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कल्पना कीजिए कि एक बच्चा होमवर्क को एआई टूल पर अपलोड करके कहता है, ‘यह सवाल हल कर दो।’ तुरंत उत्तर देने के बजाय टूल विनम्रता से कहता है, ‘तुम्हारा होमवर्क जल्दी खत्म करने के लिए सीधे उत्तर पर जाने के बजाय क्या हम स्टेप-बाय-स्टेप समझ सकते हैं कि यह सवाल कैसे हल किया जाए?’ यह टूल स्टूडेंट्स को थीसिस तैयार करने में मदद कर सकता है, लेकिन उनके लिए पूरा निबंध नहीं लिखेगा। अगर कोई टीनएजर शॉर्टकट लेने की कोशिश करे तो ‘रेस्पॉन्सिबल होमवर्क रिमाइंडर्स’ उसे असाइनमेंट समझने की दिशा में मोड़ सकते हैं। इससे भी अधिक यह टूल छात्रों को किसी खास विषय में समझ और गहरी करने में मदद कर सकता है। ये भविष्य के आइडिया नहीं हैं। एआई ने इस दिशा में बढ़ना शुरू कर दिया है, यानी बच्चों को सिर्फ होमवर्क निपटाने में मदद के बजाय उन्हें लर्निंग सिखाना। जो छात्र एआई को होमवर्क का शॉर्टकट मानने लगे हैं, उनकी इस आदत को एआई खुद बदलने की कोशिश कर रहा है। चैटजीपीटी का ‘स्टडी मोड’ फाइनल जवाब देने के बजाय स्टूडेंट्स को किसी समस्या पर सोचने को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है। किसी सवाल को तुरंत हल करने के बजाय यह पूछ सकता है कि स्टूडेंट पहले से क्या जानता है, वह कहां अटका है और उसे अगले कदम के बारे में खुद सोचने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। यह धीरे-धीरे उसे कॉन्सेप्ट समझा सकता है, हिंट दे सकता है, उसकी समझ जांच सकता है और उससे सवाल तक पूछ सकता है। यह शिक्षा में एआई के इस्तेमाल के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। चिंता अनिवार्य तौर पर यह नहीं कि बच्चे एआई इस्तेमाल कर रहे हैं। बड़ी चिंता तब होती है, जब वे विषय को समझे बिना असाइनमेंट पूरा करने के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं। ओपनएआई ने एक्टिव पार्टिसिपेशन और गहरी समझ को प्रोत्साहित करने के लिए स्टडी मोड शुरू किया है। स्टूडेंट समस्याओं को स्टेप-बाय-स्टेप हल कर सकते हैं, स्टडी मटैरियल के बारे में सवाल पूछ सकते हैं और एआई काे महज आंसर-जनरेटर के बजाय एक ट्यूटर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। पैरेंट्स के लिए एक और दिलचस्प बदलाव हुआ है। ओपनएआई के पैरेंटल कंट्रोल्स टीनएजर्स के पैरेंट्स को अकाउंट लिंक करने की सुविधा देते हैं। हर नई कन्वर्सेशन के लिए स्टडी मोड को डिफॉल्ट किया जा सकता है। इसलिए शिक्षा में एआई अब शायद नए दौर में प्रवेश कर रहा है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि ‘हम बच्चों को होमवर्क के लिए एआई इस्तेमाल करने से कैसे रोकें?’ सवाल शायद यह हो गया है कि ‘हम कैसे सुनिश्चित करें कि बच्चे सोचने-समझने की ताकत एआई को आउटसोर्स किए बिना इसका इस्तेमाल कर सकें? यही अंतर तय कर सकता है कि एआई बच्चे का शॉर्टकट बनेगा या ट्यूटर। टीनएजर्स के शैक्षणिक अनुभवों को लेकर ओपनएआई का यह क्रिएशन ऐसे समय में आया है, जब अदालत में इंस्टाग्राम और फेसबुक की मालिक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं के मानसिक संकट में योगदान देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। अमेरिका के चार राज्य मेटा के खिलाफ मुकदमा कर रहे हैं और इसी सप्ताह मंगलवार को शुरू हुए ट्रायल में मेटा से 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक हर्जाने की मांग कर रहे हैं। स्वाभाविक तौर पर मेटा ने कोई भी गलत काम करने से इनकार किया है। जब से लॉ-मेकर्स और वकीलों ने यह साक्ष्य जुटाना शुरू किया है कि सोशल मीडिया फीचर्स आत्मघाती प्रवृत्ति और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान दे रहे हैं तो इन बड़ी कंपनियों ने टीनएजर्स के लिए सुरक्षित माहौल बनाने संबंधी कई बदलाव किए हैं। दिलचस्प यह है कि जब सिस्टम को पता चलता है कि कोई टीनएजर लंबे समय से एआई के साथ चैट कर रहा है तो यह उसे ब्रेक लेने की याद भी दिलाता है। अगर अकाउंट के साथ जुड़ी जन्मतिथि से यूजर के 13 से 17 साल का होने की जानकारी मिलती है तो उसका अनुभव अपने आप बदल जाएगा। लेकिन अगर टीनएजर गलत उम्र डालकर 18 साल से ज्यादा उम्र वाले यूजर का अनुभव हासिल करने की कोशिश करता है तो ओपनएआई ने अब एज-प्रिडिक्शन मॉडल का इस्तेमाल शुरू किया है। यह मॉडल करीब 2 हजार संकेतों पर आधारित है, जिनमें चैट के कंटेंट और समय शामिल हैं। फंडा यह है कि इंटरनेट के इस ‘वायर्ड वर्ल्ड’ में किशोरों को एआई से पूरी तरह दूर रखना मुश्किल होगा। लेकिन हम उन्हें होमवर्क पूरा करने के लिए विषय को समझे बिना एआई को शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल करने के प्रति हमेशा हतोत्साहित कर सकते हैं।
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