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आज (गुरुवार, 30 अप्रैल) भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह का प्रकट उत्सव है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर यह पर्व मनाते हैं। आंध्रप्रदेश के सिंहाचलम के श्री वराह लक्ष्मी नरसिंह स्वामी देवस्थानम में स्थापित भगवान नसिंह पूरे वर्ष चंदन से ढंके रहते हैं। साल में सिर्फ एक बार उनके वास्तविक स्वरूप के दर्शन अक्षय तृतीया पर होते हैं। मान्यता है कि भगवान के उग्र स्वरूप को शांत रखने के लिए उन्हें चंदन का लेप लगाया जाता है। वैशाख शुक्ल चतुर्दशी पर भगवान विष्णु ने अपने उग्र रूप में नरसिंह अवतार लेकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी और हिरण्यकश्यपु का वध किया था। पौराणिक कथा है कि इस स्थान पर भगवान नरसिंह प्रकट थे। भक्त प्रहलाद की प्रार्थना के बाद भगवान वराह और नरसिंह अवतार में यहां विराजमान हो गए। श्री वराह लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर में भगवान त्रिभंगी मुद्रा में विराजित हैं, यानी मानव धड़ पर शेर का सिर है। मंदिर में 16 खंभों वाला नाट्यमंडप और 96 खंभों वाला कल्याणमंडप है। नरसिंह प्रकट उत्सव से जुड़ी परंपराएं
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