आपका पैसा- क्या चेक बाउंस होने पर खराब होता सिबिल:  बाउंस होने की 8 वजहें, क्रेडिट स्कोर बढ़ाना है तो ध्यान रखें ये 10 बातें
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आपका पैसा- क्या चेक बाउंस होने पर खराब होता सिबिल: बाउंस होने की 8 वजहें, क्रेडिट स्कोर बढ़ाना है तो ध्यान रखें ये 10 बातें

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17 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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कई बार हम किसी काम के लिए चेक लगाते हैं और ये बाउंस हो जाता है। आमतौर पर यह बैंक खाते में बैलेंस कम होने पर या किसी तकनीकी गलती से होता है। ऐसे में सबसे पहला सवाल यह है कि क्या इससे आपके सिबिल स्कोर पर कोई असर पड़ता है?

हम सब जानते हैं कि सिबिल स्कोर किसी भी लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए कितना जरूरी है। अगर यह खराब हो जाए तो न सिर्फ नया लोन लेना मुश्किल हो जाता है, बल्कि बैंक ऊंची ब्याज दर भी वसूल सकते हैं।

ऐसे में आज हम आपका पैसा कॉलम में जानेंगे कि-

  • चेक बाउंस का आपके क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
  • आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
  • सिबिल स्कोर कैसे बढ़ा सकते हैं?

सवाल- सिबिल स्कोर क्या होता है और क्यों जरूरी है?

जवाब- सिबिल स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो 300 से 900 के बीच होता है। यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और लोन चुकाने की क्षमता को दर्शाता है। यह स्कोर जितना ज्यादा होगा, आप लोन लेने में उतने ही सक्षम माने जाएंगे और कर्ज पर ब्याज दर भी कम रहेगी।

इसे ऐसे समझिए कि अगर आपका सिबिल स्कोर 750 या इससे ऊपर है, तो बैंक आपके लोन आवेदन को जल्दी और आसानी से मंजूर कर सकते हैं। वहीं, अगर स्कोर 650 या इससे कम है, तो लोन लेने में मुश्किलें आ सकती हैं और बैंक ऊंची ब्याज दर वसूल सकते हैं। इसलिए सिबिल स्कोर अच्छा रखना बेहद जरूरी है।

सवाल- चेक बाउंस क्या होता है?

जवाब- चेक बाउंस या डिशऑनर्ड चेक तब होता है, जब आपके बैंक द्वारा जारी किया गया चेक क्लियर नहीं होता और भुगतान नहीं हो पाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर पर्याप्त बैलेंस न होने पर ऐसा होता है। अक्सर लोग चेक बाउंस होने पर परेशान हो जाते हैं और सोचते हैं कि इससे तुरंत उनका सिबिल स्कोर गिर जाएगा।

सवाल- किन कारणों से चेक बाउंस होता है?

जवाब- चेक बाउंस होने के कई कारण हो सकते हैं। इसकी कुछ सामान्य वजह ग्राफिक में देखिए-

इसलिए चेक से भुगतान करते समय इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बार-बार चेक बाउंस होने से आपका वित्तीय रिकॉर्ड प्रभावित हो सकता है।

सवाल- क्या चेक बाउंस सीधे सिबिल स्कोर को प्रभावित करता है?

जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता है। बैंक या वित्तीय संस्थान चेक बाउंस की जानकारी सीधे सिबिल या किसी अन्य क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को नहीं भेजते हैं। इसलिए केवल चेक बाउंस होने से आपका क्रेडिट स्कोर सीधे खराब नहीं होता है।

सवाल- चेक बाउंस होने से सिबिल स्कोर पर कब असर पड़ता है?

जवाब- अगर चेक बाउंस होने की वजह से आपकी EMI या क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर नहीं हो पाता है तो बैंक इसे क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को रिपोर्ट कर सकता है। मिस्ड EMI या लेट क्रेडिट कार्ड पेमेंट आपके सिबिल स्कोर को प्रभावित कर सकता है।

उदाहरण के लिए अगर आपका चेक बाउंस हुआ और उसकी वजह से आप लोन की किस्त समय पर नहीं चुका पाए तो आपका सिबिल स्कोर गिर सकता है। इसके कारण भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में मुश्किल हो सकती है।

सवाल- अगर बार-बार चेक बाउंस हो तो क्या होगा?

जवाब- अगर बार-बार चेक बाउंस हो रही है और इससे आपकी EMI या क्रेडिट कार्ड की पेमेंट लेट होती है तो आपका सिबिल स्कोर तेजी से गिर सकता है।

वहीं अगर केवल कभी-कभार EMI लेट हुई है या एक-दो बार चेक बाउंस हुआ है, तो इसका खास असर नहीं पड़ता है। इसमें आपका स्कोर 700-750 के बीच बना रहता है। ऐसे में लोन मिलना संभव होता है, लेकिन ब्याज दर थोड़ी ज्यादा हो सकती है या बैंक कम राशि के लोन की पेशकश कर सकता है।

सवाल- चेक बाउंस से बचने के क्या उपाय हैं?

जवाब– चेक बाउंस से बचने के लिए कुछ आसान और प्रभावी उपाय हैं।

अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस रखें: चेक जारी करने से पहले देखें कि आपके खाते में पर्याप्त राशि मौजूद होनी चाहिए। हमेशा थोड़ा अतिरिक्त बैलेंस रखें ताकि अचानक कमी होने पर चेक बाउंस न हो।

ओवरराइटिंग और गलती से बचें: चेक पर तारीख, राशि (अंक और शब्द दोनों में) सही लिखें और सिग्नेचर सही तरीके से भरें। कोई संशोधन या गलती होने पर चेक बैंक द्वारा अस्वीकार की जा सकती है।

सिग्नेचर अपडेट करें: समय के साथ सिग्नेचर बदल जाता है। यदि आपका सिग्नेचर बैंक के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, तो चेक बाउंस हो सकता है। इसे अपडेट करना जरूरी है।

पोस्ट-डेटेड और एक्सपायर्ड चेक से बचें: पोस्ट-डेटेड चेक की सही तारीख का ध्यान रखें और सुनिश्चित करें कि चेक वैधता समाप्त न हो।

ओवरड्राफ्ट लिमिट का ध्यान रखें: यदि आपका खाता ओवरड्राफ्ट पर है, तो चेक जारी करते समय लिमिट का ध्यान रखें।

चेक को सुरक्षित रखें: चेक को गीला न होने दें। ध्यान रखें कि यह फटा न हो या लिखावट अस्पष्ट न हो।

सवाल- चेक बाउंस के बाद क्या करना चाहिए?

जवाब- अगर आपका चेक बाउंस हो गया है, तो तुरंत बैंक और लाभार्थी से संपर्क करें। भुगतान तुरंत करें और अगर जरूरत हो तो बैंक से सही जानकारी लेकर दोबारा चेक जारी करें। समय पर समाधान करने से EMI या क्रेडिट कार्ड पेमेंट मिस होने की संभावना कम होती है और सिबिल स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता है।

सवाल- चेक बाउंस से खराब हुआ सिबिल स्कोर कैसे सुधारें?

जवाब- अगर आपका सिबिल स्कोर किसी भी कारण से गिर गया है, तो इसे सुधारने के लिए ये कदम उठाएं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

कुल-मिलाकर, चेक बाउंस का सीधा असर सिबिल स्कोर पर नहीं पड़ता है, लेकिन अगर इसके कारण आपकी EMI या क्रेडिट कार्ड के भुगतान समय पर नहीं हुए, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से आपका सिबिल स्कोर खराब कर सकता है। इसलिए, चेक जारी करते समय हमेशा सावधानी बरतें, खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें और सभी विवरण सही भरें।

सिबिल स्कोर केवल संख्या नहीं

ये हमेशा याद रखें कि आपका सिबिल स्कोर केवल संख्या नहीं है, यह आपके वित्तीय विश्वास और भविष्य में लोन लेने की क्षमता का प्रमाण है। छोटी-छोटी सावधानियों से आप अपने स्कोर को मजबूत रख सकते हैं और भविष्य में बिना परेशानी के लोन या क्रेडिट कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।

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