आज गणेश चतुर्थी व्रत:  सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है चतुर्थी व्रत, शाम को चंद्र उदय के बाद करें गणेश पूजा और चंद्र को चढ़ाएं अर्घ्य
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आज गणेश चतुर्थी व्रत: सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है चतुर्थी व्रत, शाम को चंद्र उदय के बाद करें गणेश पूजा और चंद्र को चढ़ाएं अर्घ्य

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16 घंटे पहले

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आज (8 दिसंबर) पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर भगवान गणेश की कृपा पाने और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से व्रत किया जाता है। इस चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का महत्व होता है, इसलिए इस व्रत में शाम को चंद्र उदय के बाद भी गणेश पूजा की जाती है और चंद्र को अर्घ्य चढ़ाया जाता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूरा होता है। यह व्रत करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रहे सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से घर में सुख-शांति, समृद्धि और संतान संबंधी सुख मिलता है। आज शाम करीब 8 बजे चंद्रोदय हो जाएगा, व्रत करने वाले भक्तों को चंद्र को अर्घ्य जरूर देना चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं गणेश पूजा

  • सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
  • गणेश जी को रोली, कुमकुम, और चावल चढ़ाएं, चंदन से तिलक लगाएं। भगवान को सुगंधित फूल या फूलों की माला अर्पित करें।
  • गणेश जी की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व होता है, इसलिए 21 दूर्वा अर्पित करें।
  • भगवान गणेश को उनका प्रिय भोग जैसे मोदक, लड्डू, या गुड़ अर्पित करें। पौष मास की चतुर्थी में तिल के लड्डुओं का भोग लगाना शुभ माना जाता है। घी या तेल का दीपक और धूप जलाएं।
  • पूजा में ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करें। इसके बाद चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करें।
  • कथा समाप्त होने के बाद भगवान गणेश की आरती करें। इसके बाद दिनभर व्रत करें, अन्न का त्याग करें। भूखे रहना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं। दूध और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं।
  • ये व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रदर्शन तक चलता है। व्रती दिन भर गणपति का स्मरण कर सकते हैं। शाम को चंद्रोदय से पहले एक बार फिर स्नान करें और गणेश पूजा करें।
  • चंद्रमा उदय होने पर सबसे पहले चंद्रमा के दर्शन करें। चंद्रमा को जल, दूध, फूल, चंदन, और चावल मिलाकर अर्घ्य अर्पित करें। चंद्र मंत्र ऊँ सों सोमाय नम: का जप करें। चंद्रमा की पूजा के बाद गणेश जी की आरती करें।
  • चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद भोग में चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करें। इस प्रकार चतुर्थी व्रत पूरा होता है। इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। दिन में जरूरतमंद लोगों को खाना, अन्न, दाल-चावल, आटा, कपड़े, जूते-चप्पल, ऊनी वस्त्र, धन आदि चीजों का दान कर सकते हैं।

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