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शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित निवेश चाहने वाले सीनियर सिटीजन के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बार फिर सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है। साल 2026 में रिटायरमेंट के बाद अपनी पूंजी की सुरक्षा और रेगुलर इनकम को प्राथमिकता देने वाले बुजुर्गों के लिए एफडी पर शानदार रिटर्न मिल रहा है। सीनियर सिटीजन को आमतौर पर आम ग्राहकों के मुकाबले 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) ज्यादा ब्याज मिलता है। ब्याज की ये दरें आरबीआई की पॉलिसी, निवेश की अवधि और बैंकों की नकदी स्थिति पर निर्भर करती हैं। सरकारी और प्राइवेट बैंकों में ब्याज दरें सरकारी बैंकों में FD पर ब्याज दरें प्राइवेट बैंकों में FD पर ब्याज दरें स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे हैं सबसे ज्यादा रिटर्न रिटर्न के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) सबसे आगे हैं, जहां 8.5% तक ब्याज मिल रहा है। ईएसएएफ (ESAF) स्मॉल फाइनेंस बैंक 501 दिनों की एफडी पर 8.50% ब्याज दे रहा है। इसके अलावा सूर्योदय, शिवालिक, इक्विटास और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी अलग-अलग अवधि के लिए 8.00% से 8.30% तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। हालांकि, बड़े कमर्शियल बैंकों के मुकाबले इनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा माना जाता है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD पर ब्याज दरें बुजुर्गों को एफडी से होते हैं ये 4 फायदे रिटायरमेंट के बाद बुजुर्ग एफडी को कई वजहों से चुनते हैं: निवेश की स्ट्रैटेजी और टैक्स के नियम एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सारा पैसा एक साथ एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे छोटी, मध्यम और लंबी अवधि में बांटकर निवेश करना चाहिए। बेहतर मुनाफे के लिए एफडी के साथ सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) या पीपीएफ (PPF) को भी शामिल किया जा सकता है। टैक्स की बात करें तो एफडी से होने वाली कमाई निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है। बैंक इस पर टीडीएस (TDS) काटते हैं, लेकिन अगर सालाना आय टैक्स की सीमा से कम है, तो बुजुर्ग फॉर्म 15H जमा कर टीडीएस बचा सकते हैं। क्या होता है फॉर्म 15H और लैडरिंग? फॉर्म 15H: यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे 60 साल से अधिक उम्र के लोग बैंक में जमा करते हैं, ताकि उनकी ब्याज आय पर टीडीएस न काटा जाए। यह तभी भरा जा सकता है जब आपकी कुल अनुमानित आय पर टैक्स जीरो हो। FD लैडरिंग: अपनी कुल राशि को एक बड़ी एफडी बनाने के बजाय अलग-अलग समय (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) के लिए छोटी-छोटी एफडी में बांटना लैडरिंग कहलाता है। इससे ब्याज दरों में बदलाव का फायदा मिलता है और इमरजेंसी में पैसों की कमी नहीं होती।
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