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- N Raghuraman Column: Positive Outlook Amidst Emerging Negative Circumstances
1 घंटे पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
‘नहीं’ शब्द कई लोगों को नकारात्मक लग सकता है, लेकिन सही जगह इस्तेमाल किया जाए तो इसका सकारात्मक पक्ष भी होता है। जैसे, टेलीविजन पर अपने शो में एक बार सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने कहा था कि ‘कोई भी काम मेरे लिए मुश्किल नहीं है।’ अगर आप अस्पताल और केयर गिविंग इंडस्ट्री से जुड़े हैं, खासकर नर्सिंग पेशे या नर्सिंग कॉलेज संचालन से, तो आगे की यह कहानी बहुत महत्वपूर्ण है।
नकारात्मक स्थिति : मुझे अमित जी की बात मंगलवार को तब याद आई, जब मैंने इस हफ्ते शिकागो में हुई अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत रिसर्च पेपर पढ़ा। इसमें बताया गया कि कैंसर के मामलों में 21% की बढ़ोतरी होने जा रही है।
दुनिया की इस सबसे बड़ी कैंसर कॉन्फ्रेंस में चर्चा हुई कि कैसे वर्तमान में दुनिया में सालाना लगभग 2 करोड़ लोगों में कैंसर का पता चलता है। और कैसे 2050 तक यह आंकड़ा 3.53 करोड़ तक पहुंच सकता है। द लैंसेट मैगजीन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में रोजाना लगभग 1 लाख लोगों में कैंसर का डायग्नोसिस होगा।
इसी रिपोर्ट के दूसरे हिस्से में कहा गया है कि दुनिया कैंसर वर्कफोर्स में गंभीर कमी का सामना कर रही है और 2050 तक 10 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी होने का अनुमान है। इसमें आगे बताया कि जैसे-जैसे कैंसर बढ़ेगा, मरीजों को भविष्य में जांच और इलाज के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के सह-लेखक मार्क लॉलेर ने इसकी लॉन्चिंग में कहा कि ‘हम 2050 तक यह देखने का इंतजार नहीं कर सकते कि हमारे अनुमान सही हुए या नहीं।
हमें अभी कार्रवाई करनी होगी। कोई गलती मत कीजिए, यह चेतावनी है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप दुनिया में कहां रह रहे हैं।’ रिपोर्ट की को-लीड हेडविक ह्रिकेक ने कहा कि ‘वैश्विक पहल एक स्पष्ट चेतावनी देती है। वर्कफोर्स में गंभीर कमी को दूर करने के लिए तत्काल कार्रवाई नहीं की तो हम अभूतपूर्व कैंसर संकट झेलेंगे। हम हर देश के लिहाज से विशेष रणनीति बनाने का आह्वान करते हैं, जिसमें एआई डिजिटल हेल्थ तकनीक अपनाने के साथ वर्कफोर्स का अधिक समझदारी से उपयोग शामिल है।’
अब सकारात्मकता देखिए : आंकड़े झूठ नहीं बोलते। और ये आंकड़े बताते हैं कि सबसे बड़ी करीब 6.5 करोड़ लोगों की कमी नर्सिंग स्टाफ में, उसके बाद लगभग 1.6 करोड़ की कमी डायग्नोस्टिक स्टाफ में होगी। बाकी 1.9 करोड़ लोगों की कमी कैंसर केयर के अन्य क्षेत्रों में होगी। यानी कुल 10 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार अभी कैंसर वर्कफोर्स में निवेश किया जाए तो 2030 से 2050 के बीच 17 करोड़ मौतों को टाला जा सकता है और लगभग 120 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक लाभ भी मिल सकते हैं। यदि कर्मचारियों की संभावित कमी दूर करने के लिए रिपोर्ट की सिफारिशें लागू की जाती हैं तो देश के सभी 2278 कार्यशील नर्सिंग कॉलेजों को इस मौके पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार इनमें 2044 निजी और 234 सरकारी कॉलेज हैं। पिछले दो वर्षों में केंद्र सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजना में 113 नए नर्सिंग कॉलेजों को मंजूरी दी। यह 2023 के बजट में घोषित हुए 157 कॉलेजों के अलावा है।
इन कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सालाना पास-आउट होने वाले हर नर्सिंगकर्मी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा मिले। ऑन्कोलॉजी नर्स नेविगेटर से लेकर पेलिएटिव और सर्वाइवरशिप केयर एक्सपर्ट तक कई सारे स्पेशलाइज्ड एरिया मौजूद हैं। कैंसर का इलाज अब सभी मरीजों के लिए एक जैसी कीमोथेरेपी से हट कर टार्गेटेड जेनेटिक लेवल उपचार की ओर बढ़ रहा है।
इसमें नर्सिंगकर्मी जेनेटिक काउंसलिंग सपोर्ट की भूमिका निभाते हैं। भविष्य के नर्सिंगकर्मियों को तकनीक से भी तालमेल बैठाना होगा। पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सिंग और ऑन्कोलॉजी सर्टिफाइड नर्सेज जैसे कई ऊंची तनख्वाह वाले अवसर उपलब्ध हैं, जिनके लिए मास्टर्स प्रोग्राम के जरिए कौशल हासिल किया जा सकता है।
फंडा यह है कि कुछ चीजों पर हमारा नियंत्रण बहुत कम होता है, लेकिन हम अपने लिए अवसर जरूर तलाश सकते हैं। और साथ ही, किसी का दर्द बहुत ज्यादा नहीं तो थोड़ा कम तो कर ही सकते हैं।









