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कुछ साल पहले कॉर्नवाल (ब्रिटेन) में समुद्र के किनारे एक चट्टान पर खड़े पूर्व ब्रिटिश सैनिक डेव फिलिप्स (67) जिंदगी खत्म करने की सोच रहे थे। अपनों को खोने का गम और सेना में रहने के दौरान मिले गहरे पोस्ट ट्रॉमेटिक डिसऑर्डर (गंभीर मानसिक सदमा) ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था। आज फिलिप्स एक विशाल जहाज पर समंदर की लहरों को चीरते हुए पूरे ब्रिटेन का चक्कर लगा रहे हैं। वे कहते हैं, ‘समंदर मुझे जिंदगी के हर तनाव से दूर ले जाता है। इसके पास शांत करने की एक जादुई ताकत है, जो आपको अहसास कराती है कि आप जिंदा हैं।’ फिलिप्स अकेले नहीं हैं। दुनिया भर में अब मानसिक बीमारियों, अवसाद और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को ठीक करने के लिए ‘ब्लू-स्पेस थेरेपी’ (समुद्र और पानी के जरिए इलाज) का सहारा लिया जा रहा है। विक्टोरियन युग में डॉक्टर मरीजों को ‘सी क्योर’ (समुद्र से इलाज) की सलाह देते थे, लेकिन 2014 में आई मरीन बायोलॉजिस्ट वालेस जे. निकोल्स की किताब ‘ब्लू माइंड’ ने वैज्ञानिक रूप से साबित किया कि पानी के करीब रहने से दिमाग में तनाव बढ़ाने वाला ‘कॉर्टिसोल’ हार्मोन कम होता है और खुशियां बढ़ती हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में ‘वेव्स ऑफ रिकवरी’ संस्था चलाने वाली सोफी पाइन बताती हैं कि 2022 में इस तरह के सिर्फ 50 संगठन थे, जिनकी संख्या अब दुनिया भर में 100 के पार हो चुकी है, जो 700 से ज्यादा केस ब्लू स्पेस थेरेपी से ठीक कर चुकी हैं। वे सर्फिंग के जरिए लोगों का मानसिक इलाज करती हैं। सोफी के मुताबिक, ‘समंदर इलाज में एक ‘को-हीलर’ (सह-चिकित्सक) की भूमिका निभाता है। पानी में उतरते ही भेदभाव खत्म हो जाता है, सब एक जैसे वेटसूट में होते हैं, जिससे मरीजों का झिझकना बंद हो जाता है। ब्रिटेन की मशहूर जियोग्राफर कैथरीन केली, जो सरकार को ब्लू-स्पेस नीतियों पर सलाह देती हैं, बताती हैं कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी स्क्रीन पर बहुत अधिक केंद्रित हो चुकी है, जिससे दिमाग थक जाता है, लेकिन जैसे ही हम पानी के पास जाते हैं तो हमारे कंधे ढीले, चेहरा शांत और सांसें धीमी हो जाती हैं। हम एक ‘स्टेट ऑफ ड्रिफ्ट’ (विचारहीन शांत स्थिति) में चले जाते हैं। केवल समुद्र ही नहीं, बल्कि नदियां और झीलें भी दिमाग के लिए दवा का काम करती हैं। पानी में वजन न होने का एहसास नर्वस और ब्रेन को संतुलित करता है हवा और लहरों के अलावा अब पानी के अंदर भी थेरेपी दी जा रही है। पूर्व अमेरिकी सैनिक और मनोचिकित्सक डॉ. जेम्स जंग कैलिफोर्निया के समुद्र में ‘फ्री-डाइविंग’ सेंटर चलाते हैं। वे बताते हैं कि पानी के अंदर वजनहीनता (वेटलेसनेस) का एहसास इंसान के नर्वस सिस्टम और ब्रेन सिस्टम को री-रेगुलेट (दोबारा संतुलित) करने में मदद करता है।
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