- Hindi News
- National
- PM Modi Vs Mallikarjun Kharge; Lok Sabha Deputy Speaker | Vice President Election
नई दिल्ली11 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को PM मोदी को लेटर लिखा है। इसमें लोकसभा के डिप्टी स्पीकर (उपाध्यक्ष) के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
खड़गे ने लेटर में लिखा-
स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार यह पद लगातार दो लोकसभा कार्यकालों के लिए खाली रहा है। 17वीं लोकसभा के दौरान कोई उपाध्यक्ष नहीं चुना गया था। यह चिंताजनक मिसाल मौजूदा 18 लोकसभा में भी जारी है। यह भारत की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है और संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

देश में अबतक 14 डिप्टी स्पीकर रह चुके हैं। इतिहास रहा है कि डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को दिया जाए। जिससे संसद में संतुलन और निष्पक्षता बनी रहे। हालांकि यह कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है।
16वीं लोकसभा (2014) में NDA में शामिल रहे अन्नाद्रमुक के थंबीदुरई को यह पद दिया गया था। जबकि 17वीं लोकसभा (2019) में किसी को भी डिप्टी स्पीकर नहीं बनाया गया था। 18वीं लोकसभा (2024) में भी किसी को डिप्टी स्पीकर नहीं बनाया गया है।

16वीं लोकसभा (2014) में NDA में शामिल रहे अन्नाद्रमुक के थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था।
खड़गे ने लिखा- बिना देरी के डिप्टी स्पीकर के चुनाव कराए जाएं
खड़गे ने लिखा- मैं लोकसभा में उपाध्यक्ष के पद के खाली होने के संबंध में मौजूदा अत्यंत चिंताजनक मामले की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए लिख रहा हूं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों के चुनाव का प्रावधान है। संवैधानिक रूप से उपाध्यक्ष, अध्यक्ष के बाद सदन का दूसरा सबसे बड़ा पीठासीन अधिकारी होता है।
उन्होंने लिखा कि पहले की बातों को ध्यान में रखते हुए और सदन की सम्मानित परंपराओं और हमारी संसद के लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए मैं आपसे बिना किसी देरी के लोकसभा के उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया आरंभ करने का अनुरोध करता हूं।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 93 क्या है
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 93 लोकसभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के चुनाव से संबंधित है। इसके मुताबिक, लोकसभा के सदस्य दो सदस्यों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के तौर पर चुनेंगे। अगर इन दोनों में से कोई भी पद रिक्त (जैसे, इस्तीफा, निधन, या हटाने के कारण) होता है तो सदन उसका जल्द से जल्द फिर चुनाव करेगा।
अनुच्छेद में ‘जितनी जल्दी हो सके’ बात कही गई है, लेकिन कोई तय समय सीमा नहीं दी गई है। जिसके कारण डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति में देरी को लेकर विवाद है, जैसा कि 17वीं और 18वीं लोकसभा में देखा गया है।
डिप्टी स्पीकर का काम क्या होता है…
- सदन की अध्यक्षता: जब स्पीकर गैरमौजूद होता है, डिप्टी स्पीकर लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है। वह कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने, व्यवस्था बनाए रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।
- वोटिंग और निर्णय: डिप्टी स्पीकर मतदान प्रक्रिया की निगरानी करता है और यदि वोट बराबर होने पर निर्णायक वोट (कास्टिंग वोट) दे सकता है।
- सदन की व्यवस्था: वह सदन में अनुशासन बनाए रखता है, सदस्यों के बीच विवादों को सुलझाता हैऔर नियमों का उल्लंघन करने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
- कमेटी में भूमिका: डिप्टी स्पीकर अक्सर संसदीय समितियों में शामिल होता है और कुछ समितियों का नेतृत्व भी कर सकता है।
- स्पीकर के कर्तव्यों का निर्वहन: यदि स्पीकर का पद खाली हो जाता है, तो डिप्टी स्पीकर तब तक स्पीकर के कर्तव्यों का पालन करता है, जब तक नया स्पीकर नियुक्त नहीं हो जाता।
- सदस्यों के साथ समन्वय: वह लोकसभा सदस्यों के सुझावों और शिकायतों को सुनता है और कार्यवाही को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने में मदद करता है।
…………………….
राजनीति से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
जयराम बोले- शाह का कश्मीर-मणिपुर में शांति का दावा निराधार: ये सरकार की बड़ी विफलताओं से ध्यान भटकाना

कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में शांति स्थापित करने के दावे को विचित्र बताया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा- शाह के जम्मू-कश्मीर-मणिपुर में शांति को लेकर किए गए दावे बेतुके और निराधार हैं। ये दावे वास्तव में उनकी अपनी बड़ी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए किए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…








