क्या हाई ब्लड प्रेशर लिवर के लिए बन सकता है खतरा? BP और Fatty Liver के बीच क्या है कनेक्शन, जानिए
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क्या हाई ब्लड प्रेशर लिवर के लिए बन सकता है खतरा? BP और Fatty Liver के बीच क्या है कनेक्शन, जानिए

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर दोनों ही तेजी से उभरती बीमारियां हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रही हैं। दोनों में मोटापा, इंसुलिन प्रतिरोध, शारीरिक निष्क्रियता और अनहेल्दी आहार जैसे प्रमुख जोखिम कारक समान हैं। गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (NAFLD) दुनिया की लगभग 25-33% आबादी को प्रभावित कर रहा है। फैटी अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस और लिवर फेलियर का कारण बन सकता है। जब बात हाई ब्लड प्रेशर की होती है, तो ज्यादातर लोग इसे केवल दिल की बीमारी या स्ट्रोक के खतरे से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाई बीपी आपके लिवर के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है?

मेडिकल रिसर्च और एक्सपर्ट्स के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर के बीच गहरा संबंध पाया गया है। यह संबंध इतना मजबूत है कि यदि समय रहते बीपी को कंट्रोल न किया जाए, तो यह लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है। हेपेटोलॉजिस्ट, लिवर ट्रांसप्लांट फिजिशियन और रूबी हॉल क्लिनिक, पुणे के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉ. पवन हंचनाले के अनुसार, हाई बीपी और फैटी लिवर दोनों का संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस से है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो ब्लड में शुगर और फैट का लेवल बढ़ जाता है। इससे लिवर में फैट जमा होने लगता है और साथ ही बीपी भी हाई होने लगता है।

ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर के बीच कनेक्शन

फैटी लिवर और हाई ब्लड प्रेशर के बीच एक मजबूत संबंध है। फैटी लिवर, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भी कहा जाता है। लिवर में वसा जमा हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, जिसे हाइपरटेंशन भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव बहुत अधिक होता है। यह दोनों स्थितियां एक दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं और हार्ट रोगों के खतरे को बढ़ा सकती हैं। फैटी लिवर, हाई बीपी, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल, ये सभी मेटाबॉलिक सिंड्रोम का हिस्सा होते हैं। जब शरीर में एक गड़बड़ी होती है, तो बाकी पर भी असर पड़ता है।

लिवर की ब्लड सप्लाई पर असर

दरअसल, हाई ब्लड प्रेशर से लिवर को खून पहुंचाने वाली रक्त नलिकाओं पर दबाव बढ़ता है। इससे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और धीरे-धीरे फाइब्रोसिस या सिरोसिस जैसी स्थिति बन सकती है।

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