6 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
हम सब जानते हैं कि पेड़ों का अपना खुद का रंग हरा नहीं होता। वे भूरे रंग के होते हैं और बिना पत्तों के पेड़ अच्छा नहीं दिखता। पत्ते ही मिलकर किसी भी पेड़ को हरा बनाते हैं। हम यह भी जानते हैं कि जब एक-दो पत्ते सूख जाते हैं, तो उनकी जगह नए पत्ते आते हैं और पूरी तरह परिपक्व होने के बाद अच्छी तरह खिलते हैं। पेड़ और उसके पत्तों का रिश्ता उसकी पूरी उम्र ऐसे ही चलता है।
लेकिन कल्पनाशील कवियों के अलावा कई लोग यह नहीं देख पाते कि मौजूदा पत्ते भी आकार में बढ़ने की कोशिश करते हैं, ताकि तने को हरा-भरा दिखा सकें। पुराने पत्तों के बड़े होने के विचार पर वैज्ञानिक सवाल उठा सकते हैं। मैं भी इस पर बहस नहीं कर रहा। इसलिए मैंने कहा था कि ‘कल्पनाशीलता वाले कवियों के अलावा।’
लेकिन मनुष्यों के रिश्तों में यह बात बिल्कुल सच होती है। और यहां एक उदाहरण है, जहां मनुष्यों में पुराने पत्ते बड़े हुए। उस पेड़ का नाम था ‘ऑस्कर स्क्वाड्रन’, जो नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) का एक हिस्सा था। उस पेड़ पर 22 पत्ते थे।
हाल ही में 21 पत्ते- जिन्हें कोर्समेट्स कहा जाता है- भारतीय सैन्य बलों में अधिकारी बन गए। एक पत्ता यह नहीं कर सका, जबकि उसमें लीडरशिप के कई गुण थे। वही पत्ता स्क्वाड्रन का कैप्टन था, जिसे कैडेट कैप्टन कहते हैं। वह सिर्फ मजबूत ही नहीं, नर्म दिल भी था और उसका नाम था प्रथम महाले।
आखिरकार, वह सतारा के सैनिक स्कूल से था और महाराष्ट्र के जलगांव जिले के सायगांव का निवासी था। उसकी ऑटम पासिंग-आउट परेड में महज दो महीने ही बचे थे।2023 में उनके स्क्वाड्रन से बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए कोई प्रतिभागी नहीं था।
प्रथम ने कहा कि जो भी असहज हो, उसे भाग लेने की जरूरत नहीं है। उसने अपने कोर्समेट्स से कहा- ‘मैं स्क्वाड्रन के लिए कड़ी प्रैक्टिस करूंगा।’ प्रथम ने कड़ी ट्रेनिंग की ताकि ऑस्कर स्क्वाड्रन अच्छा प्रदर्शन करे और स्क्वाड्रन को चैंपियन स्क्वाड्रन बैनर मिल सके।
यह सम्मान उस स्क्वाड्रन को मिलता है, जो अकादमिक, खेल और ग्रुप एक्टिविटीज में सबसे अच्छा होता है। और प्रथम ने अपना वादा निभाया। उसके कोर्समेट्स कहते हैं कि ‘वह हमारे लिए लड़ा। वह सबसे आगे रहा। उसने कभी अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल नहीं किया। वह हमें एक बड़े भाई की तरह गाइड करता था। वह सम्मान पाने के साझा सपनों और प्रेरणा के साथ हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता था।’
लेकिन ऑस्कर पेड़ का वह मजबूत पत्ता, यानी प्रथम 16 अक्टूबर 2023 को सूख गया। कैडेट प्रथम महाले की इंटर-स्क्वाड्रन बॉक्सिंग प्रतियोगिता में दुखद मृत्यु हो गई।अब बाकी 21 पत्तों की जिम्मेदारी थी कि वे उस खालीपन को भरें और महाले परिवार नाम के दूसरे पेड़ को सहारा दें। उस महाले पेड़ की रक्षा करनी थी, ताकि जल्द एक नई पत्ती उग सके और परिवार को सहारा दे।
भावुकता और सैन्य भाईचारे की एक अनोखी मिसाल के तहत उन शेष 21 पत्तों, यानी स्क्वाड्रन के 21 युवा अफसरों ने प्रथम के परिवार को सहारा देना शुरू किया। वे प्रथम की बहन रुजुता (यानी नई पत्ती) की निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। वे हर महीने 25 से 40 हजार रुपए ही नहीं भेजते, बल्कि परिवार के साथ तीन-चार दिन रहकर भी आते हैं- ताकि माता-पिता और बहन को प्रथम की कमी महसूस ना हो।
बेशक यह एकेडमी में बनने वाले मजबूत रिश्तों का एक प्रेरणास्पद उदाहरण है। परिवार ने कभी ऐसा कुछ नहीं मांगा। परिवार को पासिंग आउट परेड में बुलाया गया। कुछ अधिकारियों ने उन्हें सम्मान देते हुए अपनी वर्दी पर स्टार लगाने का अनुरोध किया, जो सेना में शामिल होने की अहम परंपरा है। उनका यह काम इस खामोश वादे को बताता है कि वे एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे, ना सिर्फ यूनिफॉर्म में बल्कि जीवन के हर मोड़ पर।
फंडा यह है कि जिंदगी पेड़ और उसमें आने वाले लोग पत्तों की तरह है। पेड़ को पतझड़ में पत्तों के गिरने से निराशा होती है, लेकिन वह कभी हारता नहीं क्योंकि पुराने पत्ते उसकी रंगत बनाए रखते हैं और नए पत्ते भविष्य को सुंदर बनाते हैं।








