जरूरत की खबर- डायबिटीज का इलाज हुआ आसान:  हफ्ते में एक बार लगने वाला इंसुलिन इंजेक्शन लॉन्च, जानें इससे जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब
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जरूरत की खबर- डायबिटीज का इलाज हुआ आसान: हफ्ते में एक बार लगने वाला इंसुलिन इंजेक्शन लॉन्च, जानें इससे जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब

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15 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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डायबिटीज के करोड़ों मरीजों को रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। यह बहुत तकलीफदेह है। लेकिन अब उनकी ये परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।

भारत में पहली बार एक ऐसा बेसल इंसुलिन इंजेक्शन लॉन्च हुआ है, जिसे हफ्ते में सिर्फ एक बार लेना पड़ेगा। इससे रोज इंजेक्शन लगाने का दर्द और झंझट खत्म हो जाएगा।

आज ‘जरूरत की खबर’ में इस नए इंसुलिन इंजेक्शन के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि–

  • यह इंजेक्शन किन मरीजों के लिए है?
  • यह कैसे काम करता है?
  • इसकी कीमत क्या है और इसे लेते हुए किन बातों का ध्यान रखना होगा?

एक्सपर्ट– डॉ. साकेत कांत, सीनियर कंसल्टेंट, एंडोक्रोनोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- इंसुलिन क्या है और शरीर में इसका क्या काम है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • इंसुलिन एक हार्मोन है, जिसे हमारा अग्नाशय यानी पैंक्रियाज बनाता है।
  • इंसुलिन का मुख्य काम खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज) को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाना है।
  • कोशिकाएं इस ग्लूकोज का इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए करती हैं।
  • अगर खून में जरूरत से ज्यादा ग्लूकोज हो जाए तो इंसुलिन उसे फैट में बदलकर लिवर और मांसपेशियों में स्टोर करने में मदद करता है।
  • इससे ब्लड में शुगर का स्तर सामान्य बना रहता है।
  • अगर शरीर पर्याप्त इंसुलिन न बनाए या इंसुलिन ठीक से काम न करे, तो खून में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। ये खतरनाक है।

सवाल- इंसुलिन की कमी होने पर शरीर में क्या होता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • ग्लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता और खून में शुगर बढ़ने लगता है।
  • शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती। इसलिए थकान और कमजोरी महसूस होती है।
  • शरीर ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे वजन घट सकता है।
  • बार-बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना शुरू हो सकती है।
  • समय पर इलाज न मिलने पर नसों, आंखों, किडनी और दिल को नुकसान हो सकता है।

टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन की गंभीर कमी होने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) जैसी जानलेवा स्थिति भी हो सकती है।

सवाल- किन लोगों को इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए-

  • टाइप-1 डायबिटीज के सभी मरीजों को इंसुलिन की जरूरत है।
  • टाइप-2 डायबिटीज में सिर्फ तब, जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा बहुत कम हो जाए और मेटफॉर्मिन यानी इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने वाली दवा से शुगर कंट्रोल न हो पाए।
  • गर्भावस्था में डायबिटीज (जेस्टेशनल डायबिटीज) होने पर कुछ महिलाओं को इंसुलिन देना पड़ सकता है।
  • बहुत ज्यादा ब्लड शुगर होने पर कुछ समय के लिए बाहर से इंसुलिन दी जा सकती है।
  • ऑपरेशन, गंभीर संक्रमण या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में अस्थायी रूप से इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।
  • पैंक्रियाज की बीमारी होने पर जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन न बना पाए तो बाहर से इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।
  • डॉक्टर मरीज की ब्लड शुगर रिपोर्ट, HbA1c और हेल्थ कंडीशन को देखकर तय करते हैं कि इंसुलिन की जरूरत है या नहीं।

सवाल- क्या हर डायबिटीज पेशेंट को इंसुलिन लगानी पड़ती है?

जवाब- नहीं, हर डायबिटीज पेशेंट को इंसुलिन की जरूरत नहीं होती। टाइप-1 डायबिटीज में जीवन भर इंसुलिन लेना जरूरी होता है। लेकिन टाइप-2 डायबिटीज में बाहर से इंसुलिन की जरूरत सिर्फ तब पड़ती है, जब इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने वाली दवा शुगर कंट्रोल नहीं हो पाती।

सवाल- टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन की जरूरत कैसे अलग होती है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए-

टाइप-1 डायबिटीज

  • शरीर इंसुलिन बनाना लगभग बंद कर देता है।
  • जीवनभर बाहर से इंसुलिन लेना जरूरी हो जाता है।
  • एक दिन भी इंसुलिन न लेने पर खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है।
  • डेली इंसुलिन ही इलाज और सर्वाइवल का एकमात्र तरीका होता है।

टाइप-2 डायबिटीज

  • शरीर इंसुलिन बनाता तो है, लेकिन उसका असर कम हो जाता है।
  • शुरू में खानपान, एक्सरसाइज और दवाओं से इलाज किया जाता है।
  • बाद में जैसे–जैसे इंसुलिन के काम करने की क्षमता कम होती है, बाहर से इंसुलिन देना शुरू किया जाता है।
  • कुछ मरीजों को केवल थोड़े समय के लिए भी इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।

सवाल- बेसल और बोलस इंसुलिन में क्या अंतर है?

जवाब- बेसल और बोलस इंसुलिन, दोनों का काम अलग-अलग होता है। दोनों के बीच अंतर इस तरह समझ सकते हैं—

  • बेसल इंसुलिन दिन और रात, यानी भोजन के बीच और सोते समय भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है।
  • बोलस इंसुलिन भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाली ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है।
  • कुछ मरीजों को केवल बेसल इंसुलिन की जरूरत होती है, जबकि कुछ को बेहतर शुगर कंट्रोल के लिए बेसल और बोलस दोनों इंसुलिन दिए जाते हैं।
  • किस मरीज को कौन-सा इंसुलिन देना है, यह उसके डायबिटीज के प्रकार, ब्लड शुगर के स्तर और डॉक्टर के आकलन पर निर्भर करता है।

सवाल- टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स को अब तक इंसुलिन कैसे दी जाती है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए-

  • टाइप-1 डायबिटीज में मरीज को रोज इंसुलिन लेनी पड़ती है।
  • लंबे असर वाली बेसल इंसुलिन दिन में 1–2 बार दी जाती है।
  • हर मुख्य भोजन से पहले बोलस (फास्ट-एक्टिंग) इंसुलिन भी लेनी पड़ती है।
  • कुछ मरीज इंसुलिन पंप का इस्तेमाल करते हैं, जो लगातार इंसुलिन पहुंचाता है।
  • इंसुलिन की डोज ब्लड शुगर, भोजन और शारीरिक गतिविधि के अनुसार तय की जाती है।
  • इलाज का उद्देश्य पूरे दिन ब्लड शुगर को सामान्य सीमा में बनाए रखना होता है।

सवाल- इस इंजेक्शन से डायबिटीज के इलाज में क्या बदलाव होगा?

जवाब- हफ्ते में एक बार लगने वाला बेसल इंसुलिन उन मरीजों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें रोज इंसुलिन लेनी पड़ती है। इससे इंजेक्शन की संख्या कम होगी और इलाज का पालन करना आसान हो जाएगा। कई मरीजों के लिए डायबिटीज मैनेज करना आसान होगा। हालांकि, यह डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इस्तेमाल किया जाएगा।

सवाल- क्या डायबिटीज का हर मरीज इस नए इंजेक्शन का इस्तेमाल कर सकता है?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

  • नहीं, यह इंजेक्शन हर डायबिटिक व्यक्ति के लिए नहीं है।
  • यह मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए है, जिन्हें बेसल (लंबे असर वाला) इंसुलिन की जरूरत है।
  • ये इंजेक्शन डॉक्टर की सलाह से ही लिया जा सकेगा।
  • डॉक्टर मरीज की उम्र, डायबिटीज के प्रकार, ब्लड शुगर लेवल और टोटल मेटाबॉलिक कंडीशन के आधार पर ये फैसला करेंगे।

सवाल- क्या मरीज खुद से इस इंसुलिन पर स्विच कर सकते हैं?

जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए-

  • नहीं, खुद से इंसुलिन बिल्कुल नहीं बदलना चाहिए।
  • नया इंसुलिन शुरू करने का फैसला सिर्फ डॉक्टर कर सकते हैं।
  • स्विच करते समय सही डोज और समय तय करना जरूरी होता है।
  • इस दौरान ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करनी पड़ती है।
  • गलत तरीके से स्विच करने पर शुगर बहुत बढ़ या घट सकती है।

सवाल- क्या इस इंजेक्शन के साथ डायबिटीज की दूसरी दवाइयां भी चलती रहेंगी?

जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए-

  • हां, कई मरीजों में दूसरी डायबिटीज की दवाएं भी जारी रह सकती हैं।
  • कई मरीजों में डॉक्टर बाकी दवाएं बंद कर सकते हैं।
  • यह मरीज की बीमारी और ब्लड शुगर पर निर्भर करता है।
  • कुछ दवाओं की डोज डॉक्टर बदल सकते हैं।
  • कुछ मरीजों में भोजन के समय वाला इंसुलिन भी जारी रह सकता है।
  • जो भी हो, ये फैसला डॉक्टर का ही होगा।
  • आप अपने मन से कोई भी दवा बंद या शुरू न करें।

सवाल- डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां क्या हैं?

जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए-

  • डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिजीज है। इसलिए इसका इलाज दवा के साथ अच्छी दिनचर्या पर भी निर्भर करता है।
  • ब्लड शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है, ताकि आंखों, किडनी, नसों और दिल से जुड़ी जटिलताओं का खतरा कम हो।
  • अगर इंसुलिन लेते हैं तो डोज मिस न करें और डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज में कोई बदलाव न करें।
  • बार-बार शुगर बहुत ज्यादा या बहुत कम होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

बाकी सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए–

इंसुलिन इंजेक्शन से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब

सवाल- क्या हफ्ते में एक बार लगने वाले इंसुलिन इंजेक्शन के साइड इफेक्ट्स भी हैं?

जवाब- हां, इसके भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसेकि-

  • सबसे आम जोखिम लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) है।
  • इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन हो सकती है।
  • कुछ लोगों में वजन बढ़ना भी संभव है।
  • कोई गंभीर समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- इसे किस कंपनी ने बनाया है? इसकी कीमत कितनी है? येे भारत में कब से मिलेगी?

जवाब- पॉइंटर्स में देखें-

  • इसे डेनमार्क की कंपनी Novo Nordisk ने बनाया है।
  • इसका ब्रांड नाम Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) है।
  • यह भारत में 10 जुलाई, 2026 से उपलब्ध है।
  • इसकी कीमत लगभग ₹261 प्रति डोज है।

सवाल- दुनिया के किन देशों में पहले से इस इंजेक्शन का इस्तेमाल हो रहा है?

जवाब- भारत इसके शुरुआती लॉन्च देशों में शामिल है। इससे पहले इसे अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) में मंजूरी मिल चुकी है।

सवाल- क्या इसे घर पर लगाया जा सकता है?

जवाब- पॉइंटर्स में देखें-

  • हां, डॉक्टर की सलाह और सही ट्रेनिंग के बाद इसे घर पर लगाया जा सकता है।
  • इसे प्री-फिल्ड पेन से दिया जाता है।
  • पहली बार इस्तेमाल से पहले डॉक्टर या डायबिटीज एजुकेटर से तरीका सीखना जरूरी है।

सवाल- इसे कैसे स्टोर किया जाता है?

जवाब- पॉइंटर्स में देखें-

  • इंसुलिन को 2–8°C पर फ्रिज में रखें।
  • इसे फ्रीज न करें।
  • सीधी धूप और अधिक गर्मी से बचाकर रखें।
  • इस्तेमाल के दौरान लेबल में दिए गए स्टोरेज निर्देशों का पालन करें।

सवाल- अगर इंसुलिन इंजेक्शन मिस हो जाए तो क्या करें?

जवाब- पॉइंटर्स में देखें-

  • घबराएं नहीं और डबल डोज बिल्कुल न लें।
  • जैसे ही याद आए, डॉक्टर या प्रिस्क्राइबिंग गाइड के अनुसार डोज लें।
  • अगली डोज का समय डॉक्टर के बताए शेड्यूल के अनुसार रखें।
  • बार-बार डोज मिस होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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