एन. रघुरामन का कॉलम:  अपने बच्चों को संकट से निपटना सिखाएं…
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एन. रघुरामन का कॉलम: अपने बच्चों को संकट से निपटना सिखाएं…

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आज के दौर में ‘अर्श से फर्श’ तक पहुंचने वाले कई कारोबारी साम्राज्य उन लोगों ने खड़े किए हैं, जिन्होंने जमीन पर उतरकर कड़ी मेहनत की है। लेकिन, उनकी अगली पीढ़ी एक ऐसे दौर में पली-बढ़ी है जहां सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं रही। उन्होंने कभी किसी बड़े आर्थिक संकट का कड़वा स्वाद नहीं चखा। यही कारण है कि संपत्ति बनाने वाली पीढ़ी और उसे विरासत में पाने वाली पीढ़ी के बीच सोच की बड़ी खाई पैदा हो गई है। पिछले नौ दिनों से खाड़ी देशों और मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध ने उन माता-पिता की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने शून्य से कारोबार खड़ा किया। जहां वे संपत्ति और गिरते वैल्युएशन को लेकर रात भर जाग रहे हैं, वहीं उनके बच्चे बेफिक्र नजर आते हैं। यह बेफिक्री किसी बहादुरी का नतीजा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और संकटों के अनुभव की कमी है। आज कई बड़े कारोबारी माता-पिता ठीक वैसी ही स्थिति में हैं, जैसी 2008 के वैश्विक संकट के दौरान ‘लेहमैन ब्रदर्स’ की थी। याद कीजिए, बैलेंस शीट पर भारी-भरकम संपत्ति होने के बावजूद वह कंपनी दिवालिया हो गई थी। कारण? जब संकट आया और वे अपनी संपत्तियों को बेचने बाजार निकले, तो उन्हें वो कीमत नहीं मिली जो कागजों पर दर्ज थी। रातोंरात वे कीमती संपत्तियां ‘कबाड़’ बन गईं, जिनका कोई खरीदार नहीं बचा था। 2008 के संकट के दौरान गोल्डमैन सैक्स का नेतृत्व करने वाले लॉयड ब्लैंकफीन भी इसी बात का समर्थन करते हैं। 71 वर्षीय ब्लैंकफीन का उन चिंतित पिताओं को मशविरा है जो आने वाले आर्थिक संकट से डरे हुए हैं, ‘संपत्तियों को लंबे समय तक दबाकर बैठने के बजाय, सही समय पर उन्हें बेच देने में ही समझदारी है। मैं यह नहीं कह रहा कि संकट कल ही आ जाएगा, लेकिन जब युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो आप पाएंगे कि जिन संपत्तियों को आपने ऊंची कीमतों पर रखा था, बाजार में उतनी कीमत नहीं रह गई।’ आज दुनिया के सामने ‘स्टैगफ्लेशन’ का खतरा मंडरा रहा है। आसान शब्दों में कहें तो आर्थिक विकास की रफ्तार थम जाना, पर महंगाई बढ़ते रहना। ऐसे में बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि वे ‘स्थायित्व के भ्रम’ में न जिएं, बल्कि दुनिया में बदल रहे भू-राजनैतिक समीकरणों के आधार पर अपनी रणनीति बनाएं। मैनेजमेंट टिप: अपने बच्चों को ‘संकट के लिए तैयार’ रहना सिखाएं। बदलते दौर में अपनी योजनाओं को लचीला और मजबूत रखने का यही एकमात्र तरीका है। बच्चों को उस दुनिया के लिए तैयार न करें जो अब अस्तित्व में ही नहीं है।



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