टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: बाजार आपकी रेपुटेशन टेस्ट करे, उससे पहले अपने बिजनेस का टेस्ट कर लें

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कोई बिजनेस सबसे बड़ी जो गलतियां कर सकता है, उनमें से एक यह मान लेना है कि जब वह ग्राहकों के लिए दरवाजे खोलेगा तो सब कुछ बिल्कुल सही-से काम करेगा। किसी प्रोडक्ट या सर्विस के लिए चाहे कितनी ही प्लानिंग की गई हो, लेकिन लॉन्चिंग से पहले उसे रीयल-लाइफ टेस्ट से गुजारने का कोई विकल्प नहीं हाेता। पुणे की एक हालिया खबर ने मेरा ध्यान खींचा, जिसमें बताया गया था कि हैलोवीन के लिए मर्डर मिस्ट्री पार्टियां आयोजित की जा रही हैं। हैलोवीन हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन लोग भूत, चुड़ैल, मॉन्स्टर्स और डरावने किरदारों की ड्रेस पहनते हैं। पारंपरिक रूप से यह इस धारणा में निहित है कि आत्माएं जीवित लोगों की दुनिया में लौट सकती हैं। लेकिन अब इसे कॉस्ट्यूम पार्टियों, ट्रिक-ऑर-ट्रीट और मजेदार डरावने खेलों के साथ मनाया जाता है। इसकी शुरुआत प्राचीन सेल्टिक फेस्टिवल ‘सम्हेन’ से हुई थी। कुछ लोग इसे सर्दियों की शुरुआत के तौर पर मनाते हैं। पुणे के डेक्कन इलाके में ‘नाइन लाइव्स कैट’ कैफे के मालिक अर्चित देवधर ने एआई की मदद से मर्डर मिस्ट्री गेम तैयार किया। लेकिन दो घंटे के इस अनुभव के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू करने से पहले उन्होंने लोगों के एक टेस्ट ग्रुप को बुलाया, जो पूरे खेल को आजमाए। उनके फीडबैक से अर्चित को समझने में मदद मिली कि क्या अच्छा काम कर रहा है और कहां इम्प्रूवमेंट चाहिए। उनकी चिंता सहज थी कि खेल पूरे समय लोगों को बांधे रखना चाहिए। वे नहीं चाहते थे कि पार्टिसिपेंट्स बीच खेल में बोर होने लगें। यह मैनेजमेंट का एक शानदार सबक है। कोई आइडिया कागज पर रोमांचक लग सकता है, लेकिन असल परीक्षा इसमें है कि ग्राहक उसे कैसे अनुभव करते हैं। कुछ टेस्ट-रन उन छिपी समस्याओं को उजागर कर सकता है, जो बिजनेस क्रिएटर्स को दिखाई नहीं देतीं, लेकिन ग्राहकों के आते ही मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। इससे मुझे 1994 का एक अनुभव याद आया, जब मुंबई एयरपोर्ट के पास ऑर्किड होटल शुरू करने की तैयारी कर रहे विट्ठल कामत ने मुझे और कुछ अन्य लोगों को पांच दिन तक वहां ठहरने के लिए बुलाया। उनका मकसद सिर्फ मेरी मेहमाननवाजी नहीं था, बल्कि बदले में वे चाहते थे कि हम स्टे के दौरान आई समस्याओं पर ईमानदारी भरा फीडबैक दें। चूंकि मैं हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऑपरेशंस को गहराई से समझता हूं, इसलिए वे चाहते थे कि मैं स्टाफ सर्विस और उनके द्वारा तैयार सुविधाओं का अनुभव करने के बाद अपना ओपिनियन बताऊं। वे चाहते थे कि होटल को पब्लिक के लिए खोले जाने से पहले मैं इसकी हर सुविधा यूज करूं और ईमानदारी से फीडबैक दूं। जरा सोचिए, यहां एक आंत्रप्रेन्योर होटल खोलने की तैयारी कर रहा है, फिर भी भुगतान करने वाले गेस्ट्स के आने से पहले किसी को होटल की कमियां देखने दे रहा था। यही सिद्धांत लगभग हर बिजनेस पर लागू होता है। अगर आप कोई शॉपिंग एप लॉन्च कर रहे हैं तो इससे अपरिचित लोगों से कहें कि वे ऑर्डर करें और फिर देखें कि उन्हें कहां दिक्कत आ रही है। अगर आप कोई नया प्रोडक्ट पेश कर रहे हैं तो उसे दुकानों में रखने से पहले संभावित ग्राहकों को इस्तेमाल करने का मौका दें। दिलचस्प यह है कि टेस्टिंग सिर्फ गलतियां पहचानने के लिए नहीं होती। इसका मकसद ग्राहकों को खुश करने के मौके ढूंढना भी है। कोई मेहमान ब्रेकफास्ट सर्विस में मामूली बदलाव का सुझाव दे सकता है। कोई रेस्टोरेंट-विजिटर बेहतर सीटिंग अरेंजमेंट बता सकता है। या फिर, कोई गेम पार्टिसिपेंट ऐसा ट्विस्ट सुझा सकता है, जो पूरे अनुभव को और रोमांचक बना दे। सफल लॉन्च वही नहीं होता, जो समय पर हो जाए। बल्कि यह तब होता है, जब बिजनेस ने यह सुनिश्चित करने की पर्याप्त तैयारी कर ली हो कि ग्राहकों को वही मिले, जिसका उनसे वादा किया गया था। आंत्रप्रेन्योर अकसर कुछ नया बनाने में काफी समय और पैसा लगाते हैं। लेकिन कई बार वे अपने आइडिया से इतने इमोशनली-अटैच्ड हो जाते हैं कि उन्हें दिखाई नहीं देता कि क्या काम नहीं कर रहा है। खासकर, संभावित ग्राहकों को रिप्रेजेन्ट करने वाला कोई आउटसाइडर ऐसा नजरिया बता सकता है, जो बनाने वाला मिस कर गया हो। फंडा यह है कि याद रखें, रिहर्सल आपकी गलतियां सामने ला सकती हैं, लेकिन पब्लिक लॉन्च से वही गलतियां दुनिया के सामने उजागर हो सकती हैं। आपको भुगतान करने वाले ग्राहकों को कभी भी अपना पहला टेस्टर न बनने दें।



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