ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी की रिसर्च का निष्कर्ष:  चित्रों में भरें रंग, 15 मिनट की कलरिंग से दूर होगा तनाव
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ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी की रिसर्च का निष्कर्ष: चित्रों में भरें रंग, 15 मिनट की कलरिंग से दूर होगा तनाव

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आज के डिजिटल दौर में लोग लगातार स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। ऐसे में बड़ों के लिए कलरिंग बुक्स एनालॉग विकल्प के रूप में उभर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ 15 मिनट की कलरिंग न केवल तनाव कम करती हैं, बल्कि दिमाग को भी संतुलित करती हैं। फिलाडेल्फिया स्थित डेक्सेल यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव आर्ट्स थेरेपी विभाग की चेयर पर्सन गिरिजा कैमेल बताती हैं कि कलरिंग करते समय व्यक्ति इतना डूब जाता है कि उसे समय, आसपास को चीजें या थकान का एहसास नहीं रहता। कैमेल के मुताबिक, कलरिंग में असफलता को गुंजाइश नहीं होती। क्योंकि चित्र का ढांचा पहले से तय होता है और व्यक्ति को सिर्फ रंग भरना होता है। इससे एक सकारात्मक ‘ऊर्जा’ का अहसास होता है। इसके अलावा, कागज पर रंग भरने की प्रक्रिया दिमाग को शांत करती है। रिसर्च- कलरिंग से बेहतर होता है मूड एक अध्ययन में कैंसर मरीजों की देखभाल करने वालों को 45 मिनट तक कलरिंग कराई गई। नतीजा यह रहा कि वे पहले से ज्यादा शांत और रिलैक्स महसूस करने लगे। विशेषज्ञों के अनुसार, मूड में भी सकारात्मक बदलाव दिखा। कैसे शुरू हुआ यह ट्रेंडः स्कॉटलैंड की इलस्ट्रेटर जोहाना बैसफोर्ड ने बड़ों के लिए भी कलरिंग बुक का आइडिया दिया था, जिसे शुरू में पब्लिशर्स ने ठुकरा दिया। लेकिन यह किताब बेस्टसेलर बनी और गतीं से ट्रेड बदल गया। सरल चित्रों से शुरू करें, ज्यादा रंगों की जगह 4-5 पसंदीदा रंग चुनना बेहतर विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में बहुत सारे रंगों के बजाय 4-5 पसंदीदा रंग चुनना बेहतर रहता है, ताकि ध्यान भटके नहीं। पूरे पेज की जगह छोटे और सरल चित्रों से शुरुआत करें और कलरिंग करते समय फोन से दूरी बनाकर पूरी तरह उसी पर फोकस करें। आप इसे रोजमर्रा की जिंदगी के छोटे-छोटे खाली पलों में शामिल कर सकते हैं।



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