इंस्पायरिंग:  मन मुताबिक न हो तो डरें नहीं, जिंदगी आपको वो देगी जिसकी ज्यादा जरूरत है – प्रियंका चोपड़ा
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इंस्पायरिंग: मन मुताबिक न हो तो डरें नहीं, जिंदगी आपको वो देगी जिसकी ज्यादा जरूरत है – प्रियंका चोपड़ा

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एंजेलिना जोली के साथ नई फिल्म को लेकर प्रियंका चोपड़ा चर्चा में हैं, करियर के हर पड़ाव पर कुछ नया करने और सीखने वाली इस एक्ट्रेस की प्रेरक बातें, उन्हीं की जुबानी… मैं आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि मैंने एक लंबा सफर बहुत तेज रफ्तार से तय किया। काफी छोटी उम्र में उस दुनिया में पहुंच गई थी, जिसके बारे में न मुझे कोई जानकारी थी और न ही मेरे परिवार को। पहले ब्यूटी पेजेंट्स आए, फिर बॉलीवुड, उसके बाद हॉलीवुड। सब कुछ बहुत तेजी से हुआ। कई सालों तक यही लगता रहा कि बस आगे बढ़ते रहना है। अगला काम क्या है, अगला प्रोजेक्ट कौन-सा है, आगे क्या करना है…यही सोच हर समय चलती थी। मैंने हमेशा दौड़ते रहने की आदत डाल ली थी।
लेकिन आज एक अलग तरह की शांति महसूस करती हूं। मुझे नहीं पता यह बदलाव मेरे पति की वजह से आया, किसी दूसरे देश में जाकर रहने से आया, मां बनने से आया या इन चीजों ने मिलकर मुझे बदल दिया। लेकिन अब मैं अपने जीवन में उस मुकाम पर हूं, जहां इस बात से सुकून मिलता है कि मैंने क्या हासिल किया है और आगे क्या हासिल कर पाऊंगी। मैं पहले बहुत महत्वाकांक्षी थी। आज भी परफेक्शन चाहती हूं, लेकिन पहले मेरी महत्वाकांक्षा कहीं ज्यादा तीव्र थी। मुझे हर चीज चाहिए थी और उसे हासिल करने के लिए खुद पर दबाव डालती थी। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए मेहनत करना पड़ती है। दुनिया में बहुत लोग ऐसे हैं जो अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। इसलिए मैं अपने काम और अवसरों को नेमत की तरह देखती हूं।
खुद पर ज्यादा सख्त रही हूं। हर छोटी गलती पर खुद को दोष देती थी। आज अपने अंदर के नए इंसान को जानने की कोशिश कर रही हूं। कई बार खुद हैरान होती हूं कि किसी स्थिति पर मेरी प्रतिक्रिया अब वैसी नहीं होती जैसी छह साल पहले होती थी। धैर्य…शायद मेरे जीवन का सबसे बड़ा सबक रहा है। मैं बिल्कुल सब्र वाली नहीं थी। मां बनने के बाद सीखा कि हर चीज आपके नियंत्रण में नहीं होती। आज अगर कोई काम मेरी इच्छा के अनुसार नहीं होता तो मैं पहले की तरह खुद को दोष नहीं देती। अब स्वीकार करना सीख लिया है कि हर चीज हमारे हाथ में नहीं होती।
इस बदलाव ने मेरी जिंदगी को प्रभावित किया है। लोगों के साथ व्यवहार करने का तरीका बदला है। काम को देखने का नजरिया बदला है। मेरे अंदर आत्मविश्वास आया है। जो लोग हर चीज को नियंत्रित करना चाहते हैं, वे खुद को थका देते हैं। जिंदगी को थोड़ा खुला छोड़ दें। इसका मतलब यह नहीं कि मेहनत करना छोड़ दें। लेकिन अगर चीजें वैसी नहीं होतीं जैसी सोची थीं, तो डरें मत। कई बार जिंदगी आपको वह नहीं देती जो आप चाहते हैं, बल्कि वह देती है जिसकी आपको वास्तव में जरूरत होती है। असली लग्जरी होता है बेफिक्री वाला समय
मेरे लिए असली लग्जरी समय है। ऐसा समय जिसे आप सिर्फ खर्च नहीं करते, बेफिक्र होकर जीते हैं। परिवार के साथ बैठना, अपने पसंदीदा लोगों के साथ वक्त बिताना या बिना किसी जवाबदेही के कुछ देर शांत हो जाना… यह बहुत बड़ी बात है।
(तमाम इंटरव्यू में)



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