6 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं पटना से हूं। मेरा 10 साल का बेटा है। मैंने नोटिस किया है कि वह अपने छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं करता। पानी चाहिए तो किसी को बुलाएगा, स्कूल बैग लगाना हो तो मेरी मदद मांगेगा। मैं उसे अपने कामों से लेकर घर के छोटे-छोटे काम […]
Tag: parenting tips
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमारे परिवार सशक्त ही नहीं, एकजुट और संवेदनशील भी हों
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column | Empowering & United Family Values 1 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भारत की एक ताकत है- परिवार-व्यवस्था। हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे परिवार केवल सशक्त ही न हों, एकजुट और संवेदनशील भी हों। आजकल माना जाता है कि रोटी, कपड़ा और मकान उच्च […]
पेरेंटिंग- बेटा बड़ा हो रहा है: डरती हूं, कहीं गलत संगत में न पड़ जाए, उसे सही-गलत में फर्क करना, अच्छे दोस्त चुनना कैसे सिखाएं
21 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं लखनऊ से हूं। मेरा बेटा 12 साल का है। हाल ही में उसका स्कूल बदला है। उसने वहां कुछ नए दोस्त बनाए हैं और अब उन्हीं के साथ ज्यादा समय बिताता है। एक मां होने के नाते मुझे खुशी है कि वह घुल-मिल रहा है, लेकिन […]
एन. रघुरामन का कॉलम: क्या भारतीय पैरेंटिंग किसी भी पश्चिमी शैली से अधिक बेहतर हो सकती है?
अमेरिका में 4 से 8 साल की उम्र के बच्चों पर साल भर तक चले एक लंबे अध्ययन में पाया गया कि जब श्वेत बच्चे टीवी प्रोग्राम्स में अलग-अलग नस्लों के लोगों को साथ देखते हैं तो इससे उनके मन में किसी के प्रति भेदभाव विकसित नहीं होता। इस सोमवार को जर्नल ऑफ अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट्स […]
पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा पैसे की कीमत नहीं समझता: दोस्तों को देखकर महंगे कपड़े-खिलौने मांगता है, उसे पैसे की वैल्यू कैसे सिखाएं
10 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- हमारा बेटा 10 साल का है और हम एक मिडिल क्लास फैमिली हैं। हम अपने बेटे की जरूरतें पूरी करने की हरसंभव कोशिश करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे वो बड़ा हो रहा है, हर नई चीज को अपनी जरूरत समझने लगा है। कभी महंगे जूते, कभी नए खिलौने […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को ऐसी दुनिया से बचाइए, जो काम से ज्यादा दिखावे को महत्व देती है
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Protect Children From A World That Values appearances Over Substance. 24 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु हमारे बच्चे और टीनेजर्स आज जितनी बड़ी संख्या में भावनात्मक तनावों का सामना कर रहे हैं, उनसे पार पाना मुश्किल लग सकता है। इनमें नींद की कमी, एकेडमिक प्रेशर […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को ऐसी दुनिया से बचाइए, जो काम से ज्यादा दिखावे को महत्व देती है
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Protect Children From A World That Values appearances Over Substance. 6 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु हमारे बच्चे और टीनेजर्स आज जितनी बड़ी संख्या में भावनात्मक तनावों का सामना कर रहे हैं, उनसे पार पाना मुश्किल लग सकता है। इनमें नींद की कमी, एकेडमिक प्रेशर […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: असली नेतृत्व यह भी सिखाता है कि हारने पर क्या करना है
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Real Leadership Teaches How To Handle Loss 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता पहले सीखने-सिखाने के तरीके भी अलग थे। नहाते हुए पानी छींटना, तकिए से एक-दूसरे पर प्रहार करना, चादरें ओढ़ कर डराना। इन खेलों के पीछे एक मनोविज्ञान काम करता था। कैसे प्रहार […]
रीता राममूर्ति का कॉलम: बचपन से ही पढ़ने की आदत डालें तो जीवन बदल जाता है
Hindi News Opinion Reeta Ramamurthy Column: Reading Habit From Childhood Transforms Life 4 घंटे पहले कॉपी लिंक रीता राममूर्ति गुप्ता लेखिका और रीडिंग कोच अधिकांश पैरेंट्स बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि इसकी शुरुआत कैसे करें। वे स्क्रीन के खिलाफ लड़ाई भी हार जाते हैं। […]
संत की एक मां को सीख: बच्चा जन्म से ही आसपास के वातावरण, माता-पिता के व्यवहार से सीखना शुरू कर देता है, बच्चों को अच्छी शिक्षा दें
एक लोक कथा है- एक छोटे से गांव में एक संत के प्रवचन सुनने दूर-दूर से लोग आते थे। संत सरल शब्दों में जीवन की गहरी बातें समझाने के लिए प्रसिद्ध थे। एक दिन गांव में उनका प्रवचन चल रहा था। विषय था- “शिक्षा का महत्व”। संत ने कहा, “मनुष्य का जीवन शिक्षा के बिना […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमारे समृद्ध घरों के अधिकांश सदस्य आदतों से गरीब हो गए
भारत के धनाढ्य परिवारों में किस बात की गरीबी है? गहराई से सोचें तो हमारे समृद्ध घरों के अधिकांश सदस्य आदतों से गरीब हो गए। यह एक डराने वाला आंकड़ा है कि 60% युवा दिन में तीन घंटे के आसपास ऑनलाइन गेमिंग में उलझे हुए हैं और यह आंकड़ा दुनिया में सर्वाधिक है। डिजिटल मीडिया […]
पेरेंटिंग- मेरी बेटी को लगता है, वो मोटी है: अपनी तुलना सोशल मीडिया वाली लड़कियों से करती है और दुखी होती है, उसे कैसे समझाऊं?
Hindi News Lifestyle Teenager Body Image Insecurity; Child Psychologist Advice | Social Media Impact 17 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरी 14 साल की बेटी है। पिछले कुछ महीनों से मैं नोटिस कर रही हूं कि वह अपने लुक्स और बॉडी को लेकर काफी इनसिक्योर महसूस करने लगी है। […]
पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा गाली देने लगा है: स्कूल के दोस्तों से एडल्ट गालियां सीख रहा है, बच्चे को बाहर के प्रभाव से कैसे बचाएं?
Hindi News Lifestyle Child Abusive Language Vs Parenting; Outside Influence Negative Impact | How To Protect 9 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं यूपी के आगरा से हूं। मेरा बेटा 10 साल का है। वह पढ़ने-लिखने में काफी अच्छा है। लेकिन हाल ही में एक घटना ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया। […]
पेरेंटिंग- 4 साल के बेटे को कभी डांटा-मारा नहीं: अब वो बहुत जिद्दी हो गया है, बच्चे को बिना डांटे प्यार से डिसिप्लिन कैसे सिखाएं
18 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं नई दिल्ली से हूं। मेरा बेटा 4 साल का है। जब वह पैदा हुआ तो हम चाइल्ड साइकोलॉजी की काफी किताबें पढ़ते थे। उसमें लिखा था कि बच्चों को बिल्कुल डांटना नहीं चाहिए। अभी वह चार साल का है और इन सालों में हमने कभी उसके […]
एन. रघुरामन का कॉलम: छोटी-सी उपलब्धि पर बच्चे ‘डेंडेलियन का ताज’ क्यों पहन लेते हैं?
बहुत पहले मैं किसी काम से मुंबई के शिवाजी पार्क गया, जहां से सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी निकले हैं। इसी वजह से क्रिकेट कोचिंग के लिए यहां आने वाले हर बच्चे की मां अपने बच्चे में ‘सचिन’ देखने लगी। जब तक बेटा प्रैक्टिस पूरी न कर ले, वे घंटों तक साइडवॉल पर बैठी रहतीं। वहां […]
पेरेंटिंग- 12वीं के बाद बेटा करियर को लेकर कन्फ्यूज: कभी इंजीनियर बनना है तो कभी आईएएस, सही राह चुनने में उसकी मदद कैसे करें?
11 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- हम लखनऊ में रहते हैं। हमारा बेटा 18 साल का है और उसने अभी 12वीं पास की है। वो पढ़ाई में अच्छा है। टीचर्स भी उसकी तारीफ करते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से वह अपने करियर को लेकर वह काफी कन्फ्यूज रहता है। कभी कहता है, […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चे की पसंद और नापसंद उसके जन्म से पहले तय हो सकती हैं
‘भूख लग रही है बच्चा? बस मुझे थोड़ा समय दो। मैं जल्दी से गाजर और बीन्स को घर में उगाई पालक से मिलाकर एक बढ़िया सब्जी बना देती हूं, जिसे तुम अपनी रोटी के साथ बड़े चाव से खाओगे।’ मैंने एक बार रसोई में अपनी मां को यह कहते सुना था। बैठकखाने से मैं मौसी […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अब हमारे परिवारों में रिवर्स मेंटरिंग का समय आ गया है
हमारे परिवारों में देखते ही देखते हम लोगों ने विभेद खड़े कर दिए। परिवार में सब समान होते हैं, ये विचार ही नई सोच की आंधी में उड़ गया। निज-हित की अति ने परिवार में कलह, विघटन को आमंत्रण दे दिया। बड़े-छोटे का झंझट अहंकार को पोषित कर रहा है और अहंकार परिवारों का सबसे […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए नए-नए आइडिया की जरूरत है
इस देश के पास 1.99 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 188 लाख करोड़ रुपए) का सॉवरेन वेल्थ फंड है, जो दुनिया के सबसे बड़े ऐसे फंड्स में से एक है। यहां गत वर्ष बिकने वाली कारों में से 96% इलेक्ट्रिक थीं। लेकिन इसकी 56 लाख की आबादी में करीब 5 लाख लोग एक टेक्स्ट मैसेज या सामान्य […]
एन. रघुरामन का कॉलम: हमारे बच्चे ‘टेक नेक’ या ‘कॉस्मेटिकोरिक्सिया’ से तो नहीं जूझ रहे?
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column: Are Our Children Grappling With ‘Tech Neck’ Or ‘Cosmeticorexia’? 1 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु कई वर्षों पहले पत्नी ने मेरी बेटी से कहा कि ‘तुम अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी लग रही हो।’ बस, इस पर तो मेरे घर में तूफान आ गया। उन्होंने ऐसा […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं
अगर आप ग्रामीण भारत में किसी पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा दृश्य दिख सकता है- चलती ट्रेन में भी किचन की जिम्मेदारी संभाल रही एक युवा मां अपने हैंडबैग में हाथ डालती है। उसका साल भर का बेटा राहुल (काल्पनिक नाम) बेचैन है। उसके नन्हे-से हाथ मां की कलाई […]
पं. विजयशंकर मेहता कॉलम: सावधानी से अपने बच्चों को चरित्र की तरफ मोड़ें
अब समय आ गया है कि हम इस बात पर जोर दें- खासतौर पर माता-पिता- कि इंसान की रचनात्मकता मशीनों से अहम रहे। क्योंकि जिस तेजी से मशीनें हमारे जीवन में उतरेंगी, हम लोगों की माता-पिता के रूप में तो उम्र बीत जाएगी, पर हमारे बच्चे न मशीन रह पाएंगे, न इंसान। उनका शिखंडी व्यक्तित्व […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अपने बच्चों को संकट से निपटना सिखाएं…
आज के दौर में ‘अर्श से फर्श’ तक पहुंचने वाले कई कारोबारी साम्राज्य उन लोगों ने खड़े किए हैं, जिन्होंने जमीन पर उतरकर कड़ी मेहनत की है। लेकिन, उनकी अगली पीढ़ी एक ऐसे दौर में पली-बढ़ी है जहां सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं रही। उन्होंने कभी किसी बड़े आर्थिक संकट का कड़वा स्वाद नहीं चखा। […]



























