एआई आने से डिजिटल प्रचार के तरीके भी बदल रहे:  नेता सोशल मीडिया के बाद अब चैटबॉट पर भी अपनी छवि बेहतर करने में जुटे
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एआई आने से डिजिटल प्रचार के तरीके भी बदल रहे: नेता सोशल मीडिया के बाद अब चैटबॉट पर भी अपनी छवि बेहतर करने में जुटे

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पहले नेताओं की चिंता यह रहती थी कि गूगल पर उनके बारे में क्या दिख रहा है और सोशल मीडिया पर कैसी चर्चा चल रही है। आज बड़ी संख्या में मतदाता उम्मीदवारों के बारे में जानकारी के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी, ग्रोक और क्लाउड जैसे एआई चैटबॉट्स से सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन कई बार ये चैटबॉट किसी उम्मीदवार के बारे में अधूरी, पुरानी या नकारात्मक जानकारी दे देते हैं। ऐसे में अमेरिका में चुनावी रणनीतिकार अब एआई के जवाबों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे उम्मीदवारों की वेबसाइट और अन्य सार्वजनिक स्रोतों की जानकारी अपडेट कर रहे हैं, ताकि एआई उन स्रोतों से बेहतर और अधिक सटीक उत्तर तैयार करे। इस नई रणनीति को आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एईओ) कहा जा रहा है। नई बदलती तकनीक के इस्तेमाल की नई चुनौती नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बेथ सिमोन नोवेक कहती हैं, ‘इस नई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर काफी असमंजस है, क्योंकि यह बहुत तेजी से बदल रही है। कुछ लोग भले ही दावा करें कि वे इसे समझते हैं, लेकिन लार्ज लैंग्वेज मॉडल की बदलती प्रकृति के कारण इस प्रक्रिया को नियंत्रित करना वास्तव में बहुत कठिन है।’ अब आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन यानी एआई मैनेजमेंट का दौर अमेरिका में कई राजनीतिक दल अब ऐसे टूल और सलाहकार इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विश्लेषण करते हैं कि एआई चैटबॉट किसी उम्मीदवार के बारे में क्या जवाब दे रहे हैं और उन्हें बेहतर बनाने के लिए किन बदलावों की जरूरत है। सोशल मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशन टीमों को एआई फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।



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