8 घंटे पहले
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मंगलवार, 14 जुलाई को आषाढ़ मास की अमावस्या है। इसका नाम हलहारिणी अमावस्या है। यह पर्व किसानों के लिए बहुत खास है, इस दिन हल और अन्य कृषि यंत्र पूजा करने की परंपरा है। इस अमावस्या पर नदी स्नान और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इन शुभ कामों से भक्तों को अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका शुभ असर जीवन भर बना रहता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, आषाढ़ी अमावस्या पर व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। दिन की शुरुआत सूर्य पूजा के साथ करनी चाहिए। सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। घर के मंदिर में इष्टदेव की विधिवत पूजा करें। दोपहर में करीब 12 बजे पितरों के लिए पूजा-पाठ, ध्यान, पिंडदान और तर्पण आदि शुभ करना चाहिए।
इष्टदेव की विधिवत पूजा करें और व्रत का संकल्प लें
सुबह सूर्य पूजा के बाद घर के मंदिर में भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी दुर्गा और श्रीकृष्ण की श्रद्धापूर्वक पूजा करनी चाहिए। अगर आप अमावस्या का व्रत रख रहे हैं, तो पूजा के समय व्रत करने का संकल्प भी लें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार पूरे दिन उपवास करें। यदि निराहार रहना संभव न हो, तो एक समय फलाहार कर सकते हैं। पूजा में इष्टदेव के मंत्रों का जप करें। जैसे श्री गणेशाय नम:, ऊँ नम: शिवाय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, दुं दुर्गायै नम:, कृं कृष्णाय नम:, रां रामाय नम:, ऊँ रामदूताय नम: आदि। इसके साथ ही शिवपुराण, विष्णुपुराण, श्रीमद्भागवत कथा जैसे ग्रंथों के कुछ अध्यायों का पाठ अपने समय के अनुसार कर सकते हैं। किसी संत के प्रवचन भी सुन सकते हैं।
ऐसे कर सकते हैं पितरों के लिए धूप-ध्यान
दोपहर में करीब 12 बजे के समय को कुतप काल कहते हैं। यह समय पितरों के लिए धूप-ध्यान, तर्पण आदि काम करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। दोपहर में गाय के गोबर से बना कंडा जलाएं और जब कंडे से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब पितरों का मन ही मन स्मरण करें और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए गुड़-घी अंगारों पर चढ़ाएं। आप चाहें, तो खीर-पुड़ी भी चढ़ा सकते हैं। हथेली में जल लेकर पितरों का ध्यान ध्यान करते हुए अंगूठे की ओर से अर्पित करें। कुछ देर मौन ध्यान करें, मंत्र ॐ पितृभ्यो नमः का पर करें। पितरों को धूप देने के बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। घर के बाहर गाय, कुत्ते और कौएं को भी खाना खिलाएं। किसी गौशाला में धन का दान करें।
पवित्र स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या पर गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ काम से भक्त के जाने-अनजाने में हुए पापों का प्रभाव कम हो जाता है। यदि किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर ही पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के समय सभी तीर्थों का ध्यान करें। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
मंगलवार और अमावस्या का विशेष योग
यदि अमावस्या मंगलवार को पड़े, तो उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। मंगलवार और अमावस्या के योग में हनुमान जी की विशेष पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं, हनुमान चालीसा का पाठ करें। समय और श्रद्धा के अनुसार राम नाम का जप या सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं।
ज्योतिष में मंगल ग्रह को मंगलवार का कारक माना जाता है। मंगल को नौ ग्रहों का सेनापति कहा जाता है। यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति अच्छी नहीं है, उन्हें कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती है। इस ग्रह के दोषों को शांत करने के लिए हर मंगलवार मंगल की विशेष पूजा करनी चाहिए। मंगल की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है, इसलिए शिवलिंग पर लाल गुलाल, लाल फूल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतुरा, आंकड़े के फूल से श्रृंगार करें। ऊँ भों भौमाय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं।
दान करें और तुलसी के पास दीपक जलाएं
अमावस्या के दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी पुण्यदायी माना जाता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार अनाज, भोजन, धन या जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुओं का दान करें। शाम को सूर्यास्त के बाद घर के आंगन में तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें। मान्यता है कि अमावस्या पर किए गए इन शुभ कामों की वजह से घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।









