सेलिब्रिटी-इंफ्लुएंसर्स के दबाव में बेवजह जांचें करा रहे लोग:  जरूरत से ज्यादा ध्यान भी बिगाड़ रहा है सेहत, इससे बढ़ा तनाव
अअनुबंधित

सेलिब्रिटी-इंफ्लुएंसर्स के दबाव में बेवजह जांचें करा रहे लोग: जरूरत से ज्यादा ध्यान भी बिगाड़ रहा है सेहत, इससे बढ़ा तनाव

Spread the love




लॉस एंजेलिस की एक आलीशान लैब में स्क्रीनिंग करवाने पहुंचे एलेक्स बेहद खुश थे। सोशल मीडिया हस्तियों की देखा-देखी उन्होंने लाखों खर्च कर ‘फुल-बॉडी एमआरआई’ कराया। इसे वे सेहत के प्रति जागरूक कदम मान रहे थे। पर रिपोर्ट में फेफड़ों के पास छोटा ‘नोड्यूल’ व किडनी में मामूली ‘सिस्ट’ देखकर वे हिल गए। एलेक्स खुद को गंभीर बीमार मानने लगे। तीन महीने डॉक्टरों के चक्कर, महंगे टेस्ट और तनाव में बीते। आखिर में पता चला कि वे गांठें बेअसर थीं, जो उम्र के साथ बनती हैं। मेडिकल साइंस में इसे ओवर-स्क्रीनिंग कहा जाता है- यानी जरूरत से ज्यादा जांच और अनजाने में मिली बेअसर विकृतियां। स्क्रीनिंग का मकसद शुरुआती स्टेज में बीमारी पकड़कर इलाज करना है। जैसे-शुगर या बीपी की जांच। ये बीमारियां बिना लक्षण के दिल, आंखों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिन्हें समय पर पकड़कर सस्ती दवाओं और लाइफस्टाइल बदलकर रोका जा सकता है। पर आजकल टेस्टिंग कंपनियां और टेक-इन्फ्लुएंसर्स इन महंगे टेस्ट को बढ़ावा देने में जुटे हैं। वियरेबल का जुनून भी बढ़ा रहा है दिक्कतें आजकल स्मार्टवॉच और वियरेबल डिवाइस दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। डॉक्टर्स के अनुसार इनमें से कुछ ही पैमाने चिकित्सा की दृष्टि से अहम होते हैं। समस्या यह है कि लोग बार-बार हेल्थ डेटा देखने लगते हैं, जिससे चिंता और तनाव बढ़ सकता है। नींद की गुणवत्ता पर नजर रखने वाले उपकरण कई बार इतनी चिंता पैदा कर देते हैं कि नींद और खराब हो जाती है। विशेषज्ञों ने नई समस्या पहचानी है ऑर्थोसोमनिया। स्लीप ट्रैकर के डेटा के आधार पर ‘परफेक्ट नींद’ पाने की जुनूनी कोशिश, जो नींद और मानसिक शांति बिगाड़ देती है। हालिया स्टडी में लगभग 30% लोग इसके खतरे में पाए गए



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *