आपका पैसा- क्या रिटायरमेंट के बाद भी लगता है टैक्स:  टैक्स कैसे बचाएं, हर महीने ₹50,000 की पेंशन कैसे पाएं, बता रहे हैं एक्सपर्ट
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आपका पैसा- क्या रिटायरमेंट के बाद भी लगता है टैक्स: टैक्स कैसे बचाएं, हर महीने ₹50,000 की पेंशन कैसे पाएं, बता रहे हैं एक्सपर्ट

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48 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ नौकरी से छुट्टी नहीं, बल्कि पैसों की दूसरी पारी की शुरुआत भी है। अक्सर लोग मान लेते हैं कि रिटायर होने के बाद टैक्स की चिंता खत्म हो जाती है, लेकिन सच यह है कि पेंशन, FD के ब्याज, किराये या निवेश से होने वाली आय पर टैक्स देना पड़ सकता है।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि रिटायरमेंट के बाद किन इनकम सोर्स पर टैक्स लगता है, किन पर छूट मिलती है और टैक्स बचाने के लिए कौन-सी स्ट्रेटजी अपनानी चाहिए। सही टैक्स प्लानिंग न केवल सेविंग्स बढ़ा सकती है, बल्कि रिटायरमेंट कॉर्पस को लंबे समय तक सुरक्षित भी रख सकती है।

इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 की नियमित इनकम पाने के लिए कितना फंड चाहिए।

इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में जानेंगे कि रिटायरमेंट के बाद टैक्स कैसे बचाएं। साथ ही समझेंगे कि-

  • टैक्स बचाने के लिए क्या स्ट्रेटजी होनी चाहिए?
  • 50,000 की नियमित इनकम के लिए निवेश के बेहतर विकल्प क्या हैं?

एक्सपर्ट- जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद

सवाल- क्या रिटायरमेंट के बाद भी टैक्स भरना पड़ता है?

जवाब- हां, भरना पड़ सकता है। लेकिन यह आपकी इनकम के सोर्स और अमाउंट पर निर्भर करता है। रिटायर होने से टैक्स की जिम्मेदारी अपने-आप समाप्त नहीं होती है। अगर इनकम टैक्सेबल है तो टैक्स देना होगा। रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर इनकम के ये सोर्स होते हैं-

  • पेंशन
  • बैंक FD या सेविंग अकाउंट का ब्याज
  • किराये से इनकम
  • म्यूचुअल फंड या शेयर्स से इनकम
  • अन्य निवेशों से इनकम

सवाल- रिटायरमेंट के बाद किन सोर्स से हो रही इनकम पर टैक्स लगता है?

जवाब- रिटायरमेंट के बाद भी इन सोर्सेस से आ रही इनकम पर टैक्स लग सकता है। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या सीनियर सिटिजन्स के लिए टैक्स के अलग नियम हैं?

जवाब- हां, भारत में सीनियर सिटिजन्स को टैक्स से जुड़ी कुछ खास सुविधाएं मिलती हैं। इनमें एडवांस टैक्स जमा करने से छूट और बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज पर विशेष कटौती शामिल हैं। हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ उम्र, इनकम सोर्स और चुनी गई टैक्स रिजीम पर निर्भर करता है। इसे ऐसे समझिए-

  • निवासी वरिष्ठ नागरिक, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स जमा करने से छूट मिलती है।
  • पुरानी टैक्स रिजीम में वरिष्ठ नागरिक बैंक, पोस्ट ऑफिस और सहकारी बैंक की जमा पर मिलने वाले ब्याज पर सेक्शन 80TTB के तहत सालाना ₹50,000 तक की कटौती का लाभ ले सकते हैं।

सवाल- नई और पुरानी टैक्स स्लैब में पेंशनर्स के लिए बेहतर विकल्प क्या हैं?

जवाब- पेंशनर्स के लिए नई या पुरानी टैक्स रिजीम में बेहतर विकल्प चुनने के लिए सभी चीजों की तुलना करनी चाहिए।

नई टैक्स रिजीम

  • टैक्स रेट अपेक्षाकृत कम है।
  • ज्यादातर छूट का लाभ नहीं मिलता।
  • उन पेंशनर्स के लिए फायदेमंद है, जिनके निवेश कम हैं।

पुरानी टैक्स रिजीम

  • टैक्स दर अपेक्षाकृत ज्यादा है।
  • कई छूट मिलती हैं, जैसे-
  • सेक्शन 80C (निवेश)
  • सेक्शन 80D (हेल्थ इंश्योरेंस)
  • सेक्शन 80TTB (ब्याज की इनकम पर छूट)
  • अगर बहुत ज्यादा निवेश नहीं कर रखा है और कोई बिजनेस नहीं है तो नई टैक्स रिजीम चुनना ही बेहतर है।

सवाल- EPF, PPF, ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और NPS की रकम पर टैक्स के क्या नियम हैं?

जवाब- रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम पर टैक्स के नियम अलग-अलग होते हैं। इसे विस्तार से समझिए-

  • EPF- 5 साल या उससे ज्यादा की रेगुलर सर्विस के बाद निकासी आमतौर पर टैक्स-फ्री होती है।
  • PPF- मैच्योरिटी अमाउंट, ब्याज और निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।
  • ग्रेच्युटी- सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट पर मिली ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है।
  • लीव इनकैशमेंट- सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट पर प्राप्त लीव इनकैशमेंट पूरी तरह टैक्स-फ्री है।
  • NPS- रिटायरमेंट पर मिलने वाली एकमुश्त निकासी का बड़ा हिस्सा नए नियमों के तहत टैक्स-फ्री है। जबकि एन्युटी (पेंशन) से मिलने वाली मासिक आय सामान्य आय की तरह टैक्सेबल होती है।

सवाल- क्या फैमिली पेंशन, FD के ब्याज पर भी टैक्स लगता है?

जवाब- हां, फैमिली पेंशन और फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज दोनों पर टैक्स लग सकता है।

फैमिली पेंशन पर टैक्स

  • फैमिली पेंशन को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ माना जाता है।
  • यह पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होती।
  • हालांकि, करदाता को एक विशेष छूट मिलती है-
  • फैमिली पेंशन का 1/3 हिस्सा या ₹25,000 प्रति वर्ष (जो भी कम हो)।
  • इस कटौती के बाद बचा अमाउंट टैक्सेबल इननकम होता है।

FD के ब्याज पर टैक्स

  • FD पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है।
  • यह कुल इनकम में जुड़ता है और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।
  • अगर ब्याज निर्धारित सीमा से ज्यादा हो तो बैंक ब्याज पर TDS भी काट सकता है।

सवाल- रिटायरमेंट के बाद टैक्स में बचत के लिए क्या स्ट्रेटेजी होनी चाहिए?

जवाब- रिटायरमेंट के बाद टैक्स बचाने की स्ट्रेटेजी का मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि इनकम नियमित बनी रहे, टैक्स कम लगे और पूंजी सुरक्षित रहे।

सवाल- किन गलतियों से रिटायरमेंट के बाद टैक्स का बोझ बढ़ सकता है?

जवाब- रिटायरमेंट के बाद कई लोग यह मान लेते हैं कि अब टैक्स की चिंता नहीं है। लेकिन कुछ कॉमन गलतियां टैक्स का बोझ बढ़ा सकती हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 पेंशन है तो कितना टैक्स लगेगा?

जवाब- अगर रिटायरमेंट के बाद 50,000 प्रति माह पेंशन मिलती है तो वार्षिक इनकम ₹6,00,000 होगी। नई टैक्स रिजीम के मुताबिक, ₹12 लाख तक की इनकम पर उपलब्ध टैक्स रिबेट के कारण कोई टैक्स नहीं देना होगा।

सवाल- हर महीने 50,000 की इनकम चाहिए तो कितना कॉर्पस बनाना पड़ेगा?

जवाब- यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके निवेश पर कितना रिटर्न मिलता है और आप मूलधन को सुरक्षित रखना चाहते हैं या धीरे-धीरे खर्च भी करना चाहते हैं।

  • रिटायरमेंट प्लानिंग में एक पॉपुलर रूल है- 4% रूल।
  • वार्षिक जरूरत = ₹6,00,000
  • जरूरी कॉर्पस = ₹6,00,000 ÷ 4% = ₹1.5 करोड़

इसका मतलब है कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने 50,000 की नियमित इनकम चाहिए तो उस समय ₹1.5 करोड़ रुपए का कॉर्पस होना जरूरी है।

सवाल- रिटायरमेंट के बाद पैसा कितने साल चलना चाहिए, इसकी प्लानिंग कैसे करें?

जवाब- इसकी योजना बनाते समय लाइफ एक्सपेक्टेंसी, महंगाई, हेल्थ खर्च और निवेश रिटर्न को भी ध्यान में रखना चाहिए।

25-30 साल की योजना बनाएं- इसके लिए 60 की उम्र में रिटायर होने पर कम-से-कम 85-90 वर्ष तक का खर्च सोचें।

मासिक खर्च का सही हिसाब लगाएं

  • जरूरी खर्च
  • जीवनशैली खर्च
  • आपातकालीन खर्च

महंगाई को नजरअंदाज न करें- 6% महंगाई पर खर्च लगभग 12 साल में दोगुना हो सकता है।

हेल्थ खर्च के लिए अलग फंड रखें- पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इमरजेंसी फंड जरूरी है।

सुरक्षित निकासी दर अपनाएं- आमतौर पर 3%-4% वार्षिक निकासी को संतुलित माना जाता है।

इनकम के कई सोर्स बनाएं- पेंशन, किराया, ब्याज, सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP), सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम्स (SCSS) का संतुलन रखें।

हर 2-3 साल में रिव्यू करें- खर्च, हेल्थ और निवेश के अनुसार प्लानिंग अपडेट करते रहें।

सवाल- रिटायरमेंट कॉर्पस से पैसे निकालने का सही तरीका क्या है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

पूरी रकम एक साथ न निकालें

नियमित और योजनाबद्ध निकासी करें।

बकेट स्ट्रेटेजी अपनाएं

  • 1-3 साल का खर्च: FD, सेविंग्स, लिक्विड फंड
  • 3-7 साल का खर्च: SCSS, बॉन्ड, डेट फंड
  • 7+ साल का पैसा: इक्विटी म्यूचुअल फंड

SWP का उपयोग करें

म्यूचुअल फंड से हर महीने निश्चित राशि निकालकर नियमित आय बनाएं।

सुरक्षित निकासी दर रखें

आमतौर पर 3%-4% वार्षिक निकासी संतुलित मानी जाती है।

महंगाई को ध्यान में रखें

समय के साथ निकासी राशि बढ़ाने की योजना बनाएं।

टैक्स-एफिशिएंट निकासी करें

पेंशन, ब्याज और कैपिटल गेन के टैक्स नियम समझकर निकासी करें।

आपातकालीन फंड अलग रखें

कम-से-कम 1-2 साल के खर्च जितना अमाउंट उपलब्ध रखें।

सवाल- रिटायरमेंट के बाद नियमित इनकम के लिए SWP (सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान) कितना उपयोगी है?

जवाब- जवाब पॉइंटर्स से समझिए-

  • SWP (सिस्टमैटिक विथड्रॉल प्लान) रिटायरमेंट में नियमित मासिक आय पाने का एक प्रभावी तरीका है।
  • इसमें म्यूचुअल फंड से तय अमाउंट समय-समय पर निकाली जाती है, जबकि बाकी पैसा निवेशित रहता है।
  • सही एसेट एलोकेशन और विदड्रॉल रेट के साथ SWP इनकम, लिक्विडिटी और लॉन्ग टर्म ग्रोथ का संतुलन बना रहता है।

सवाल- अगर रिटायरमेंट में अभी 20 साल बाकी हैं तो यह गोल कैसे अचीव करें?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

  • 20 साल का समय लॉन्ग टर्म की संपत्ति बनाने के लिए पर्याप्त है।
  • नियमित SIP, EPF, NPS और इक्विटी म्यूचुअल फंड में अनुशासित निवेश करें।
  • इनकम बढ़ने पर निवेश बढ़ाएं, लक्ष्य की समय-समय पर समीक्षा करें।
  • महंगाई को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने पर फोकस रखें।

सवाल- क्या केवल EPF या NPS की मदद से ₹50,000 मासिक पेंशन मिल सकती है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • यह नौकरी की अवधि, वेतन, योगदान और निवेश रिटर्न पर निर्भर करता है।
  • लंबे समय तक नियमित योगदान और पर्याप्त कॉर्पस बनने पर EPF या NPS से अच्छी पेंशन मिल सकती है।
  • हालांकि, अधिकांश लोगों के लिए अतिरिक्त निवेश भी जरूरी होता है, ताकि रिटायरमेंट इनकम पर्याप्त बनी रहे।

सवाल- हर महीने 50,000 की नियमित इनकम के लिए निवेश के बेहतर विकल्प क्या हैं?

जवाब- केवल एक निवेश पर निर्भर रहने की बजाय अलग-अलग विकल्पों में पैसा लगाना बेहतर है। SCSS, FD, बॉन्ड, पेंशन प्लान, म्यूचुअल फंड SWP और किराये की इनकम जैसे सोर्स मिलकर स्टेबल कैश फ्लो दे सकते हैं। ………………………………

ग्राफिक्स- विपुल शर्मा

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