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- N. Raghuraman’s Column: Are Our Children Grappling With ‘Tech Neck’ Or ‘Cosmeticorexia’?
1 घंटे पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
कई वर्षों पहले पत्नी ने मेरी बेटी से कहा कि ‘तुम अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी लग रही हो।’ बस, इस पर तो मेरे घर में तूफान आ गया। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि बेटी देर रात तक जागती थी, भारी वर्कआउट कर रही थी और थकी दिख रही थी।
लेकिन आप जानते हैं कि युवा पीढ़ी पैरेंट्स की बात को कैसे लेती है। फिर अगले कुछ महीने वो मेरे पास आकर पूछती रही कि ‘क्या मैं ठीक लग रही हूं?’ और मैंने उसकी ड्रेसिंग टेबल में कई नए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स भी देखे।
मैं चुपचाप उनके पैसे देता रहा, क्योंकि कम से कम सुंदरता को लेकर तो इससे घर में शांति रहती थी। मुझे पता नहीं था कि इसे ‘कॉस्मेटिकोरिक्सिया’ (Cosmeticorexia) कहते हैं।
इसका अर्थ मैं शनिवार को जान पाया, जब मुझे पता चला कि इटली की अथॉरिटी फ्रेंच लक्जरी ग्रुप ‘एनवीएमएच’ के स्वामित्व वाले एक ब्यूटी रिटेलर और मेकअप ब्रांड इसे लेकर जांच कर रही है कि उसकी मार्केटिंग ने ‘कॉस्मेटिकोरिक्सिया’ को बढ़ावा दिया। यह युवतियों में स्किन केयर को लेकर एक प्रकार का बुरा जुनून है।
‘द इटालियन कॉम्पिटिशन एंड मार्केट अथॉरिटी’ ने कहा कि ‘ये मार्केटिंग कैंपेन सोशल मीडिया के जरिए चलाए गए। इससे युवतियां विवश होकर ये प्रोडक्ट्स खरीदने लगीं।’ ऐसा व्यवहार ‘कॉस्मेटिकोरिक्सिया’ कहलाता है।
अथॉरिटी के अनुसार कंपनियों ने कथित कपटपूर्ण मार्केटिंग स्ट्रेटजी अपनाई। इसमें कम उम्र के माइक्रो इन्फ्लुएंसर्स शामिल किए गए, जो खासकर संवेदनशील युवाओं को कॉस्मेटिक्स खरीदने को विवश कर सकते हैं।
नियामक संस्था का आरोप है कि कंपनी ने चेतावनी नहीं दी कि ये प्रोडक्ट्स ‘बच्चों और किशोरों’ के लिए नहीं हैं, बल्कि गुप्त मार्केटिंग स्ट्रेटजी के जरिए खरीद को बढ़ावा दिया। इधर, कंपनी ने कहा कि वह पूरी तरह से अथॉरिटीज का सहयोग करेगी।
जब मैंने यह बात आईटी क्षेत्र में बड़े पद पर कार्यरत अपने कजिन को बताई तो उन्होंने भी ऐसा ही किस्सा बताया। उनकी पत्नी ने 24 साल की ब्यूटी इन्फ्लुएंसर बेटी से कह दिया कि ‘तुम्हारी गर्दन पर मुझसे ज्यादा झुर्रियां हैं।’
चूंकि गर्दन किसी की उम्र बताने का ‘बेहद पुख्ता संकेत’ होती है तो उनके घर में हंगामा हो गया। उन्हें बेटी को यह समझाने में छह महीने लगे कि इसका उसकी खूबसूरती से कोई लेना-देना नहीं, बल्कि असली दोषी तो टेक्नोलॉजी है। हम मानते हैं कि टेक्नोलॉजी एंग्जायटी बढ़ाने, अटेंशन कम करने और सामाजिक अलगाव के लिए ही जिम्मेदार है।
लेकिन कजिन ने बताया कि यह गर्दन की झुर्रियों के लिए भी जिम्मेदार है और इसे ‘टेक नेक’ कहते हैं। यहीं से मेरी खोज शुरू हुई। उम्र बढ़ने के साथ गर्दन पर कुछ आड़ी रेखाएं बनना सामान्य है, लेकिन लगातार स्मार्टफोन के इस्तेमाल से ये और अधिक होती हैं। इसीलिए इसे ‘टेक नेक’ कहा जाता है।
इसमें जेनेटिक्स और नेचुरल एजिंग की भूमिका तो है, लेकिन मेडिकल प्रोफेशनल्स कहते हैं कि लगातार फोन का इस्तेमाल समस्या को बढ़ा सकता है। कैलिफोर्निया के कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट कहते हैं कि ‘ कई लोग घंटों तक फोन पर रहते हैं और लगातार कम्प्यूटर पर नीचे देखते रहते हैं तो गर्दन की कुछ स्थायी लाइनें ज्यादा खराब हो जाती हैं।
इन निष्कर्षों ने मुझे मध्यप्रदेश की हर्बल कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी ‘देविकाज’ की निदेशक बिंदिया खेर्ब के साथ हुई बातचीत याद दिला दी। उन्होंने बताया कि उनके सोशल मीडिया पेज के करीब एक-तिहाई फॉलोअर्स 23 साल से कम उम्र के किशोर युवा हैं। लेकिन वे गंभीर खरीदार नहीं हैं।
जब मैं उन्हें बता रहा था कि उनका आकलन गलत है तो एक वरिष्ठ प्रोफेसर बीच में कूद पड़े। उन्होंने बताया कि पिछले ही हफ्ते विशाखापट्टनम में पढ़ रहे उनके 17 साल के बेटे ने खेर्ब की कंपनी का प्रोडक्ट खरीदा। तभी उन्हें पता चला कि यह भोपाल की कंपनी है।
फंडा यह है कि अगर आपके बच्चे बहुत ज्यादा कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं या आईने के सामने ज्यादा समय बिता रहे हैं तो चेक कीजिए कि कहीं वे ‘टेक नेक’ या ‘कॉस्मेटिकोरिक्सिया’ से तो नहीं जूझ रहे।









