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मशहूर सिंगर बियोन्से ने कोलंबिया में भीषण भूकंप पीड़ितों के लिए 10 लाख डॉलर दान दिए हैं। आम इंसान से रॉक स्टार बनने के सफर का हासिल, उन्हीं की जुबानी… अगर मैं अपनी जिंदगी के पहले दस सालों को याद करूं, तो मुझे लगता है कि वे साल सपने देखने के थे। बचपन में बहुत शर्मीली और अंतर्मुखी थी। ज्यादा बोलती नहीं थी। इसलिए मेरा बहुत वक्त मेरे अपने दिमाग के अंदर गुजरता था। खामोश रहती थी, लेकिन उस खामोशी के अंदर मेरी पूरी दुनिया थी। मैं वहां सपने बुनती थी, कहानियां बनाती थी और अपनी कल्पना को उड़ान देती थी। आज मैं उन शर्मीले और खामोश सालों के लिए शुक्रगुजार हूं। उसी झिझक ने मुझे दूसरों को समझना सिखाया, लोगों के जज्बात महसूस करना सिखाया। लोगों से जुड़ना और उन्हें समझना सिखाया। आज मैं शर्मीली नहीं हूं, लेकिन कभी सोचती हूं कि अगर बचपन के वे साल मैं अपने ही ख्यालों में न बिताती, तो शायद आज इतने बड़े सपने देखने की हिम्मत भी न कर पाती।
मैं सात साल की थी, जब डांस और सिंगिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। मंच पर पहुंचते ही मुझे सिक्योरिटी महसूस होती थी। वहां खुद को आजाद महसूस करती थी। मैं अक्सर वहां अकेली अश्वेत लड़की होती थी। तभी समझ आने लगा कि अगर मुझे जीतना है, तो दूसरों से दोगुनी मेहनत करना होगी। सिर्फ अच्छा गाना या डांस करना काफी नहीं था। नौ साल की उम्र में मैंने एक ओपेरा सिंगर से वॉइस लेसन लेना शुरू कर दिया। दस साल की हुई तो रिकॉर्डिंग स्टूडियो में 50-60 गाने रिकॉर्ड कर चुकी थी। फिर 13 साल की उम्र में मेरी आवाज को पहली चोट लगी। स्टूडियो में लगातार बहुत घंटे गाने की वजह से मेरी आवाज खराब हो गई। उसी वक्त हमारी पहली रिकॉर्ड डील हुई थी। मैं डर गई थी। मुझे लगा कि कहीं मैंने अपनी आवाज हमेशा के लिए तो नहीं खो दी? कहीं मेरा करियर शुरू होने से पहले ही खत्म तो नहीं हो गया?
डॉक्टरों ने मुझे आवाज को आराम देने के लिए कहा और मैं फिर खामोश हो गई। शायद जिंदगी हमें कभी-कभी इसलिए रोकती है कि हम आगे बढ़ने के लिए खुद को और मजबूत कर सकें। मेरी पूरी ऊर्जा इस सपने पर लगी थी कि हम एक दिन रिकॉर्ड डील हासिल करेंगे और म्यूजिशियन बनेंगे। मैंने अपने लिए सीधा नियम बना लिया था कि अगर कोई चीज मुझे मेरे लक्ष्य के करीब नहीं ले जा रही, तो मैं उस पर अपना वक्त क्यों खर्च करूं? मैंने अपने रास्ते के लिए कई कुर्बानियां दीं। 40 साल की यात्रा ने सिखाया है कि सपने कभी नहीं छोड़ने चाहिए। जिंदगी को मकसद के साथ जिएं और किसी एक खांचे में फिट होने की जरूरत न समझें। हर सपने के पीछे खूब मेहनत होनी चाहिए
यकीन के बिना किया गया काम डेड है। सिर्फ भरोसा और सपना काफी नहीं है। उसके पीछे मेहनत होनी चाहिए। मैंने तय किया कि मैं हमेशा सीखती रहूंगी। खुद को बेहतर करने की कोशिश करूंगी।
(तमाम इंटरव्यूज में…)
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