते पर्यटन ने तस्वीर बदल दी। बीते तीन साल से यहां 1.4 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंच रहे हैं। इससे कीमतें बढ़ गईं और कई दुकानदार स्थानीय पीसो के बजाय डॉलर में दाम लिखने लगे। परेशान होकर लूज व उनके दोस्तों ने शहर में नया बाजार ढूंढ निकाला। यहां डिश व कपड़ों के दाम (स्थानीय मुद्रा में) पहले वाले बाजार से कहीं बेहतर हैं। पर इस बार लूज ने तय किया है- वे बाहरी व्यक्ति या पर्यटक को नए ठिकाने का पता नहीं बताएंगी। इसे गेटकीपिंग कहा जा रहा है। यह कहानी सिर्फ मैक्सिको सिटी तक सीमित नहीं है। कोपेनहेगन, मिलान व अन्य पर्यटन शहरों में भी बढ़ती पर्यटक भीड़ स्थानीय जीवन को प्रभावित कर रही है। नतीजतन, कई मूल निवासी पसंदीदा ठिकानों व संस्कृति को साझा करने से पहले सावधानी बरतने लगे हैं। कोपेनहेगन में स्थानीय लोग अब पसंदीदा पार्कों, शांत समुद्र तटों और अनूठे कैफे के बारे में बताने से बचने लगे हैं। वे मानते हैं कि सोशल मीडिया की एक पोस्ट या ट्रैवल ब्लॉग सुकूनभरी जगह को भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थल में बदल सकता है। इसलिए स्थानीय निवासी खास जगहों की पहचान गुप्त रखकर उनकी शांति और मौलिकता को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जापान के क्योटो में ‘गीशा’ संस्कृति वाले ऐतिहासिक जिलों में पर्यटकों की बदतमीजी से परेशान होकर स्थानीय लोगों ने रास्ते बंद कर दिए हैं। वहीं टोक्यो के युवा सोशल मीडिया पर पसंदीदा दुकानों या विंटेज कपड़ों के छिपे हुए बाजारों की लोकेशन शेयर नहीं करते। लिस्बन में पर्यटकों के कारण घरों व खाने-पीने के दाम बेहद बढ़ गए हैं। स्थानीय लोग अब पारंपरिक ‘फाडो’ संगीत वाले छोटे रेस्त्रां को बाहरी दुनिया से छिपाकर रख रहे हैं ताकि उनका वजूद बचा रहे। जीवनशैली और मौलिकता बचाए रखने की कोशिश – एक्सपर्ट ट्रैवल राइटर सेबेस्टियन मोडेक कहते हैं,‘यह बदलाव सिर्फ पर्यटकों से चिढ़ का नतीजा नहीं है, बल्कि यह अपने वजूद और संस्कृति को बचाने की जंग है। सोशल मीडिया के दौर में ‘मास टूरिज्म’ मिनटों में किसी शांत मोहल्ले की रंगत बदल देता है। जब एक रील वायरल होती है, तो वहां का किराया बढ़ता है, स्थानीय दुकानें बंद होती हैं और उनकी जगह महंगे कैफे ले लेते हैं। स्थानीय लोग अब मान चुके हैं कि हर खूबसूरत जगह को इंटरनेट की दुनिया के साथ साझा करना जरूरी नहीं है। इसलिए ‘गेटकीपिंग’(जानकारी छिपाना) स्थानीय लोगों द्वारा अपनी जीवनशैली और मौलिकता को बचाए रखने का एक रक्षात्मक उपकरण बन गया है।’



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