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पिछले हफ्ते मैंने अपने इस कॉलम में आपको उस तिकड़ी (आन्द्रे टिमनिस, विराफ सरकारी और साबास जोसेफ) के बारे में बताया था, जिन्हें म्यूजिक इंडस्ट्री के सबसे बड़े लीजेंड्स में से एक माइकल जैक्सन के हिंदुस्तान में पहले कॉन्सर्ट को आयोजित करने का श्रेय जाता है। यह कॉन्सर्ट साल 1996 में हुआ था। आन्द्रे के हवाले से आपने यह भी पढ़ा था कि उन्होंने किस तरह जैक्सन को भारत में शो आयोजित करने के लिए मनाया। इस इवेंट से जुड़े और भी कई किस्से आज के इस कॉलम में शेयर कर रहा हूं।
जैसा कि आन्द्रे ने मुझे बताया था, वे लॉस एंजिलिस में माइकल जैक्सन से शो कन्फर्म करवाकर भारत लौटे तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यही थी कि इतने बड़े इवेंट पर खर्च कौन करेगा? तब फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े फाइनेंसर भरत भाई शाह इसके लिए राजी हो गए। बकौल आन्द्रे, इसके बाद हम राज ठाकरे से मिले। वे हमें बाल ठाकरे के पास लेकर गए। उन्होंने कहा, ‘आइडिया बहुत अच्छा है, पर माइकल जैक्सन आएगा, यह पक्का है?’ हमने कहा, ‘जी, बिल्कुल।’ बस, फिर शो की तैयारियां शुरू हो गईं।
माइकल जैक्सन अमेरिका से रवाना हुए तो उनके शो से जुड़े तमाम तरह के इंन्स्ट्रूमेंट्स भी साथ आए। उनके शो का सामान उस वक्त दुनिया के सबसे बड़े कार्गो एयरक्राफ्ट ‘एंटोनोव’ में आ रहा था। लेकिन मुंबई एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यह कहकर एंटोनोव की लैंडिंग करवाने से मना कर दिया कि आज तक इतना बड़ा कार्गो एयरक्राफ्ट यहां लैंड नहीं हुआ है। इससे हम तनाव में आ गए। हम भागे-भागे राज ठाकरे के पास गए, उन्होंने एविएशन मिनिस्ट्री से संपर्क किया और आखिरकार एयरक्राफ्ट लैंडिंग की परमिशन मिली।
आन्द्रे ने बताया कि माइकल जैक्सन ने अमेरिका से रवाना होने से पहले एक शर्त रखी थी कि जब वे इंडिया लैंड करे और उनके एयरक्राफ्ट का दरवाजा खुले तो उन्हें सबसे पहले आन्द्रे और विराफ की शक्ल दिखनी चाहिए। आखिरकार, उन्हें आन्द्रे और विराफ ने रिसीव किया। जब वे एयरपोर्ट से बाहर आए तो वहां राज ठाकरे और सोनाली बेंद्रे मौजूद थे। सोनाली ने महाराष्ट्र की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर रखी थी। वहां महाराष्ट्र का पारंपरिक ढोल भी बज रहा था। ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ जैक्सन का भव्य स्वागत किया गया। सोनाली ने उनकी आरती उतारी। आन्द्रे बताते हैं, जब हम एयरपोर्ट से माइकल जैक्सन को लेकर होटल की ओर निकले तो सिर्फ उनकी एक झलक पाने के लिए पूरे रास्ते में लोगों की भीड़ थी। लोग फुटपाथों पर खड़े थे, दीवारों पर और पेड़ों पर चढ़े हुए थे। बीच रास्ते में एक स्लम आई। उसे देख उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवाई और नीचे उतर गए। वे सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे उस स्लम के भीतर चले गए और वहां जाकर एक झुग्गी में बैठ गए। फिर उन्होंने अपने स्टाफ से कहा कि वे जो ढेर सारे खिलौने, चॉकलेट और उपहार लाए हैं, उन्हें वहां बच्चों और लोगों में बांट दिया जाए। उन्होंने वहां कुछ देर बड़े आराम से बैठकर सबसे बातें कीं और उसके बाद ही होटल के लिए रवाना हुए।
बकौल आन्द्रे, जब हम होटल पहुंचे तो देखा कि अनुपम खेर फेंसिंग कूदकर अंदर आने की कोशिश कर रहे थे। सिक्योरिटी ने उन्हें पकड़ लिया। तब मैंने कहा कि अरे भाई, ये हमारे यहां के बहुत बड़े स्टार हैं, इन्हें आने दो। प्रभु देवा करीब 48 घंटे होटल की लॉबी में बैठे रहे कि बस एक बार माइकल जैक्सन से मुलाकात हो जाए। ऐसा क्रेज था माइकल जैक्सन का। इसी बात पर मुझे अहमद फ़राज़ का एक शेर याद आता है…
सुना है लोग उसे आंख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
मैं खुद गवाह हूं कि जब अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उनका शो शुरू हुआ और माइकल जैक्सन की एंट्री हुई तो यकीन मानिए, सबकी धड़कनें रुक गई थीं। वह पल मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता। उनके इन्स्ट्रूमेंट्स इतने बड़े थे कि वे अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के दरवाजों से भीतर नहीं जा पाए। तब विशेष अनुमति लेकर दीवार तोड़ी गई और फिर इन्स्ट्रूमेंट्स अंदर पहुंचाए गए।
माइकल जैक्सन को जानने वाले जानते हैं कि वे शो करने वाली जगह पर अमूमन रुकते नहीं थे। शो करते थे और फिर अपने चार्टर्ड प्लेन से वापस अपने घर पहुंच जाया करते थे। लेकिन वे हिन्दुस्तान में तीन दिन रहे। वे खासकर बाला साहेब से काफी इम्प्रेस हुए। जाने के पहले उन्होंने बाला साहेब के साथ नाश्ता भी किया और नाश्ते में इडली खाई। माइकल ने बाला साहेब के गले में बांह डालकर एक तस्वीर खिंचवाई। इसे बाला साहेब ने बाद में अपने बैठकखाने की पूरे दीवार पर लगवाया था। माइकल जैक्सन की और भी बहुत सारी यादें हैं। ये कभी और साझा करुंगा। आज उन्हें याद करके उनके गाए किसी भी पसंदीदा गाने को सुनिए, अपना ख्याल रखिए, खुश रहिए।
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