जरूरत की खबर- तमिलनाडु में कच्चे अंडे की मेयोनीज बैन:  इससे गंभीर बीमारियों का रिस्क, जानें घर पर कैसे बनाएं हेल्दी, सेफ मेयोनीज
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जरूरत की खबर- तमिलनाडु में कच्चे अंडे की मेयोनीज बैन: इससे गंभीर बीमारियों का रिस्क, जानें घर पर कैसे बनाएं हेल्दी, सेफ मेयोनीज

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2 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में कच्चे अंडे से बनी मेयोनीज (रॉ-एग मेयोनीज) के मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और बिक्री पर एक साल के लिए बैन लगा दिया गया है। निश्चित ही मेयोनीज प्रेमियों के लिए ये एक बुरी खबर है। लेकिन आखिर सरकार ने ये एक्शन क्यों लिया है, जबकि बहुत से लोग ब्रेड, मैक्रोनी, पास्ता जैसी चीजों के साथ इसे बड़े ही चाव से खाते हैं।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में रॉ-एग मेयोनीज के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • रॉ-एग मेयोनीज हमारी सेहत के लिए कितनी नुकसानदायक है?
  • घर पर मेयोनीज कैसे तैयार की जा सकती है?

एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, न्यूट्रिशनिस्ट और ‘वनडाइटटुडे’ की फाउंडर

सवाल- मेयोनीज क्या है?

जवाब- मेयोनीज एक गाढ़ी, क्रीमी सॉस है, जो आमतौर पर एग यॉक (अंडे के बीच का पीला हिस्सा), तेल और सिरका या नींबू के रस को मिलाकर बनाई जाती है। इसका इस्तेमाल अक्सर सैंडविच, सलाद और डिप के तौर पर किया जाता है।

सवाल- मेयोनीज कैसे बनाई जाती है?

जवाब- मेयोनीज इमल्शन नामक प्रक्रिया से बनती है, जिसमें दो अघुलनशील तरल पदार्थों (जैसे तेल और पानी) को एक साथ फेंटकर मिश्रण बनाया जाता है। आमतौर पर यह एग यॉक, तेल और एसिडिक कंपोनेंट्स जैसे सिरका या नींबू के रस को धीरे-धीरे एक साथ फेंटकर बनाई जाती है। तेल को धीरे-धीरे मिलाया जाता है ताकि यह छोटे-छोटे बूंदों में अलग हो जाए और एग यॉक उसे फेंटकर एक गाढ़ा और चिकना सॉस बना दे।

सवाल- तमिलनाडु में रॉ-एग मेयोनीज पर बैन क्यों लगाया गया है?

जवाब- तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ‘कच्चे अंडे से बनी मेयोनीज एक ‘हाई रिस्क फूड’ है। बहुत से फूड बिजनेस ऑपरेटर्स मेयोनीज बनाने के लिए कच्चे अंडों का इस्तेमाल करते हैं। अच्छी तरह से स्टोर न होने की वजह से इसमें साल्मोनेला और ई. कोली जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। ये सेहत के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।’ इसलिए रॉ-एग मेयोनीज पर बैन लगाया गया है।

सवाल- अगर कोई इस बैन का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?

जवाब- इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या फर्म पर स्टेट फूड कमीशन कड़ी कार्रवाई कर सकता है। रॉ-एग मेयोनीज बेचने, स्टोर करने व मैन्युफैक्चरिंग करने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है। दुकान का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। गंभीर मामलों में अन्य कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।

सवाल- रॉ-एग मेयोनीज हमारी सेहत के लिए कितनी नुकसानदायक है?

जवाब- न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि कच्चे अंडे में पहले से ही साल्मोनेला और ई. कोली जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। जब हम बिना पकाए मेयोनीज में इसका इस्तेमाल करते हैं तो वे बैक्टीरिया जीवित रहते हैं। लंबे समय तक स्टोर करने से इसमें और भी बैक्टीरिया पनप सकते हैं।

ऐसे में जब कोई इसे खाता है तो ये पेट में जाकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर मेयोनीज खाने के 6 से 72 घंटे के भीतर इसके लक्षण दिखने लगते हैं। इसमें दस्त, उल्टी और पेट में ऐंठन जैसे लक्षण शामिल हैं। रॉ-एग मेयोनीज खाने से किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- अगर किसी ने गलती से रॉ-एग मेयोनीज खा ली है तो उसे क्या करना चाहिए?

जवाब- इसके लिए सबसे पहले घबराएं नहीं। अगर कोई लक्षण महसूस हो तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खासकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को तुरंत मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ सकती है क्योंकि इनकी इम्युनिटी पहले से ही कमजोर रहती है। ध्यान रखें कि खुद से कोई भी दवा न लें।

सवाल- क्या सभी तरह की मेयोनीज सेहत के लिए नुकसानदायक हैं?

जवाब- डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि रोजाना मेयोनीज खाने से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इसमें फैट की मात्रा ज्यादा होती है। हालांकि रॉ-एग मेयोनीज की अपेक्षा पॉश्चराइज्ड (Pasteurized) अंडे से बनी मेयोनीज, वीगन मेयोनीज या घर पर हेल्दी तरीके से बनी मेयोनीज ज्यादा नुकसानदायक नहीं होती है।

सवाल- रॉ-एग मेयोनीज और अन्य मेयोनीज में क्या अंतर होता है?

जवाब- इसमें मुख्य अंतर यह है कि रॉ-एग मेयोनीज में बिना पॉश्चराइज्ड किए गए अंडों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसमें बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है।

वहीं इसके विपरीत अन्य मेयोनीज या तो पॉश्चराइज्ड अंडे से बनाई जाती है या उसमें अंडे का इस्तेमाल ही नहीं किया जाता है। पाश्चराइजेशन प्रक्रिया में अंडों को एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है। इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जाते हैं, लेकिन अंडे के पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ गैस्ट्रोनॉमी एंड फूड साइंस में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, मेयोनीज के साल्मोनेला इन्फेक्शन के खतरे को कम करने के लिए पॉश्चराइज्ड अंडे का इस्तेमाल करना सुरक्षित है।

सवाल- कैसे पता चलेगा कि कौन सी मेयोनीज सुरक्षित है?

जवाब- सुरक्षित मेयोनीज के डिब्बे पर स्पष्ट रूप से ‘पॉश्चराइज्ड अंडों से निर्मित’ लिखा होता है। खरीदते समय हमेशा लेबल ध्यान से पढ़ें। अगर ये लिखा है तो मेयोनीज सुरक्षित है। इसके अलावा बाजार में कई तरह की वीगन मेयोनीज भी आती हैं, जो आमतौर पर सुरक्षित होती हैं।

सवाल- घर पर मेयोनीज कैसे बनाई जा सकती है?

जवाब- अगर आप मेयोनीज खाने के शौकीन हैं तो इसे अपने घर पर ही कुछ आसान तरीकों से बना सकते हैं। नीचे ग्राफिक में अंडे वाली और बिना अंडे वाली दोनों तरह की मेयोनीज बनाने की विधि दी गई है। इसे समझिए-

सवाल- घर पर मेयोनीज बनाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इस दौरान बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके लिए केवल पॉश्चराइज्ड अंडों का ही इस्तेमाल करें, जो कुछ बड़े स्टोर्स पर आसानी से मिल जाते हैं। इसके अलावा मेयोनीज बनाने में इस्तेमाल होने वाले सभी बर्तन और अन्य चीजें अच्छी तरह से साफ होनी चाहिए। मेयोनीज तैयार होने के बाद उसे तुरंत फ्रिज में रखना चाहिए और एक सप्ताह के भीतर इसे इस्तेमाल कर लेना चाहिए।

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