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अक्सर सिखाया जाता है कि ‘कोई एक थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो।’ लेकिन आधुनिक मनोविज्ञान अब इससे अलग ही संकेत दे रहा है। क्या आपने कभी किसी बदमाश को करारा जवाब देने के बाद मन में सुकून महसूस किया है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नए शोध से पता चलता है कि अगर कोई आपके सम्मान को ठेस पहुंचाए या अपमान करे, तो उसका उसी की भाषा में जवाब देने को समाज नैतिक, न्यायसंगत और उचित मानता है। मानसिक सेहत भी ठीक रहती है। संभवत: ‘ईंट का जवाब पत्थर’ मुहावरा इसी दृष्टिकोण से बना है। कार्नेल यूनिवर्सिटी में सामाजिक व्यवहार’ के प्रोफेसर और शोध के मुख्य लेखक मेरिक ओसबोर्न ने करीब 850 प्रतिभागियों पर पांच अलग-अलग प्रयोग किए। इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि जब बातचीत में पहले से ही ‘गलत बर्ताव’ मौजूद हो, तो लोग उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। इसमें तीन प्रमुख बातें सामने आई- मान्य है ‘जैसे को तैसा’ – कोई पहले अमर्यादित व्यवहार करता है, तो जवाब देना जरूरी व नैतिक माना गया। सामाजिक सुरक्षा – पलटकर जवाब देने को सामाजिक नियमों की रक्षा करना माना जाता है। दिमागी वायरिंग – दिमाग अपमान को खतरे के रूप में देखता है और रक्षात्मक जवाब देने के लिए बना है। प्रो. ओसबोर्न कहते हैं, ‘लोग उस गलत बर्ताव को ज्यादा पसंद करते हैं, जो किसी के गलत बर्ताव के जवाब में किया जाता है, भले ही इसका स्तर एक समान हो। यानी प्रतिक्रिया के रूप में किए गए गलत व्यवहार को समाज सही मानता है। यह सामने वाले को ये बताने का तरीका है कि उसने गलत किया है।’ ‘शालीन व्यवहार’ की सामाजिक वैल्यू अभी भी सबसे ज्यादा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑफिस, ऑनलाइन और निजी रिश्तों में भी दिमाग इसी पैटर्न पर काम कर सकता है। हालांकि ‘शालीन व्यवहार’ की सामाजिक वैल्यू अभी भी सबसे ज्यादा है। उचित समय पर कड़ा जवाब देने से तनाव भी कम होता है लॉस एंजिलिस काउंटी म्यूजियम ऑफ आर्ट के एक अध्ययन में पाया गया कि किसी गलत बर्ताव का सामना सफलतापूर्वक करने से भावनात्मक लचीलापन और आत्मविश्वास बढ़ता है। मानसिक स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए शोध में पाया गया कि असभ्य लोगों से निपटने की कला सीखने से पेशेवर विकास होता है और भविष्य के तनाव कम होते हैं। न्यूजवीक की 2026 की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि बदले की भावना से नहीं, बल्कि हद तय करने वाला रूखा जवाब ही सामाजिक रूप से प्रशंसनीय है। मनोवैज्ञानिक चेताते हैं कि रूखा जवाब देने में सतर्कता जरूरी है।
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