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पवन के. वर्मा का कॉलम: अपने किए की जिम्मेदारी स्वीकारना भी धर्म का रूप है

Hindi News Opinion Pawan K Verma Column | Understanding Dharma, Ethics & Moral Responsibility 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक धर्म क्या है? ‘धर्म’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘धृ’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ है- धारण करना और संभालकर रखना। आम तौर पर धर्म का अनुवाद कर्तव्य, सदाचार, […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: धर्म-अध्यात्म भी बचा रहे और तकनीक का उपयोग भी करें

Hindi News Opinion Column By Pt. Vijay Shankar Mehta – Preserve Spirituality While Embracing Technology 7 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता मेरी विदेश यात्राओं के दौरान मुझसे सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न यह रहा कि एआई को आप आध्यात्मिक दृष्टि से कैसे देखते हैं? एआई के उपयोग में हमें विवेक का प्रयोग […]

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संस्कृत के पदों के अनुवाद में संदर्भ अत्यंत महत्वपूर्ण: भारतीय दर्शन के अरुपांतरणीय संस्कृत पद विषयक दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न – New Delhi News

भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् और भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न हो गई। भारतीय दर्शन के अरुपांतरणीय संस्कृत पद विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के विद्वानों ने संस्कृत के दार्शनिक ग्रंथों के अनुवाद की चुनौतियों और ऐसे शब्दों पर विचार-विमर्श किया, […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  युवाओं के ‘शंकर-दूत’ बनने का समय आ गया है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: युवाओं के ‘शंकर-दूत’ बनने का समय आ गया है

Hindi News Opinion Youth Become Shankar Doot: Pandit Vijay Shankar Mehtas Column On Advaita Vedanta 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता जिस धर्म की छाया में हम सुरक्षित, समन्वित और सानंद हैं, यह आदिगुरु शंकराचार्य जी द्वारा दी गई स्थिति है। पिछले दिनों नर्मदा तट पर एक अनूठा अनुष्ठान हुआ। विभिन्न क्षेत्रों के […]

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स:  वास्तविकता का अनुभव समझ से किया जा सकता है – आदि शंकराचार्य
अअनुबंधित

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स: वास्तविकता का अनुभव समझ से किया जा सकता है – आदि शंकराचार्य

आदि शंकराचार्य महान भारतीय दार्शनिक और योगी थे। भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की 1. यह संसार आसक्ति और द्वेष से भरे एक स्वप्न की तरह है, जो जागरण होने तक वास्तविक प्रतीत होता है। 2. वास्तविकता का अनुभव केवल समझ की दृष्टि से किया जा सकता है, विद्वत्ता से नहीं। 3. किसी को […]

स्वामी विवेकानंद की सीख:  सेवा का मतलब केवल पैसे देना नहीं है, हम समय, ज्ञान या सहारा देकर भी सेवा कर सकते हैं
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

स्वामी विवेकानंद की सीख: सेवा का मतलब केवल पैसे देना नहीं है, हम समय, ज्ञान या सहारा देकर भी सेवा कर सकते हैं

6 घंटे पहले कॉपी लिंक स्वामी विवेकानंद के पास एक दिन एक युवक पहुंचा। उसके चेहरे पर बेचैनी साफ दिख रही थी। उसने कहा, “मैं कई साधु-संतों से मिला, मंदिरों में गया, आश्रमों में रहा, लेकिन मुझे वह नहीं मिला, जिसकी मुझे तलाश है।” स्वामी जी ने शांत स्वर में पूछा, “तुम आखिर चाहते क्या […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपने रास्ते ठीक से चलें, किसी का रास्ता क्यों रोकें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने रास्ते ठीक से चलें, किसी का रास्ता क्यों रोकें

5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता राजा और साधु में विवाद के कई प्रसंग शास्त्रों में आए हैं। जो सांसारिक दृष्टि से सफल हो और निजी दृष्टि से संतुष्ट- वो साधु है। हमारे यहां तीन लोगों को महाराज कहा जाता है। साधु, राजा और रसोई बनाने वाले को और ये तीनों ही जीवन […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  दु:ख की समझ का नाम ही दु:ख का मिटना है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: दु:ख की समझ का नाम ही दु:ख का मिटना है

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Understanding Sorrow Is Ending Sorrow 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता दुनिया में हमारा इरादा कई चीजें कमाने का होता है। धन, पद, प्रतिष्ठा, सुख, परिवार- ये सब कमाई के हिस्से हैं। लेकिन दो और चीजें भी हमारी कमाई बन जाती हैं- सुख और दु:ख। सुख […]

प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम:  धरती को बचाने की नहीं, जीने के तरीके बदलने की जरूरत है
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प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम: धरती को बचाने की नहीं, जीने के तरीके बदलने की जरूरत है

Hindi News Opinion Prof Chetan Singh Solanki Column: Change Living Ways To Save Ourselves, Not Earth 10 घंटे पहले कॉपी लिंक प्रो. चेतन सिंह सोलंकी आईआईटी बॉम्बे में प्रोफेसर पिछले कुछ वर्षों से मैं देशभर में यात्रा करते हुए हजारों लोगों से मिला हूं। पर्यावरण विषय पर लगभग हर शहर, कॉलेज और कार्यक्रम में मुझे […]

Jansatta Sarokar: India’s way of thinking changed with Modi, now the country is deciding its own identity – जनसत्ता सरोकार: मोदी के साथ बदला भारत का सोचने का तरीका, अब देश खुद तय कर रहा है अपनी पहचान
टेक्नोलॉजी

Jansatta Sarokar: India’s way of thinking changed with Modi, now the country is deciding its own identity – जनसत्ता सरोकार: मोदी के साथ बदला भारत का सोचने का तरीका, अब देश खुद तय कर रहा है अपनी पहचान

Jansatta Sarokar: India’s way of thinking changed with Modi, now the country is deciding its own identity – जनसत्ता सरोकार: मोदी के साथ बदला भारत का सोचने का तरीका, अब देश खुद तय कर रहा है अपनी पहचान | Jansatta Source link