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इंस्पायरिंग: अपने ज्ञान को अंतिम मत मानिए, दूसरों से सीखने का दरवाजा हमेशा खुला रखिए – जॉन टर्नस

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एपल सीईओ जॉन टर्नस ने पहला टचस्क्रीन मैकबुक लॉन्च करने के बाद से चर्चा में हैं, उनकी सफल जीवन की सीख, उन्हीं की जुबानी… मैं अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक किस्सा अक्सर याद करता हूं। मैं एक प्रोडक्ट पर काम कर रहा था। उसके हर छोटे-बड़े हिस्से को बारीकी से तैयार किया जा रहा था। यहां तक कि उसकी सतह पर बने स्टील के गोल निशान पर भी हमारी नजर थी। वे निशान सीडी की तरह चमकते थे। हम चाहते थे कि उसकी हर चीज वैसी ही हो, जैसी हमने सोची थी। एक दिन मैं लगातार काम करते हुए थोड़ा पीछे हटा और खुद से पूछा, ‘आखिर मैं कर क्या रहा हूं? क्या यह नॉर्मल है?’ मुझे लगा शायद यह सामान्य नहीं है.. लेकिन फिर मैंने सोचा कि यही सही है। मैं उस प्रोडक्ट पर कई महीने लगा चुका था। जब आप किसी चीज पर इतना वक्त देते हैं, तो उसमें अपना सबसे अच्छा काम भी लगाना चाहिए। हो सकता है यूजर उन बारीकियों को कभी न देखे। हो सकता है उसे पता भी न चले कि हमने कितनी मेहनत की है…लेकिन मुझे तो पता है। मुझे हमेशा मालूम होगा कि मैंने अपना पूरा दम लगाया था या नहीं। इसलिए किसी काम को सिर्फ ठीक-ठाक करके छोड़ना काफी नहीं है। जहां थोड़ा और बेहतर किया जा सकता है, वहां एक कदम आगे बढ़ना चाहिए।
यह आसान नहीं होता। किसी काम में अपना इतना वक्त, मेहनत और खुद को झोंकना मुश्किल है। इससे तनाव भी होता है, कई त्याग भी करने होते हैं।
जब मैं 26 साल का था, तब एपल से जुड़ा। कॉलेज के बाद यह मेरी दूसरी नौकरी थी। उस समय टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही थी। वहां काम करना जितना रोमांचक था, उतना ही चुनौती भरा भी। मेरे साथ काम करने वाले लोग बहुत काबिल और आत्मविश्वास से भरे हुए थे। कई बार उन्हें देखकर लगता था क्या मैं इस जगह के लायक भी हूं? लेकिन मैंने उनसे सीखने का फैसला किया। उनकी खूबियों को समझने की कोशिश की। जब जरूरत पड़ी, उनसे मदद मांगी और सवाल पूछे। आज खुश होता हूं कि मैंने मदद मांगने में कभी झिझक महसूस नहीं की।
मैंने एक बात सीखी है। जब आप ऐसे लोगों के बीच काम करते हैं, जो अपने काम को लेकर बेहद गंभीर हैं और पूरी लगन से जुटे रहते हैं, तो उनका असर आप पर भी पड़ता है। आप अपनी हदों से आगे जाने की कोशिश करते हैं। यह जानना चाहते हैं कि आप कितना बेहतर कर सकते हैं। ऐसे लोग आपको यह समझने में भी मदद करते हैं कि वहां तक पहुंचने का रास्ता क्या है। जब आप किसी नई जगह जाएं या नया काम शुरू करें, तो मानकर चलें कि आप कमरे में बैठे किसी भी व्यक्ति जितने समझदार हैं। लेकिन यह न मानें कि आपको उतना ही पता है, जितना उन्हें पता है। इससे आपको आगे बढ़ने का भरोसा मिलेगा, सवाल पूछने और सीखने की विनम्रता बनी रहेगी। अपने ज्ञान को अंतिम मत मानिए। दूसरों से सीखने का दरवाजा हमेशा खुला रखिए। अपनी काबिलियत पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ें
करियर में कई मौके ऐसे आएंगे, जब आपको कोई नया काम करना होगा। आप पहले से उसके बारे में नहीं जानते होंगे। ऐसे में मन में सवाल उठेंगे, अनिश्चितता महसूस होगी। लेकिन यही वह वक्त है, जब आपको आगे बढ़ना है। अपनी काबिलियत पर भरोसा करना है। (तमाम इंटरव्यू में…)



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