ल्यूसिड ड्रीमिंग; सपनों के संसार का ‘पावर सेंटर’:  एक्सपर्ट का मत, स्मार्टफोन ने जो एकाग्रता छीनी, ल्यूसिड ड्रीमिंग उसे वापस लौटा सकती है
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ल्यूसिड ड्रीमिंग; सपनों के संसार का ‘पावर सेंटर’: एक्सपर्ट का मत, स्मार्टफोन ने जो एकाग्रता छीनी, ल्यूसिड ड्रीमिंग उसे वापस लौटा सकती है

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कल्पना कीजिए कि आप गहरी नींद में हैं, लेकिन अचानक आपको अहसास होता है कि आप सपना देख रहे हैं। अब आप सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि उस सपने के ‘निर्देशक’ बन चुके हैं। आप मर्जी से बादलों के ऊपर उड़ सकते हैं, महान कलाकार माइकल एंजेलो के साथ डिनर कर सकते हैं या ग्रैंड कैनियन की वादियों की सैर कर सकते हैं। इसे विज्ञान की भाषा में ‘ल्यूसिड ड्रीमिंग’ कहते हैं… यानी वह अवस्था जहां आप अपने सपने के भीतर जागृत होते हैं। ‘द ग्रीफ क्योर – लुकिंग फॉर द एंड ऑफ लॉस’ किताब के लेखक कोडी डेलिस्ट्रेटि कहते हैं,‘आमतौर पर सपने हमारे साथ ‘घटते’ हैं; कोई हमारा पीछा कर रहा होता है या हम कहीं गिर रहे होते हैं और हमारा उस पर कोई वश नहीं होता। पर ल्यूसिड ड्रीमिंग में सपने की कमान आपके हाथ में होती है। शोध बताते हैं कि दुनिया में 50% लोग जीवन में सिर्फ एक बार ऐसा अनुभव कर पाते हैं, जबकि हर 10 में से एक व्यक्ति महीने में एक या उससे अधिक बार इस अवस्था का आनंद ले पाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ल्यूसिड ड्रीम नींद के रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम) चक्र के दौरान आते हैं, जब आत्म-जागरूकता के लिए जिम्मेदार ‘प्रिफ्रंटल कॉर्टेक्स’ सक्रिय हो जाता है। स्टडी बताती हैं कि इस अवस्था में मस्तिष्क के वे हिस्से भी काम करते हैं जो सामान्य नींद में शांत रहते हैं। यह अनूठी प्रक्रिया ‘मेटाकॉग्निशन’ (स्व-जागरूकता) को बढ़ाती है, जिससे व्यक्ति सोते हुए भी अपनी सोच और सपनों को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता हासिल कर लेता है।
सफलता का नया आयाम ल्यूसिड ड्रीमिंग सिर्फ मनोरंजन नहीं है। स्टडीज से पता चला है कि बास्केटबॉल खिलाड़ी सपने में फ्री-थ्रो का अभ्यास कर अपने असली खेल में सुधार कर सकते हैं। दरअसल यह आपके अवचेतन मन की वह प्रयोगशाला है जहां आप असंभव को संभव बना सकते हैं। डेलिस्ट्रैटी कहते हैं, ‘ल्यूसिड ड्रीमिंग हमें सिखाती है कि हमारी असल दुनिया भी किसी अजीबोगरीब सपने से कम रोमांचक नहीं है।’ यह पावर सेंटर जैसा, वास्तविकता देखने का नजरिया बदल जाता है स्मार्टफोन व सोशल मीडिया हमें वास्तविकता से काटकर मानसिक रूप से खंडित कर रहे हैं, जबकि ‘ल्यूसिड ड्रीमिंग’ हमें खुद की गहराइयों से जोड़ती है। डेलिस्ट्रैटी कहते हैं, ‘यह उन लोगों के लिए ‘पावर सेंटर’ है जो उबाऊ दिनचर्या में फंसा महसूस करते हैं। सपनों को नियंत्रित करने की यह कला ‘रियलिटी चेक’ से सीख सकते हैं। दिनभर खुद से सवाल करें- क्या मैं सपना देख रहा हूं?’ व हाथों या लिखे हुए शब्दों को गौर से देखने जैसे टेस्ट करें। जागते हुए सजग रहने का अभ्यास करेंगे, तो सोते वक्त भी मस्तिष्क जागरूक हो जाएगा। ल्यूसिड ड्रीमिंग मानसिक सुकून देने के साथ वास्तविकता को देखने का नजरिया भी बदल देती है।’



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