पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  हमारे समृद्ध घरों के अधिकांश सदस्य आदतों से गरीब हो गए
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमारे समृद्ध घरों के अधिकांश सदस्य आदतों से गरीब हो गए

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भारत के धनाढ्य परिवारों में किस बात की गरीबी है? गहराई से सोचें तो हमारे समृद्ध घरों के अधिकांश सदस्य आदतों से गरीब हो गए। यह एक डराने वाला आंकड़ा है कि 60% युवा दिन में तीन घंटे के आसपास ऑनलाइन गेमिंग में उलझे हुए हैं और यह आंकड़ा दुनिया में सर्वाधिक है। डिजिटल मीडिया ने युवाओं को और महिलाओं को एक तरह से चपेट में ले लिया है। चर्बी बढ़ रही, मोटापा पूरी तरह उतर गया। खाने-पचाने में गैप आ गया। जुआ तो हर हाल में बुरा है। इस जुआ खेलने की आदत के लिए एक सबक लें कि युधिष्ठिर जैसा धर्मराज भी खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाया। पन्द्रहवें दांव में उन्होंने द्रौपदी लगा दी। सब हार गए, क्योंकि जुआ खेलने वाले को अपराध बोध तो होता ही है पर यही अपराध बोध फिर से उसकी प्रेरणा बढ़ा देता है। यह सबसे खतरनाक बात है द्यूत को लेकर। हमें अपने घरों में बच्चों पर यह नजर रखनी होगी कि वे कहीं इस मायाजाल में तो नहीं उलझ रहे और युधिष्ठिर बनकर अपना सब कुछ तो नहीं खो देंगे।



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