कक्षा 1 के बच्‍चे को 3 टीचर्स ने मिलकर पीटा:  कान का पर्दा फाड़ा, टॉयलेट ले जाकर पैंट में बिच्‍छू डाला; हिमाचल के सरकारी स्‍कूल में दरिंगदी
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कक्षा 1 के बच्‍चे को 3 टीचर्स ने मिलकर पीटा: कान का पर्दा फाड़ा, टॉयलेट ले जाकर पैंट में बिच्‍छू डाला; हिमाचल के सरकारी स्‍कूल में दरिंगदी

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14 घंटे पहले

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हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक सरकारी स्‍कूल के 3 टीचर्स ने मिलकर कक्षा 1 के बच्‍चे को जमकर पीटा। इतना ही नहीं, उसकी पैंट में बिच्‍छू तक डाल दिया। पीटने वाले टीचर्स में स्‍कूल का हेडमास्‍टर भी शामिल है।

छात्र दलित समुदाय से है और शिमला के रोहरू सब डिवीजन के गवर्नमेंट प्राइमरी स्‍कूल का स्‍टूडेंट है। बच्‍चे के पिता ने कहा कि हेडमास्‍टर देवेंद्र के साथ-साथ टीचर बाबूराम और कृतिका ठाकुर लगभग 1 साल से बच्‍चे के साथ मारपीट कर रहे थे।

शिकायत के अनुसार, लगातार पिटाई से बच्‍चे के कान से खून बहने लगा और कान के पर्दे में भी चोट आईं। इसके बाद टीचर उसे टॉयलेट में ले गए और उसकी पैंट में बिच्‍छू तक डाल दिया।

छात्र को जला डालने की भी धमकी दी- पिता की शिकायत

छात्र के पिता ने बताया कि टीचर्स ने बच्‍चे को धमकाया भी था कि किसी से शिकायत न करे। टीचर पिछले 1 साल से बच्‍चे के साथ पीट रहे हैं। पिछले सप्‍ताह हेडमास्‍टर ने उसे स्‍कूल से निकालने की धमकी दी थी और कहा था कि किसी से शिकायत करने पर परिवार को खामियाजा भुगतना होगा। हेडमास्‍टर ने बच्‍चे को जला डालने की भी धमकी दी।

हेडमास्‍टर ने बच्‍चे के पिता को भी पुलिस के पास न जाने के लिए धमकाया था। बच्‍चे के पिता ने टीचर कृतिका ठाकुर के पति नीतीश ठाकुर के खिलाफ भी शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि नीतीश पिछले 1 साल से अपनी पत्‍नी की जगह स्‍कूल में पढ़ा रहे हैं।

दलितों से भेदभाव के भी आरोप

शिकायत में सभी टीचर्स पर दलितों से भेदभाव के भी आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि स्‍कूल में दलित समुदाय से आने वाले और नेपाली बच्‍चों को राजपूत बच्‍चों से अलग बैठाया जाता है।

BNS की धाराओं में केस दर्ज

शिकायत के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127(2) गलत तरीके से बंधक बनाना, 115(2) जानबूझकर चोट पहुंचाना, 351(2) आपराधिक धमकी देना और 3(5) साझे इरादे से किया गया आपराधिक कृत्य, के तहत मामला दर्ज किया है।

इसके अलावा, बाल न्याय अधिनियम के तहत बच्चे के प्रति क्रूरता के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया है। शिक्षकों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की उन धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए हैं, जो कपड़े जबरन उतरवाने या मानव गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों और SC/ST समुदाय के खिलाफ अपराधों से संबंधित हैं।

रोहरू में पहले भी स्‍कूली बच्‍चों से मारपीट के मामले

यह रोहरू में शिक्षकों द्वारा छात्रों के साथ मारपीट या जातिगत भेदभाव का पहला मामला नहीं है। पिछले सप्ताह रोहरू के गवाना क्षेत्र स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में एक शिक्षिका ने छात्र को नंगा करके कांटेदार झाड़ी से पीटा था। वीडियो वायरल होने के बाद टीचर को निलंबित कर दिया गया था।

इससे पहले रोहरू के लिमड़ा गांव में एक 12 साल के दलित बच्‍चे ने आत्महत्या कर ली थी। आरोप है कि कुछ ऊंची जाति की महिलाओं ने उसे अपने घर में घुसने पर सजा के तौर पर गोशाला में बंद कर दिया था।

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