इंस्पायरिंग:  कड़ी मेहनत और समर्पण जरूरी हैं, लेकिन सफर का आनंद गुम न हो –   नीरज चोपड़ा
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इंस्पायरिंग: कड़ी मेहनत और समर्पण जरूरी हैं, लेकिन सफर का आनंद गुम न हो –   नीरज चोपड़ा

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7 घंटे पहले

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  • एथलीट नीरज चोपड़ा ने हाल ही में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 90 मीटर दूर भाला फेंका है। कैसे वो अपने लक्ष्य के पीछे बने रहते हैं, उन्हीं की जुबानी…

मेरा सबसे बड़ा सपना है खूब सारे मैदान… और उन मैदानों में कोच और नियमित प्रतियोगिताएं। अगर हर गांव में एक मैदान न हो सके, तो कम से कम पास में एक हो, जो दूसरे गांवों के साथ साझा किया जाए। वहां कोच हों, जो बच्चों को ढंग से सिखाएं। जब मैं यूरोप जाता हूं, तो हर उम्र के लिए सीजन में 15 या 20 प्रतियोगिताएं होती हैं। ये प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी प्रगति जानने का अवसर देती हैं। वरना आप सिर्फ अभ्यास करते हैं, लेकिन आपको पता नहीं चलता कि आप किस दिशा में जा रहे हैं। मैंने खेल से बहुत सीखा है। खेल अनुशासन सिखाता है, बच्चे खेलेंगे तो अनुशासन आएगा। खेल यह सिखाता है कि अपने काम को गंभीरता से लें। अंततः यह सब एक आदत में तब्दील होता है और आप भले ही अच्छे खिलाड़ी ना बनें, तो बेहतर इंसान तो बन ही जाते हैं। जब कुछ नहीं था तब केवल यह सपना होता था कि एक दिन मैं स्पोर्ट्स की ब्रांडेड दुकान में जाकर जूते और कपड़े खरीद सकूं। वैसे आज भी मैं अपने नए स्पोर्ट्स गियर का बेसब्री से इंतजार करता हूं। मैं दिखावा करने के लिए कुछ नहीं करता। वो करता हूं जो मुझे अच्छा लगता है और जिसे करके अच्छा महसूस करता हूं। मुझे कुछ पता नहीं होता कि आस-पास क्या चल रहा है, लोग मेरे बारे में क्या बोल रहे हैं। जो लोग चाहते हैं मैं 90 मीटर से भी आगे फेंकूं, वे अच्छे इरादे से ऐसा कहते हैं। मुझे पता है वे मुझ पर विश्वास करते हैं और जानते हैं कि मैं कर सकता हूं। लेकिन अगर मैं दबाव ले लूं, तो मैं वो 88-89 मीटर थ्रो भी न कर पाऊं जो आसानी से कर लेता हूं। मैं हर प्रतियोगिता में अपनी पूरी जान लगाता हूं और किसी लक्ष्य के बारे में सोच कर नहीं जाता। मुझे यह सोचकर अच्छा लगता है कि लोग मुझसे अच्छा करने की उम्मीद रखते हैं। यह मेरे लिए प्रेरणा का काम करता है। मुझे खुद पर भरोसा है कि मैं आगे और बेहतर कर सकता हूं। इसी सोच के साथ मेहनत करता हूं। मुझे तब भी दबाव महसूस नहीं होता जब मैं विश्वस्तरीय एथलीट्स के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करता हूं। मैं कभी ये नहीं सोचता कि क्या उनके खिलाफ अच्छा कर पाऊंगा, या मेरी तैयारी ठीक है या नहीं। शुरुआत में थोड़ा नर्वस होता था लेकिन सफलता ने मुझे उबार लिया। अब तो मुझे हमेशा लगता है कि मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है और मेरा फोकस अपने बेस्ट थ्रो पर रहता है, न कि किसी विशेष खिलाड़ी को हराने पर। युवा खिलाड़ी खुद पर और अपने सपनों पर विश्वास रखें। कड़ी मेहनत और समर्पण जरूरी हैं, लेकिन सफर का आनंद लेना भी उतना ही अहम है। उतार-चढ़ाव तो आएंगे, लेकिन हर झटका सीखने का एक मौका होता है। निरंतरता और सही मानसिकता है जरूरी हर प्रदर्शन आपको एक सबक देता है। हर कोई चाहता है कि आप हर बार गोल्ड जीतें। लेकिन यह संभव नहीं। ये सिर्फ मेरे लिए नहीं है, किसी भी एथलीट को ले लें। कभी आप गोल्ड जीतते हैं, कभी सिल्वर या ब्रॉन्ज। आप हर बार 90-मीटर थ्रो की योजना नहीं बना सकते। लेकिन मैं चोट-मुक्त रहा, तो मुझे पता है कि मैं 90 मीटर से आगे की दूरी तक भी पहुंच सकता हूं…यह तो बस एक नंबर है। मेरे लिए जो वास्तव में मायने रखता है वह है बड़े मुकाबलों में निरंतरता बनाए रखना। (तमाम इंटरव्यूज से…)



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