जरूरत की खबर- क्या शराब पीने से ठंड नहीं लगती:  जानें मिथ और सच्चाई, डॉक्टर से जानें सर्दियों के मौसम में शराब पीने के जोखिम
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जरूरत की खबर- क्या शराब पीने से ठंड नहीं लगती: जानें मिथ और सच्चाई, डॉक्टर से जानें सर्दियों के मौसम में शराब पीने के जोखिम

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13 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सर्दियों में अक्सर लोग कहते हैं कि ‘थोड़ी-सी ड्रिंक ले लो, ठंड भाग जाएगी।’ लेकिन क्या वाकई शराब ठंड से बचाती है या ये सिर्फ एक भ्रम है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शराब पीने के बाद जो गर्मी महसूस होती है, वह सिर्फ एक अस्थायी फीलिंग है। असल में शरीर का तापमान घट रहा होता है। यानी शराब ठंड से बचाती नहीं बल्कि शरीर को ठंड के प्रति और संवेदनशील बनाती है।

गंभीर मामलों में ये हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान अचानक ज्यादा गिरना) जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है। भारत में जहां सर्दियों में तापमान 5-10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, खासकर उत्तर भारत के राज्यों में, यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम इस मिथ के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • ठंडे मौसम में अल्कोहल के हेल्थ रिस्क क्या हैं?
  • अल्कोहल हमारे शरीर पर कैसे असर डालता है?

एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- सर्दियों में ‘शराब पीने से ठंड कम लगती है’ ये मिथ है या सच्चाई?

जवाब- अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. रोहित शर्मा बताते हैं कि यह मिथ सदियों पुराना है। शराब शरीर में जाने के बाद ब्लड वेसल्स को फैलाती है। इससे ब्लड स्किन की सतह तक पहुंच जाता है और गर्माहट का अहसास होता है। लेकिन इस दौरान शरीर का कोर टेम्परेचर यानी आंतरिक तापमान घटने लगता है क्योंकि गर्म खून शरीर के अंदरूनी हिस्सों से बाहर की ओर चला जाता है।

यही वजह है कि शराब पीने के बाद भले ही शरीर गर्म महसूस करे, लेकिन अंदर से ठंड बढ़ती जाती है। शराब शरीर की कंपकंपी की प्रतिक्रिया को भी दबा देती है, जो शरीर में नेचुरल गर्मी पैदा करने की एक प्रक्रिया है। नीचे दिए ग्राफिक से मिथ बनाम रियलिटी समझिए-

सवाल- सर्दियों में अल्कोहल हमारे शरीर पर कैसे असर डालता है?

जवाब- चाहे गर्मी हाे, बरसात हो या फिर ठंड, शराब हर मौसम में सेहत को उतना ही नुकसान पहुंचाती है। अल्कोहल डाइयुरेटिक होता है, यानी यह यूरिन फ्रीक्वेंसी बढ़ाता है। ऐसे में जहां सर्दियों में प्यास कम लगती है, वहीं डिहाइड्रेशन तेजी से होता है। इससे बॉडी टेम्परेचर रेगुलेशन बिगड़ जाता है।

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, शराब हार्ट रेट को अस्थायी रूप से बढ़ा सकती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह खासकर उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है, जिन्हें पहले से ही हार्ट डिजीज है।

डॉ. रोहित शर्मा बताते हैं कि शराब ब्रेन को सुन्न कर देती है, जिससे ठंड के सिग्नल्स (जैसे कांपना) महसूस नहीं होते हैं। कोल्ड वेदर में अल्कोहल से नशा तेजी से चढ़ता है क्योंकि बॉडी हीट लॉस से एब्जॉर्ब्शन बढ़ता है।

सवाल- सर्दियों में शराब पीने के क्या खतरे हैं?

जवाब- डॉ. रोहित शर्मा बताते हैं कि शराब पीने से शरीर की अंदरूनी गर्मी स्किन की सतह पर आ जाती है। ठंडी हवा में यह गर्मी जल्दी फैल जाती है, जिससे शरीर का असली तापमान घटने लगता है। इसका असर हार्ट पर स्ट्रेन, डिहाइड्रेशन और निर्णय लेने की क्षमता में कमी के रूप में दिखता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल एब्यूज एंड अल्कोहलिज्म (NIAAA) के मुताबिक, कोल्ड एनवायर्नमेंट में शराब पीने से हाइपोथर्मिया का रिस्क बढ़ता है। इसके कई और भी खतरे हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

आइए, अब इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं।

शरीर के कोर टेम्परेचर में कमी, हाइपोथर्मिया का रिस्क

शराब के असर से जब ब्लड स्किन की ओर बढ़ता है तो हार्ट, लंग्स और ब्रेन जैसे अंगों में गर्म खून की कमी होने लगती है। इससे शरीर का तापमान धीरे-धीरे गिरने लगता है, जिसे हाइपोथर्मिया कहा जाता है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से हार्ट या ब्लड प्रेशर की समस्या है।

ठंड में ड्रिंक करने के बाद लोग अक्सर जैकेट या स्वेटर उतार देते हैं क्योंकि उन्हें गर्मी महसूस होती है। लेकिन यही गलती शरीर का तापमान गिराकर हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ा देती है।

डिहाइड्रेशन का रिस्क

शराब डाययूरेटिक होती है। यानी इसे पीने के बाद बार-बार पेशाब लगती है, जिससे शरीर का फ्लूइड बैलेंस बिगड़ जाता है। ठंड में वैसे भी प्यास कम लगती है, ऐसे में डिहाइड्रेशन और टेम्परेचर कंट्रोल दोनों बिगड़ जाते हैं। नतीजा शरीर की ठंड से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क

सर्दियों में शराब पीने से बॉडी टेम्परेचर घटने लगता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में अचानक बदलाव होता है, जो हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल- क्या ठंड में शराब पीने से हाथ-पैर जमने (फ्रॉस्टबाइट) का खतरा कम होता है?

जवाब- डॉ. रोहित शर्मा बताते हैं कि हां, स्किन पर ब्लड फ्लो बढ़ने से उंगलियों में फ्रॉस्टबाइट का खतरा थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन यह घातक है। कोर ऑर्गन्स को गर्मी न मिलने से हार्ट अटैक या ब्रेन डैमेज हो सकता है। शराब कोल्ड एक्सपोजर में बॉडी के नेचुरल रिस्पॉन्स को ब्लॉक करता है। इसलिए बेहतर है कि अल्कोहल अवॉइड करें।

सवाल- सर्दियों में शराब का असर जल्दी क्यों होता है?

जवाब- ठंड में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं। लेकिन शराब पीने पर ये वेसल्स फैल जाती हैं और ब्लड फ्लो तेजी से स्किन की सतह तक पहुंचता है। इससे न केवल शरीर की गर्मी जल्दी बाहर निकलती है, बल्कि शराब भी तेजी से ब्लड में मिक्स होकर असर दिखाती है। इस वजह से ठंड के मौसम में नशे का असर जल्दी और ज्यादा महसूस होता है। इससे ओवरड्रिंकिंग का खतरा बढ़ता है, जो हाइपोथर्मिया के रिस्क को दोगुना कर देता है।

सवाल- सर्दियों में शराब से जुड़ी और कौन सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं?

जवाब- डॉ. रोहित शर्मा बताते हैं कि शराब लिवर को प्रभावित करती है, जो ठंड में पहले से स्लो होता है। इससे लिवर फेल्योर और लिवर सिरोसिस की समस्या हो सकती है। महिलाओं में एस्ट्रोजन लेवल प्रभावित होता है, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होता है। लंबे समय में यह इम्यूनिटी कमजोर कर फ्लू या निमोनिया का खतरा बढ़ाता है।

सवाल- हाइपोथर्मिया क्या है और इसके क्या लक्षण हैं?

जवाब- यह एक मेडिकल इमरजेंसी होती है। इसमें शरीर का तापमान 35°C से नीचे चला जाता है। इस स्थिति में शरीर कांपना बंद कर देता है, व्यक्ति कन्फ्यूज होने लगता है और दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। अगर समय रहते इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

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