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एक्टर की क्लासिक ‘टॉप गन’ फिर रिलीज हुई है और कमाई के रिकॉर्ड बना रही है। टॉम के जीवन की खास बातें, उन्हीं की जुबानी… जब लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं अपने किरदार कैसे बनाता हूं, तो यही जवाब है कि इसका कोई एक तरीका नहीं है। कई बार पहले फिल्म चुनता हूं, फिर उसके अंदर किरदार बनाता हूं। कई बार पहले से कोई स्किल सीखने लगता हूं, क्योंकि पता होता है कि एक दिन उसे किसी फिल्म में इस्तेमाल करूंगा। मैंने एयरप्लेन उड़ाना सीखा, क्योंकि मुझे महसूस हो रहा था कि यह काम आएगा। बाद में वही स्किल मैंने ‘अमेरिकन मेड’ में इस्तेमाल की। हेलिकॉप्टर उड़ाना सीखा, डांस सीखा, गाना सीखा, कॉमेडी स्टडी की…क्योंकि मैं चाहता हूं कि जब किरदार आए, तो मैं तैयार रहूं। अगर आप तैयार हैं तो राह आसान हो जाती है। ‘मैग्नोलिया’ के दौरान मैंने निर्देशक पॉल थॉमस एंडरसन से कहा किरदार की बातें करने से कुछ नहीं होगा, मैं आपको दिखाता हूं। मैंने अपने स्क्रीनिंग रूम में लाइट लगाई, म्यूजिक सेट किया, स्टेज बनाया और किरदार बनकर पूरा मोनोलॉग सुनाया। यही रोल बाद में फिल्म में गया। शुरुआती दिनों में मैं बहुत भोला था। ‘टैप्स’ की शूटिंग चल रही थी। मुझे कहा गया कि अपना किरदार खुद बनाओ। मैं इतना सीरियस हो गया कि अगली सुबह चुपचाप सैलून गया और सिर मुंडवा लिया। सेट पर पहुंचा, टोपी उतारी, तो निर्देशक हैरॉल्ड बेकर चिल्ला पड़े- ये क्या किया तुमने। मैंने कहा- आपने कहा था किरदार खुद बनाओ… फिर उन्होंने मुझे बैठाकर समझाया कि बेटा, मैं डायरेक्टर हूं…पहले पूछना पड़ता है! उस दिन मुझे समझ आया कि एक्टिंग सिर्फ जुनून नहीं, टीमवर्क भी है। ‘मिशन इम्पॉसिबल’ बनाते समय मैं सही निर्देशक ढूंढ रहा था। पहले सिडनी पॉलक को मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मैं निराश था। स्टीवन स्पीलबर्ग मेरे घर से थोड़ी दूर ही रहते थे। अगली रात मैं उनके घर डिनर पर गया। वहां ब्रायन पाल्मा भी थे। हम फिल्मों की बात कर रहे थे और इस दौरान मुझे महसूस हुआ…यही सही इंसान है। मैं उस रात घर गया, उनकी फिल्में निकालीं और लगभग 24 घंटे तक लगातार उनकी फिल्में देखता रहा। फिर फोन करके स्पीलबर्ग से कहा, ‘मैं ब्रायन डी पाल्मा को यह फिल्म ऑफर करना चाहता हूं।’ मैंने जान लिया था कि उन्हें सस्पेंस बनाना आता है और जब सस्पेंस सही बन जाए तब उसमें एक्शन, ड्रामा और ह्यूमर अपने आप फिट हो जाते हैं। मेरे लिए एक्टिंग सिर्फ कैमरे के सामने खड़े होने का काम नहीं है। मैं हर किरदार को पहले अपने अंदर बनाता हूं…फिर दुनिया उसे स्क्रीन पर देखती है। जब भी आपको काम करने का मौका मिले तो पूरा फायदा उठाएं और हर नई बात सीखें। सबसे पहले सहज और रिलैक्स रहना सीखें
सबसे जरूरी बात अपने काम में सहज और रिलैक्स रहना है। जिंदगी में भी ऐसा होना चाहिए। हर बात को जरूरत से ज्यादा गंभीर न बनाएं। जब आप हल्के मन से काम करते हैं, तब खुलकर जी पाते हैं। फिर आपको ‘एक्टिंग’ करने की जरूरत नहीं पड़ती।
(तमाम इंटरव्यू में)
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