रसरंग में ट्रैवल:  बूंदी: एक शांत शहर में स्थापत्य का खजाना
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रसरंग में ट्रैवल: बूंदी: एक शांत शहर में स्थापत्य का खजाना

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पर्णश्री देवी57 मिनट पहले

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बूंदी स्थित तारागढ़ किला। - Dainik Bhaskar

बूंदी स्थित तारागढ़ किला।

राजस्थान की धरती पर बसा छोटा-सा शहर बूंदी आपको अपने पुराने वैभव, स्थापत्य सौंदर्य और धीमी जीवन-रफ्तार के बीच ले जाता है। बूंदी भले ही आकार में छोटा है, लेकिन इसके आकर्षण इतने हैं कि हर यात्री यहां घंटों तक डूबा रह सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां के दर्शनीय स्थल एक-दूसरे से बहुत अधिक दूर नहीं हैं, यानी आप पैदल या थोड़ी दूरी तय करके ही अधिकांश जगहें देख सकते हैं।

तारागढ़ किला : यह किला अपने विशाल आकार और ऐतिहासिक गौरव के साथ बूंदी शहर के ऊपर आसमान में मानो तैरता हुआ प्रतीत होता है। इसका निर्माण 1298 ईस्वी में राव देव हाड़ा ने आरंभ किया था और 1354 ईस्वी में राव राजा बार सिंह हाड़ा ने इसे पूरा करवाया। यह किला बूंदी राज्य की शौर्यगाथा का साक्षी है। तारागढ़ किला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक लोकप्रिय सनसेट पाइंट भी है, जहां से पूरा शहर स्वर्णिम रोशनी में नहाता हुआ दिखाई देता है।

बूंदी पैलेस और चित्रशाला : तारागढ़ किले से सटी हुई पहाड़ी पर स्थित बूंदी पैलेस (जिसे गढ़ पैलेस भी कहा जाता है) कभी बूंदी के राजाओं का निवास स्थल हुआ करता था। इसी महल के भीतर स्थित चित्रशाला कला का एक जीवंत खजाना है। दीवारों और छतों पर बने रंगीन फ्रेस्को और भित्ति चित्र बूंदी शैली की लघु चित्रकला की झलक पेश करते हैं। चित्रशाला को राव उम्मेद सिंह ने बनवाया था, इसलिए इसे उम्मेद महल भी कहा जाता है। यहां की चित्रकला में श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंग, रासलीला और राजदरबार के दृश्य अत्यंत सजीव रूप में दिखाई देते हैं। जहां तारागढ़ किला समय के साथ कुछ जर्जर हुआ है, वहीं चित्रशाला अब भी बेहद अच्छी तरह संरक्षित है।

सुख महल : शहर के उत्तर में स्थित जैत सागर झील के किनारे बना सुख महल अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अत्यंत रमणीय स्थल है। इसका निर्माण राव राजा विष्णु सिंह ने लगभग 1776 ईस्वी के आसपास करवाया था। झील के शांत जल पर महल की परछाई दिनभर रंग बदलती है। अगस्त-सितंबर के महीनों में जब झील में कमल के फूल पूरी तरह खिल जाते हैं, तो दृश्य अवर्णनीय हो उठता है। इसी महल में अंग्रेज लेखक रुडयार्ड किपलिंग कुछ समय ठहरे थे। कहा जाता है कि उन्हें अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘किम’ की प्रेरणा यहीं मिली थी। सुख महल आज भी उस सृजनात्मक शांति की याद दिलाता है, जहां प्रकृति और साहित्य एकाकार हो जाते हैं।

रानीजी की बावड़ी : बूंदी का एक और स्थापत्य चमत्कार है रानीजी की बावड़ी, जिसे रानी नाथवतीजी ने बनवाया था। यह विशाल सीढ़ीदार कुआं न केवल जल-संरक्षण की प्राचीन भारतीय तकनीक का प्रमाण है, बल्कि सामाजिक जीवन का भी केंद्र हुआ करता था। पुराने समय में ऐसी बावड़ियों में लोग पानी भरने, विश्राम करने और सामाजिक मेलजोल के लिए इकट्ठे होते थे। इसकी नक्काशीदार दीवारें और स्थापत्य कला इसे बूंदी के सबसे प्रभावशाली स्मारकों में शामिल करती हैं।

84 खंभों की छतरी : जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह स्मारक 84 अलंकृत खंभों पर टिका हुआ है। इसे राव अनिरुद्ध सिंह ने अपने भाई देवा की याद में बनवाया था। हर स्तंभ की नक्काशी थोड़ी अलग है, फिर भी सभी मिलकर एक सुंदर समरसता रचते हैं। यह छतरी न केवल स्थापत्य कौशल की मिसाल है, बल्कि बूंदी की शाही विरासत का भी प्रतीक है। सूरज की किरणें जब इन खंभों से छनकर गिरती हैं तो पूरा परिसर मानो जीवंत हो उठता है।

नवल सागर झील : शहर के बीचोंबीच स्थित नवल सागर झील एक कृत्रिम झील है, जो अपने शांत पानी में पूरे बूंदी शहर का प्रतिबिंब समेटे रहती है। इसकी सतह पर तैरते बादल और झील के मध्य स्थित छोटे-से वरुणदेव मंदिर का दृश्य अत्यंत मनमोहक है। सर्दियों के महीनों में यहां अनेक प्रवासी पक्षी आते हैं, जिससे यह झील पक्षी-दर्शन प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान बन जाती है।

बूंदी जाने का यह आदर्श मौसम कैसे पहुंचें बूंदी?: यहां तक पहुंचने का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर है, जो यहां से लगभग 214 किलोमीटर दूर है। दिल्ली से मेवाड़ एक्सप्रेस ट्रेन सीधे बूंदी तक जाती है। दिल्ली से कोटा तक कई ट्रेनें उपलब्ध हैं। कोटा-बूंदी की दूरी मात्र 38 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग से तय किया जा सकता है। कब जाएं?: बूंदी घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का है, जब मौसम सुहावना रहता है। अप्रैल से जून तक यहां भीषण गर्मी होती है, इसलिए यह समय टालना बेहतर है। कहां ठहरें?: बूंदी एक छोटा शहर है, इसलिए यहां ठहरने के लिए विकल्प सीमित लेकिन आकर्षक हैं, जैसे हेरिटेज होटल, पुरानी हवेलियां और गेस्ट हाउस। लगभग हर श्रेणी में आपको आरामदायक स्टे मिल जाएगा।



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