![]()
आदि शंकराचार्य महान भारतीय दार्शनिक और योगी थे। भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की 1. यह संसार आसक्ति और द्वेष से भरे एक स्वप्न की तरह है, जो जागरण होने तक वास्तविक प्रतीत होता है।
2. वास्तविकता का अनुभव केवल समझ की दृष्टि से किया जा सकता है, विद्वत्ता से नहीं।
3. किसी को भी मित्र या शत्रु, भाई या संबंधी के रूप में न देखें; मित्र या शत्रु के विचारों में अपनी मानसिक ऊर्जा व्यर्थ न करें। सबके प्रति समान भाव और मधुर व्यवहार रखें।
4. बंधन से मुक्त होने के लिए बुद्धिमान व्यक्ति को आत्मा और अहंकार के बीच विवेक करना चाहिए।
5. केवल इसके द्वारा आप आनंद से पूर्ण हो जाएंगे, जब स्वयं को शुद्ध अस्तित्व, चेतना के रूप में पहचानेंगे।
6. हर वस्तु अपनी प्रकृति की ओर ही बढ़ती है। आप सदैव आनंद चाहते हैं, क्योंकि वही आपकी वास्तविक प्रकृति है। आपकी प्रकृति कभी बोझ नहीं होती।
Source link








