खाने के साथ सलाद तैयार करते समय खीरे और मूली की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। कभी भी सलाद में टेढ़े खीरे को न शामिल करें। अगर इसमें मूली मिला रहे हैं तो पहले तीखेपन को जांच लें। टेढ़ा खीरा और मीठी मूली स्वास्थ्यवर्धक के लिए फायदेमंद नहीं हैं। सीएसए के अध्ययन में पाया गया कि टेढ़ा खीरा संक्रमित होता है। वहीं मीठी मूली में उसका मुख्य औषधीय गुण जो भूख बढ़ाने के लिए काम करता है वह नहीं होता।
अध्ययन में पाया गया कि खीरे में टेढ़ापन मुख्य रूप से फल मक्खी के कारण होता है, जो खीरे का रस चूसकर वहां संक्रमण फैलाती है। इससे खीरे की कोशिकाओं में खराबी आ जाती है और फल सिकुड़कर विकृत हो जाता है। इसके साथ ही पौष्टिकता और कड़वाहट भी प्रभावित होती है। सीएसए के पादप रोग एवं कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश श्रीवास्तव के अनुसार खीरे में कड़वाहट एल्कोलाइड के कारण होती है जो पाचन में मदद करते हैं।








