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ईरान की करेंसी रियाल मंगलवार को अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। 1 डॉलर खरीदने के लिए 25 लाख रियाल देने पड़ रहे हैं। जंग शुरू होने से पहले 27 फरवरी को 1 डॉलर के बदले करीब 17 लाख रियाल मिल रहे थे। यानी कि सिर्फ 7 महीने में ईरान की करेंसी करीब 50 फीसदी तक गिर गई है। ईरान के केंद्रीय बैंक की आधिकारिक दर करीब 16.5 लाख रियाल प्रति डॉलर है। हालांकि आम लोगों को डॉलर बाजार की दर पर ही मिलता है। डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत गिरने की बड़ी वजह युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध और ईरानी तेल पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी है। इससे ईरान की कमाई और डॉलर की उपलब्धता पर असर पड़ा है, जिससे रियाल लगातार कमजोर हो रहा है। अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान पर असर तेल की कमाई पर सबसे बड़ा असर अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान के तेल निर्यात में तेज गिरावट आई है। सितंबर में ईरानी कच्चे तेल की लोडिंग करीब 2.6 लाख बैरल रोजाना रह गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 17 लाख बैरल रोजाना थी। तेल ईरान की कमाई और विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा जरिया है। डॉलर की कमी बढ़ी तेल की बिक्री घटने से ईरान को बाहर से सामान खरीदने के लिए जरूरी डॉलर और दूसरी विदेशी करेंसी जुटाना मुश्किल हो रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों ने डॉलर में लेनदेन और विदेशी वित्तीय चैनलों तक ईरान की पहुंच भी सीमित कर दी है। महंगाई और रोजमर्रा का खर्च बढ़ा रियाल कमजोर होने से विदेश से आने वाला सामान महंगा हो रहा है। सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक ईरान में महंगाई 80% से ज्यादा बनी हुई है। पेट्रोल और बिजली की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। कई साल से प्रतिबंधों के दबाव में है ईरान ईरान की अर्थव्यवस्था कई साल से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। युद्ध शुरू होने के बाद नए प्रतिबंधों और ईरानी तेल पर अमेरिकी नाकाबंदी ने संकट को और बढ़ा दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार देर रात ईरानी मीडिया से कहा कि इस समय पूरा ध्यान होर्मुज स्ट्रेट पर है। यह जलमार्ग युद्ध के केंद्र में है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज पर बातचीत अब ज्यादा गंभीर हो गई है। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ लड़ाई खत्म करने और होरमुज को फिर खोलने के लिए समझौते की कोशिश कर रहे हैं। ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया अमेरिकी अधिकारियों ने AP को बताया कि बातचीत की कोशिशें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के ईरानी प्रस्ताव ठुकराने के बाद भी जारी हैं। ट्रम्प ने शनिवार को ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है। ईरान ने 7 दिन में होर्मुज खोलने का प्लान दिया था ईरान ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के जरिए कतर के जरिए अमेरिका को 7 दिन का रोडमैप भेजा था। इसमें लड़ाई रोकने और शर्तें पूरी होने पर होर्मुज खोलने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के तहत ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की मांग की गई थी। इसके साथ ईरान ने अमेरिका से अपने बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई करीब 12 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की मांग भी की थी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————
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