एआई दिमाग तो नहीं छीन रहा; हर जवाब न स्वीकारें:  फैसला लेना भी हम एआई पर छोड़ रहे, वैज्ञानिक इसे ‘मानसिक घुसपैठ’ मान रहे हैं
अअनुबंधित

एआई दिमाग तो नहीं छीन रहा; हर जवाब न स्वीकारें: फैसला लेना भी हम एआई पर छोड़ रहे, वैज्ञानिक इसे ‘मानसिक घुसपैठ’ मान रहे हैं

Spread the love




शादी में दी जाने वाली स्पीच हो, इनकम टैक्स रिटर्न भरना हो या किसी पुराने सदमे से उबरना… आज हर काम में एआई हमारा हाथ बंटा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तकनीक को हम अपना ‘साथी’ समझ रहे हैं, वह धीरे-धीरे हमारे दिमाग पर कब्जा कर रही है? टाइम मैगजीन के लेख में थरिन पिल्लै ने चेतावनी दी है कि एआई अब सिर्फ एक टूल नहीं रहा, बल्कि हमारे मानसिक जीवन का एक सक्रिय हिस्सा बन गया है। डायरी और कैलकुलेटर से कितना अलग है एआई? पहले हम याददाश्त के लिए ‘डायरी’, हिसाब-किताब के लिए ‘कैलकुलेटर’ और रास्तों के लिए ‘नक्शों’ का इस्तेमाल करते थे। ये औजार हमारे काम को आसान बनाते थे, लेकिन सोचना हमें ही पड़ता था। एआई इससे एक कदम आगे निकल गया है। अब हम जानकारी का विश्लेषण करना, नए विचार पैदा करना और फैसले लेना भी एआई पर छोड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ‘कॉग्निटिव क्रीप’ (मानसिक घुसपैठ) है यानी एआई उन क्षेत्रों में घुस रहा है जिन्हें हम ‘सिर्फ इंसानी’ समझते थे। ‘कॉग्निटिव सरेंडर’ यानी जब हम सोचना बंद कर देते हैं यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के शोधकर्ता स्टीव शॉ ने ये शब्द दिया है। यह तब होता है जब हम बिना सोचे-समझे एआई के जवाब स्वीकार कर लेते हैं। एक स्टडी में पाया गया कि आधे से ज्यादा वकील एआई की गलतियों से परेशान हैं, फिर भी वे फैसले लेने के लिए सबसे ज्यादा इसी पर निर्भर हैं। हम एआई द्वारा किए गए काम पर तो बहुत भरोसा करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे अपनी खुद की सोचने की क्षमता पर हमारा भरोसा कम होने लगता है। एक्सपर्ट बनने का रास्ता बंद हो रहा है? ‘एक्सपर्ट’ बनने के लिए मेहनत और संघर्ष की जरूरत होती है। एमआईटी की प्रोफेसर जाना बुसिंका कहती हैं, हम मान लेते हैं कि इंसान यह बता पाएंगे कि एआई सही है या गलत लेकिन अगर हम बुनियादी मेहनत ही नहीं करेंगे, तो एक्सपर्ट बनेंगे कैसे? एआई के दौर में खुद को स्मार्ट रखने के ये 3 तरीके याद रखें एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई का इस्तेमाल करना गलत नहीं है, बशर्ते हम इसके लिए बिल्कुल सही तरीका अपनाएं-
1. पहले खुद सोचें – किसी काम के लिए एआई से पूछने से पहले खुद दिमाग चलाएं। जो लोग शुरुआत में ही एआई का इस्तेमाल करते हैं, उनकी सोच सीमित हो जाती है।
2. इसे ‘साथी’ बनाएं, ‘नौकर’ नहीं – एआई से म्युचुअल एम्प्लीफिकेशन (आपसी बढ़त) का रिश्ता रखें। बेहतर इनपुट दें, तो बेहतर आउटपुट मिलेगा। 3. पहचान बचाएं – उन कामों को कभी एआई पर न छोड़ें जो आपकी पहचान से जुड़े हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *