इंस्पायरिंग:  लोगों को पद नहीं जिम्मेदारी दीजिए, उनसे साफ कहिए कि अब यह काम आपका है – दीपिंदर गोयल
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इंस्पायरिंग: लोगों को पद नहीं जिम्मेदारी दीजिए, उनसे साफ कहिए कि अब यह काम आपका है – दीपिंदर गोयल

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3 घंटे पहले

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जोमैटो के फाउंडर नए रोमांच की तलाश में ‘इटरनल’ के ग्रुप सीईओ पद को छोड़ रहे हैं। उनके सफर से जुड़ी खास बातें, उन्हीं की जुबानी… आज की पीढ़ी को अपने बारे में काफी कुछ पता होता है। जबकि हम उस जमाने से हैं, जहां हमें अपनी कोई खबर नहीं होती थी। मैं बचपन से ही बोलने में अटकता हूं, तो उस वक्त शायद मुझे यह लगता था कि कुछ हासिल करूंगा तो लोग मेरी बात सुनेंगे। ऐसा हुआ भी। मुझे मेरे आस-पास के लोगों को ही प्रभावित करना था, लेकिन यह सफलता हद से बड़ी हो गई। पर अब देखता हूं, तो लगता है कि सब कुछ एक बहाव में हुआ। जब हमने कंपनी शुरू की तो कभी नहीं सोचा कि कितने पैसे बनाने हैं, बस करना था… उसका जुनून था सो करते गए। हमने अपने निवेशकों को भी कोई प्रिडिक्शन्स नहीं दिए। हम केवल लोगों को बताते थे कि अब तक ये हुआ है और अगले कुछ हफ्ते ऐसा करेंगे… इससे ज्यादा कभी कुछ प्लान नहीं किया। हम कभी अपने लोगों से भी नहीं कहते हैं कि पागलपन की हद तक काम करो। हमारी कंपनी में अभी भी त्रैमासिक, छमाही या सालाना गोल्स नहीं होते हैं। हम लोगों पर भरोसा करते हैं कि वो बेस्ट काम करेंगे… और वे करते भी हैं। बतौर लीडर मैं कभी अपनी टीम को हालात से समझौता करना नहीं सिखाता। मैं सच्चाई सामने रखता हूं कि देखो, हमारे फंड्स खत्म हो रहे हैं, लेकिन फिर भी हम कुछ करके दिखा सकते हैं। तो काम में जुट जाइए। मैं अपनी लीडरशिप को रोमांच वाली कैटेगरी में रखूंगा। पंजाबी माइंटसेट है तो ऐसा होता है कि चलो ये भी करके देखते हैं, वो भी ट्राय करते हैं। अब थोड़ा बदला हूं, वास्तविकता को साथ रखने लगा हूं लेकिन रोमांच अभी भी आकर्षित करता है। मैं जुनून और पागलपन में फर्क करता हूं। मुझे बिजनेस में जुनूनी होना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूं कि लोग जब काम करें तो यह सोच रखें कि वक्त पड़ने पर घर पर कॉल करके बोल सकें कि आज नहीं हो पाएगा… दफ्तर को मेरी जरूरत है, मैं मंडे को छुट्टी ले लूंगा। आज भले ही वीकेंड है पर मुझे काम करना होगा। यह भी ध्यान रहे कि स्टार्टअप्स तो कभी बढ़ ही नहीं सकते अगर आपके परिवार साथ नहीं है। परिवार अगर आपके पीछे खड़ा है, तो कुछ भी हासिल कर सकते हैं। काम और परिवार को मैनेज करना लीडर्स के लिए जरूरी है। कंपनी का कल्चर ऊपर से तय होता है कंपनी का कल्चर ऊपर से सेट होता है। हम हर देश में एक टॉप मैनेजर चुनते हैं। चुना हुआ व्यक्ति सही है, तो वही सोच, वही काम करने का तरीका पूरी टीम में दिखता है। अगर व्यक्ति गलत है तो सब गड़बड़ा जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर हमारी तरफ न देखें हम लोगों को पद नहीं, ऑनरशिप देते हैं। हम साफ कहते हैं कि अब यह काम आपका है, यह कंपनी अब आपकी जिम्मेदारी है। कोई समस्या है तो हमें बताएं। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर हमारी तरफ न देखें। (तमाम इंटरव्यूज में…)



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