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- Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Real Leadership Teaches How To Handle Loss
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
पहले सीखने-सिखाने के तरीके भी अलग थे। नहाते हुए पानी छींटना, तकिए से एक-दूसरे पर प्रहार करना, चादरें ओढ़ कर डराना। इन खेलों के पीछे एक मनोविज्ञान काम करता था। कैसे प्रहार करें, कैसे बचें और कैसे नेतृत्व करें? इसमें अपनापन था। खेल-खेल में सीख गए। अब तो सीख को भी खेल बनाया जा रहा है, क्योंकि मशीन हावी हो रही है।
इन दिनों अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को एक चीज सिखाना चाहते हैं- नेतृत्व। पर नेतृत्व का अर्थ केवल आगे रहना, ऊपर चढ़ना नहीं है। असली नेतृत्व एक बात और सिखाता है- हारने पर क्या करना है? जिंदगी की चुनौतियों में भी मजेदार बने रहें तो खेल-खेल में बड़ी-बड़ी विपत्तियां भी निपट जाएंगी। और हम ऐसा नेतृत्व करेंगे, जिसमें जीतेंगे तो भी अहंकार नहीं पालेंगे, हारेंगे तो भी उदासी नहीं ओढ़ेंगे।
खेल-खेल में नेतृत्व सिखाया था राम ने। वे छोटे भाइयों के साथ गेंद का खेल खेलते तो हमेशा भरत को जिता देते। संतों ने इस प्रसंग की व्याख्या की है कि नेतृत्व जीत और हार में एक जैसा होता है।









