एन. रघुरामन का कॉलम:  एआई की दुनिया में आपके भीतर ‘हाई-एजेंसी’ स्किल जरूर होनी चाहिए
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एन. रघुरामन का कॉलम: एआई की दुनिया में आपके भीतर ‘हाई-एजेंसी’ स्किल जरूर होनी चाहिए

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जब भी कोई कॉलेज स्टूडेंट मुझसे पूछता है कि एआई की नई दुनिया में जरूरी स्किल क्या है, तो हमेशा मेरा जवाब होता है- ‘निरंतरता’। किसी काम को सिर्फ कुछ महीनों या वर्षों नहीं, बल्कि दशकों तक करना। एक भी दिन का ब्रेक नहीं लेना। यह सिर्फ कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि वह अनुशासन है, जिसे हर मां बिना शिकायत किए निभाती है। इस सवाल पर एचआर प्रोफेशनल्स के जवाब अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे- व्यवस्थित, ईमानदार, सकारात्मक, भरोसेमंद और समर्पित होना या अच्छा कम्युनिकेशन करना। लेकिन अगर आप ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन से पूछें तो उनका जवाब सफलता के लिए जरूरी सभी स्वीकृत और परखे हुए गुणों से अलग होगा और वे कहेंगे, ‘हाई एजेंसी बनो।’ हालांकि आल्टमैन अत्यधिक लचीलेपन और दीर्घकालीन फोकस जैसे गुणों की वकालत लंबे समय से करते रहे हैं, खासकर अपने चर्चित निबंध ‘हाउ टु बी सक्सेसफुल’ में उन्होंने इसका उल्लेख किया है। लेकिन जैसे-जैसे एआई रोजमर्रा के काम ऑटोमेट कर रहा है, उनकी सार्वजनिक सलाह ‘हाई एजेंसी’ (एचए) पर शिफ्ट हो गई है। यह आप 2024 से 2026 के बीच दिए उनके साक्षात्कारों में देख सकते हैं। ‘एचए’ क्या है, इसे समझने से पहले एक ‘डिटेंशन टेस्ट’ से शुरू करते हैं। तैयार हैं? पूरा लेख पढ़कर खुद से चीट मत कीजिए, बल्कि खुले मन से टेस्ट में शामिल होइए। कल्पना करो आपको किसी विदेशी एयरपोर्ट पर रोक लिया गया है और अधिकारियों ने आपको सिर्फ एक कॉल की अनुमति दी है। अब बताइए, आप किसे फोन करेंगे? पत्नी को, जो गृहिणी हैं और परेशान हो जाएंगी? 70 साल के पिता को? या भाई को, जो प्रभावशाली सरकारी पद पर हैं? अगर आप ‘एचए’ का मतलब जानते होंगे तो भाई को फोन करेंगे। क्योंकि शायद वही आपकी जिंदगी में ‘हाईएस्ट एजेंसी’ वाले व्यक्ति हों। वे घबराएंगे नहीं, शायद दर्जन भर सवाल पूछ लें। सिस्टम को कोसेंगे भी नहीं, बल्कि समस्या सुलझाने के तरीके ढूंढने शुरू कर देंगे। ‘एचए’ ऐसा माइंडसेट है, जिसमें आप एक निष्क्रिय यात्री बनने के बजाय अपनी जिंदगी के ड्राइवर खुद बनते हैं। यह सोच परिस्थितियों या सीमाओं को ज्यों की त्यों मानने से इनकार करती है। इसमें अंदरूनी भरोसा भी होता है कि आपका एक्शन नतीजों को प्रभावित करता है। किसी हाई एजेंसी व्यक्ति में निम्न कुछ व्यवहार दिखते हैं। 1. कार्रवाई की तत्परता : वे स्पष्ट अनुमति, आदर्श परिस्थितियों या सटीक निर्देशों का इंतजार नहीं करते। समस्या आती है तो तुरंत कार्रवाई शुरू कर देते हैं। 2. पूरी जिम्मेदारी लेना : वे समस्या-समाधान की जिम्मेदारी लेते हैं, भले ही यह उनके जॉब डिस्क्रिप्शन से बाहर की बात हो। 3. रिसोर्सफुलनेस होना : ‘यह असंभव है’ ऐसा कहकर रुकने के बजाय वे सोचते हैं कि ‘चलो, दूसरा तरीका आजमाता हूं।’ मनचाहा परिणाम मिलने तक वे ऐसे तरीके अपनाते रहते हैं। वर्कप्लेस पर एचए माइंडसेट कैसे विकसित करें? नियमित एक्सरसाइज से मसल्स बनाने की तरह ही जानबूझकर अपनाई कुछ दैनिक आदतें ‘एचए’ विकसित कर सकती हैं। इसके लिए पांच क्षेत्रों पर काम करना चाहिए : 1. समस्याएं नहीं, समाधान लेकर जाएं : दो व्यावहारिक समाधान सुझाए बिना अपने मैनेजर के पास कोई समस्या न लेकर जाएं।
2. नियमों को गाइडलाइन समझें : तेजी से परिणाम देने के लिए कठोर कॉर्पोरेट प्रक्रियाओं को कानूनी और नैतिक तरीके से मोड़ लें।
3. रुकावटों पर काबू पाएं : यदि कोई सहकर्मी ‘न’ कहे तो दूसरे हितधारकों या डेटा स्रोतों को खोजें।
4. संसाधनों की सीमितता में काम करें : बजट कम हो तब भी मुफ्त टूल्स का इस्तेमाल कर हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट बनाएं।
5. कैलकुलेटेड रिस्क लें : जब नेतृत्व अन-रेस्पॉन्सिव या अनुपलब्ध हो तो जरूरी फैसले अपने दम पर लें।
‘एचए’ की मूल अवधारणा यह है कि अपनी जिंदगी में बदलाव लाने की ताकत हम सभी में है। इसे अपनाना निराशा और बेबसी की भावना का इलाज बन सकता है। लगातार काम के जुनून वाली संस्कृति में यह तय करना कि वास्तव में हमारा ध्यान कहां होना चाहिए, शायद हमारा हाईएस्ट एजेंसी मूव हो सकता है। फंडा यह है कि ‘एचए’ एक मूल्य-निरपेक्ष शब्द है, न सकारात्मक और न नकारात्मक। यह ऐसे व्यक्ति का वर्णन है, जो जोखिम होने पर भी कार्रवाई करता है।



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