परिवार को अब ज्यादा समय दे रहे पुरुष:  अमेरिका में इसके लिए 30% कम वेतन वाली नौकरी भी मंजूर, भारत में भी फैमिली फर्स्ट
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परिवार को अब ज्यादा समय दे रहे पुरुष: अमेरिका में इसके लिए 30% कम वेतन वाली नौकरी भी मंजूर, भारत में भी फैमिली फर्स्ट

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अमेरिका में ग्रेजुएट कामकाजी पिता अब करियर में आगे बढ़ने या ज्यादा कमाने के बजाय अपने परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं। थिंक टैंक अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर बॉयज एंड मेन (एआईबीएम) के ताजा अध्ययन के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद से पिता घर के कामों व बच्चों की देखभाल में ज्यादा समय बिता रहे हैं। इसके लिए वे अपने दफ्तर के समय में कटौती करने से भी नहीं हिचक रहे, भले ही उन्हें कम वेतन वाली नौकरी करनी पड़े। टेक सेक्टर में काम करने वाले माइक एंडरसन ऐसे ही एक पिता हैं जिन्होंने परिवार को समय देने के लिए सालाना करीब 1.3 लाख डॉलर (1.2 करोड़ रुपए) की अतिरिक्त आय वाली नौकरी छोड़ दी और उन्हें इसका जरा भी अफसोस नहीं है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की उनकी मौजूदा रिमोट नौकरी उन्हें अपनी पत्नी, माता-पिता और अब बड़े हो चुके बच्चों के साथ अधिक समय बिताने का मौका देती है। ओरलैंडो के 34 वर्षीय माइकल टोरिबियो ने असिस्टेंट प्रिंसिपल बनने का मौका छोड़कर 30% कम सैलरी वाली वर्क फ्रॉम होम नौकरी चुनी। इससे वे महंगा चाइल्ड केयर खर्च बचाने के साथ बच्चे को समय दे पा रहे हैं। अर्थशास्त्री और इस अध्ययन की लेखिका एरियल बाइंडर ने कहा, ‘करियर में आगे बढ़ने या किसी प्रोजेक्ट पर अतिरिक्त घंटे बिताने के बजाय, पुरुष अब वह समय परिवार को दे रहे हैं।’ अमेरिका: काम के घंटे घटाकर बच्चों की देखभाल एआईबीएम के टाइम यूज सर्वे के अनुसार डिग्री धारक और छोटे बच्चों वाले पिताओं ने नौकरी पर बिताए जाने वाले समय में औसतन प्रति सप्ताह छह घंटे की कटौती की और घर के कामों और बच्चों की देखभाल में बिताए जाने वाले समय में प्रति सप्ताह चार घंटे से ज्यादा वृद्धि की। अध्ययन में 2019-2024 के डेटा की तुलना की गई। भारत: घर पर समय देने वाले पुरुष 21 से बढ़कर 46% हुए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 2019 और 2024 की समय उपयोग रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि घरेलू कामकाज के लिए समय देने वाले पुरुषों की संख्या 26.1% से बढ़कर 45.8% हो गई। ये करीब 75% वृद्धि है। परिवार की देखभाल में हाथ बंटाने वाले पुरुषों की संख्या 16.2% से बढ़कर 21.4% हो गई है। औसत समय 74 मिनट रोजाना है।



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