बच्चों के सपने बदल रहे:  वैज्ञानिक नहीं, इन्फ्लुएंसर बनना चाहते हैं 60% बच्चे; अमेरिका-नॉर्वे में सर्वे
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बच्चों के सपने बदल रहे: वैज्ञानिक नहीं, इन्फ्लुएंसर बनना चाहते हैं 60% बच्चे; अमेरिका-नॉर्वे में सर्वे

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एक समय था जब बच्चों से पूछा जाता था कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं, तो जवाब मिलता था-डॉक्टर, वैज्ञानिक, पायलट या अंतरिक्ष यात्री। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। नए शोध बताते हैं कि सोशल मीडिया ने बच्चों की करियर संबंधी कल्पनाओं को गहराई से प्रभावित किया है और बड़ी संख्या में बच्चे अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने का सपना देख रहे हैं। इनमें सात साल की उम्र के बच्चे भी शामिल हैं। अमेरिका और नॉर्वे में हुए एक अध्ययन में शामिल 60 फीसदी से अधिक मिडिल और हाई स्कूल छात्रों ने या तो टिकटॉकर, यू-ट्यूबर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने की इच्छा जताई। प्रत्येक परीक्षण में, बच्चों को सरल संकेत दिए गए, जैसे कि ‘जब मैं बड़ा होऊंगा तो मैं यह बनना चाहूंगा या चाहूंगी’, और उनसे पूछा गया कि वे उस पेशे के बारे में कैसे जानते हैं। अधिकतर बच्चों ने अपने भविष्य के करिअर का चुनाव सोशल मीडिया पर देखी गई चीजों के आधार पर किया। यह बदलाव 2018 की स्थिति से बिल्कुल अलग है। उस समय 20,000 बच्चों पर हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर जैसे पारंपरिक पेशे बच्चों की पहली पसंद थे। भारत में भी बढ़ा सोशल मीडिया का प्रभाव भारत भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। कुछ दिनों पहले के एक सर्वे के अनुसार, 37% भारतीय जेन-अल्फा (2010 से 2024 के बीच जन्मे) बच्चे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनना चाहते हैं। पिछले साल देश में बाल (16 वर्ष से कम आयु के) सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की संख्या सालाना आधार पर 41% बढ़कर 83,212 हो गई। इनमें मुख्य रूप से युवा लड़कियां शामिल हैं। स्मार्टफोन और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म की बढ़ती पहुंच ने बच्चों के रोल मॉडल बदल दिए हैं। अब वे वैज्ञानिकों, शिक्षकों या खिलाड़ियों से अधिक यूट्यूबर्स, इंस्टाग्राम क्रिएटर्स और गेमिंग स्ट्रीमर्स को फॉलो करते हैं।



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