करवा चौथ 10 अक्टूबर को:  चतुर्थी और शुक्रवार के योग में करें भगवान गणेश, चौथ माता, महालक्ष्मी और शुक्र ग्रह की पूजा
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

करवा चौथ 10 अक्टूबर को: चतुर्थी और शुक्रवार के योग में करें भगवान गणेश, चौथ माता, महालक्ष्मी और शुक्र ग्रह की पूजा

Spread the love


9 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ (10 अक्टूबर) का व्रत किया जाता है, ये व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए महाव्रत की तरह है, क्योंकि मान्यता है कि जो महिला ये व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य मिलता है। इस बार ये तिथि शुक्रवार को पड़ रही है, इस कारण इस दिन भगवान गणेश, चौथ माता, महालक्ष्मी के साथ ही शुक्र ग्रह की पूजा का शुभ योग बन रहा है। जिन लोगों की कुंडली में शुक्र ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें शुक्रवार को दूध का दान करना चाहिए। जानिए शुक्रवार और चतुर्थी के योग में कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं…

चतुर्थी पर 5 स्टेप्स में करें गणेश पूजा

  • चतुर्थी तिथि पर स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
  • गणेश जी को स्नान कराएं। इसके बाद को जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं।
  • वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं। फूलों से श्रृंगार करें। गणेश मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं।
  • भगवान को लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर जलाएं। धूप-दीप से आरती करें। पूजा के बाद भगवान से क्षमा याचना करें।
  • अंत में प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।
  • गणेश पूजन में भगवान के 12 नाम वाले मंत्रों का जप करेंगे तो पूजा जल्दी सफल हो सकती है। ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।

ऐसे करें महालक्ष्मी का पूजन

महालक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा एक साथ करनी चाहिए। विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा का अभिषेक करें। वस्त्र अर्पित करें, हार-फूल से श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में विष्णु जी के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप कर सकते हैं।

शिवलिंग रूप में की जाती है शुक्र ग्रह की पूजा

शुक्र ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। शुक्रवार और चतुर्थी के योग में शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और सफेद फूलों से श्रृंगार करें। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल भी चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

ऐसे कर सकते हैं करवा चौथ व्रत

करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए महाव्रत है। इस व्रत के शुभ फल से अखंड सौभाग्य मिलता है, ऐसी मान्यता है। व्रत करने वाली महिलाओं के घर में सुख-शांति और प्रेम बना रहता है, जीवन साथी स्वस्थ रहता है। ये व्रत निर्जला है यानी इस व्रत में महिलाएं पानी भी नहीं पीती हैं।

करवा चौथ में चंद्र दर्शन का महत्व काफी अधिक है। ये व्रत शाम को चंद्र दर्शन और पूजन के बाद ही पूरा होता है। इस व्रत में महिलाएं सुबह जल्दी जागती हैं और स्नान के बाद सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत शुरू करती हैं। इसके बाद पूरे दिन निर्जल रहती हैं और शाम को गणेश जी, करवा चौथ माता, चंद्र पूजा के बाद व्रत पूरा होता है।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *