Hindi News Lifestyle Child Abusive Language Vs Parenting; Outside Influence Negative Impact | How To Protect 9 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं यूपी के आगरा से हूं। मेरा बेटा 10 साल का है। वह पढ़ने-लिखने में काफी अच्छा है। लेकिन हाल ही में एक घटना ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया। […]
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पेरेंटिंग- 4 साल के बेटे को कभी डांटा-मारा नहीं: अब वो बहुत जिद्दी हो गया है, बच्चे को बिना डांटे प्यार से डिसिप्लिन कैसे सिखाएं
18 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं नई दिल्ली से हूं। मेरा बेटा 4 साल का है। जब वह पैदा हुआ तो हम चाइल्ड साइकोलॉजी की काफी किताबें पढ़ते थे। उसमें लिखा था कि बच्चों को बिल्कुल डांटना नहीं चाहिए। अभी वह चार साल का है और इन सालों में हमने कभी उसके […]
एन. रघुरामन का कॉलम: छोटी-सी उपलब्धि पर बच्चे ‘डेंडेलियन का ताज’ क्यों पहन लेते हैं?
बहुत पहले मैं किसी काम से मुंबई के शिवाजी पार्क गया, जहां से सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी निकले हैं। इसी वजह से क्रिकेट कोचिंग के लिए यहां आने वाले हर बच्चे की मां अपने बच्चे में ‘सचिन’ देखने लगी। जब तक बेटा प्रैक्टिस पूरी न कर ले, वे घंटों तक साइडवॉल पर बैठी रहतीं। वहां […]
पेरेंटिंग- 12वीं के बाद बेटा करियर को लेकर कन्फ्यूज: कभी इंजीनियर बनना है तो कभी आईएएस, सही राह चुनने में उसकी मदद कैसे करें?
11 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- हम लखनऊ में रहते हैं। हमारा बेटा 18 साल का है और उसने अभी 12वीं पास की है। वो पढ़ाई में अच्छा है। टीचर्स भी उसकी तारीफ करते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से वह अपने करियर को लेकर वह काफी कन्फ्यूज रहता है। कभी कहता है, […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चे की पसंद और नापसंद उसके जन्म से पहले तय हो सकती हैं
‘भूख लग रही है बच्चा? बस मुझे थोड़ा समय दो। मैं जल्दी से गाजर और बीन्स को घर में उगाई पालक से मिलाकर एक बढ़िया सब्जी बना देती हूं, जिसे तुम अपनी रोटी के साथ बड़े चाव से खाओगे।’ मैंने एक बार रसोई में अपनी मां को यह कहते सुना था। बैठकखाने से मैं मौसी […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अब हमारे परिवारों में रिवर्स मेंटरिंग का समय आ गया है
हमारे परिवारों में देखते ही देखते हम लोगों ने विभेद खड़े कर दिए। परिवार में सब समान होते हैं, ये विचार ही नई सोच की आंधी में उड़ गया। निज-हित की अति ने परिवार में कलह, विघटन को आमंत्रण दे दिया। बड़े-छोटे का झंझट अहंकार को पोषित कर रहा है और अहंकार परिवारों का सबसे […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए नए-नए आइडिया की जरूरत है
इस देश के पास 1.99 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 188 लाख करोड़ रुपए) का सॉवरेन वेल्थ फंड है, जो दुनिया के सबसे बड़े ऐसे फंड्स में से एक है। यहां गत वर्ष बिकने वाली कारों में से 96% इलेक्ट्रिक थीं। लेकिन इसकी 56 लाख की आबादी में करीब 5 लाख लोग एक टेक्स्ट मैसेज या सामान्य […]
एन. रघुरामन का कॉलम: हमारे बच्चे ‘टेक नेक’ या ‘कॉस्मेटिकोरिक्सिया’ से तो नहीं जूझ रहे?
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column: Are Our Children Grappling With ‘Tech Neck’ Or ‘Cosmeticorexia’? 1 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु कई वर्षों पहले पत्नी ने मेरी बेटी से कहा कि ‘तुम अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी लग रही हो।’ बस, इस पर तो मेरे घर में तूफान आ गया। उन्होंने ऐसा […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं
अगर आप ग्रामीण भारत में किसी पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा दृश्य दिख सकता है- चलती ट्रेन में भी किचन की जिम्मेदारी संभाल रही एक युवा मां अपने हैंडबैग में हाथ डालती है। उसका साल भर का बेटा राहुल (काल्पनिक नाम) बेचैन है। उसके नन्हे-से हाथ मां की कलाई […]
पं. विजयशंकर मेहता कॉलम: सावधानी से अपने बच्चों को चरित्र की तरफ मोड़ें
अब समय आ गया है कि हम इस बात पर जोर दें- खासतौर पर माता-पिता- कि इंसान की रचनात्मकता मशीनों से अहम रहे। क्योंकि जिस तेजी से मशीनें हमारे जीवन में उतरेंगी, हम लोगों की माता-पिता के रूप में तो उम्र बीत जाएगी, पर हमारे बच्चे न मशीन रह पाएंगे, न इंसान। उनका शिखंडी व्यक्तित्व […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अपने बच्चों को संकट से निपटना सिखाएं…
आज के दौर में ‘अर्श से फर्श’ तक पहुंचने वाले कई कारोबारी साम्राज्य उन लोगों ने खड़े किए हैं, जिन्होंने जमीन पर उतरकर कड़ी मेहनत की है। लेकिन, उनकी अगली पीढ़ी एक ऐसे दौर में पली-बढ़ी है जहां सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं रही। उन्होंने कभी किसी बड़े आर्थिक संकट का कड़वा स्वाद नहीं चखा। […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ऑल-इन-वन प्रजाति यानी स्त्रियों से मैंने दो शानदार सबक सीखे हैं!
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: 2 Lessons Learned From All in One Species Women 8 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 1. बाहर तापमान एक अंक में हो या मूसलधार बारिश हो रही हो- उनका एक नियम अटल था : सुबह 5 बजे से बहुत पहले जब अलार्म घड़ी बज उठे तो […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ऑल-इन-वन प्रजाति यानी स्त्रियों से मैंने दो शानदार सबक सीखे हैं!
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: 2 Lessons Learned From All in One Species Women 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 1. बाहर तापमान एक अंक में हो या मूसलधार बारिश हो रही हो- उनका एक नियम अटल था : सुबह 5 बजे से बहुत पहले जब अलार्म घड़ी बज उठे तो […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बच्चों की मित्र मंडली के बारे में हमें जानकारी होनी चाहिए
जैसे कुछ साइट्स पर जाने से रोकने के लिए गेट वॉल्व होते हैं, वैसे ही हम अपने बच्चों को सिखाएं कि कुसंग के लिए गेट वॉल्व बनाएं। पहले माना जाता था कि बच्चे जब युवा उम्र में जाएं तो उनकी मित्रता कुसंग में न बदल जाए, इसकी सावधानी रखी जाए। लेकिन ये खतरा अब बालपन […]
पेरेंटिंग- क्या बच्चे को ट्यूशन पढ़ाना जरूरी है: उसके साथ के सारे बच्चे ट्यूशन जाते हैं, कहीं वो लेफ्ट-आउट तो नहीं फील करेगा
सवाल- मैं बनारस से हूं। मेरा 12 साल का बेटा छठवीं क्लास में पढ़ता है। वह पढ़ाई में काफी अच्छा है। टीचर्स भी तारीफ करते हैं। कुल मिलाकर अभी तक उसकी पढ़ाई को लेकर कोई चिंता नहीं है। लेकिन उसके सभी दोस्त ट्यूशन लेते हैं। क्लास के बाकी सारे बच्चे भी ट्यूशन जाते हैं। कहीं […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हम परिवारों में छोटी-छोटी एक्टिविटी पर ग्रिप बनाएं
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Build Grip On Small Family Activities 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता अब यह बात धीरे-धीरे स्थापित हो गई है कि पति-पत्नी का रिश्ता यदि बीमार हो तो तलाक उसकी दवा है। इस रिश्ते में जिस समझ की बात की जाती थी, वो भी अब […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अपनों के बीच आ रही दूरी को कैसे टालें?
अपने आसपास देखिए, पांच साल की उम्र के कई बेटे होंगे, जो अपने पिता को ‘माय सुपर हीरो’ कहते हैं। जब वह 10 साल का होता है तो यह छवि थोड़ी दूसरे दर्जे पर आती है और बेटा कहने लगता है कि ‘मेरे पिता सुपर हीरो हैं, लेकिन अकसर गुस्सा हो जाते हैं।’ आप लहजा […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे
Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: AIs Impact On Children & Family Safety 51 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता दुनियाभर के बाजार आज एआई में जमकर निवेश कर रहे हैं। दीवानों ने दर्द को ही दवा बना लिया है। हर बात का निदान एआई में ढूंढा जा रहा है। हमारे यहां दो […]
पेरेंटिंग- बेटी अपनी उम्र से ज्यादा मैच्योर बातें करती है: उसकी ये समझदारी अच्छी है या चिंता की बात, मुझे क्या करना चाहिए?
Hindi News Lifestyle Teen Daughter Mature Behavior; Child Psychology Advice | Social Media Screen Time 2 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं लखनऊ से हूं। मेरी 13 साल की बेटी काफी समझदार है। लेकिन कई बार वह ऐसी बातें करती है, जो उसकी उम्र के मुकाबले काफी ज्यादा मैच्योर होती हैं। कभी वह […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है
परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का कोई बहाना नहीं बना सकते थे। नियम सिर्फ दो मौकों पर टूटता था- जब किसी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है
परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का कोई बहाना नहीं बना सकते थे। नियम सिर्फ दो मौकों पर टूटता था- जब किसी […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: माता-पिता बच्चों के निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं
इन दिनों अपने बच्चों के लालन-पालन में कुछ अधिक ही अलर्ट माता-पिता उनसे अत्यधिक पूछताछ करते हैं और टोका-टाकी करते रहते हैं। इस चक्कर में वो भूल जाते हैं कि बच्चों के मनोविज्ञान पर विपरीत असर पड़ रहा है। कुछ माता-पिता तो भोजन के समय भी बच्चों को इतने अधिक विकल्प दे देते हैं कि […]
एन. रघुरामन का कॉलम: दादी-नानी मां से अपनी एआई स्किल्स को निखारना सीखें!
यह 1968 की एक रविवार की शाम थी। उन्होंने गली के छोर से उन्हें चलकर आते देखा। उनकी आंखों ने भांप लिया कि वे अपनी सामान्य अवस्था में नहीं थे। उनके एआई यानी एक्चुअल इंटेलिजेंस ने फौरन उन घटनाओं को परखना शुरू कर दिया, जो उनके दफ्तर में घट सकती थीं। उस दिन उनके बॉस […]


























